{"_id":"5aff276b4f1c1b1b5e8b58e9","slug":"freedom-fighter-raghuvir-singh-dies","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुवीर सिंह का निधन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुवीर सिंह का निधन
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 19 May 2018 12:50 AM IST
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की अर्थी को कंधा देते सांसद।
- फोटो : अमर उजाला
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जनपद के एक मात्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुवीर सिंह बरवाला का निधन हो गया। 95 वर्षीय रघुवीर सिंह बरवाला ने शुक्रवार सुबह नोएडा के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। वो काफी समय से बीमार चल रहे थे। बरवाला गांव में उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ दाह संस्कार किया गया। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान समेत राजनेताओं, पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
शाहपुर क्षेत्र के गांव बरवाला निवासी चौधरी रघुवीर सिंह वर्तमान में जिले के एकमात्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वह शामली में अपने पुत्र रविंद्र सिंह के पास रह रहे थे। एक सप्ताह पूर्व उन्हें सांस लेने में परेशानी महसूस हुई। जिसके बाद उन्हें नोएडा के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया।
नोएडा से उनका शव गांव बरवाला लाया गया। दोपहर एक बजे घर से शव यात्रा निकली। उनके पार्थिक शरीर को तिरंगे में लपेटे गया था। इस दौरान शामिल सैकड़ों लोगों ने भारत माता की जय, स्वतंत्रता सेनानी अमर रहे का जयघोष किया। गांव के शमशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री मंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान, क्षेत्रीय विधायक विजय कश्यप, एसडीएम सदर कुमार धर्मेंद्र, तहसीलदार सदर रंजीत सिंह, नायब तहसीलदार सदर शिव अवतार, सीओ बुढ़ाना हरिराम यादव, थाना प्रभारी निरीक्षक कुशलपाल सिंह ने पुष्प चक्र अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही पुलिस लाइन से आई गार्द ने स्वतंत्रता सेनानी को सलामी दी।
उनके पुत्र रविंद्र सिंह ने मुखाग्नि दी। जिला पंचायत सदस्य धीरेंद्र सिंह, भाकियू नेता सुखपाल सिंह, आसकरण, अरविंद मलिक आदि मौजूद रहे। एडीएम प्रशासन शियाराम मौर्य और एसपी क्राइम रामभजन चौरसिया दोपहर लगभग तीन बजे गांव बरवाला में स्वतंत्रता सेनानी के आवास पर पहुंचे। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र से उनके पिता के निधन के बारे में जानकारी लेकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
भरा पूरा परिवार छोड़ गए
शाहपुर। स्वतंत्रता सेनानी चौधरी रघुबीर सिंह अपने पीछे पूरा भरा परिवार छोड़ गए है। वे अपने चार भाइयो में सबसे बड़े थे। वह अपने पीछे एक पुत्र रविंद्र सिंह, पुत्रवधू गुंजन सिंह, पौत्र पार्थ, पौत्री खुशी के अलावा दो पुत्री माया देवी व संध्या के साथ आठ नाती छोड़ गये है ।
उनके पुत्र रविंद्र सिंह शामली में लोक निर्माण विभाग में अधिशासी अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। जबकि एक पुत्री शामली के सिक्का के इंटर कॉलेज व दूसरी पुत्री भोपा में बेसिक विद्यालय में शिक्षिका हैं।
आजाद हिंद फौज में हुए थे शामिल
शाहपुर। महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद बोस के नारे से प्रभावित होकर स्वतंत्रता सेनानी के पिता ने ब्रिटिश सरकार की नौकरी छोड़ आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए थे। जिनसे प्रेरणा लेकर स्वतंत्रता सेनानी भी आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए थे।
स्वतंत्रता सेनानी चौधरी रघुवीर सिंह के पुत्र रविंद्र सिंह ने बताया कि उनके बाबा बुद्ध सिंह ब्रिटिश सरकार में नौकरी करते थे। एक दिन उन्होंने महान क्रांतिकारी सुभाष चंद बोस का भाषण सुना।
जिसमें उन्होंने तुम मुझे खून दो , मैं तुम्हे आजादी दूंगा, का नारा दिया तो वह उस नारे से काफी प्रभावित हुए और ब्रिटिश सरकार की नौकरी छोड़ आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए उन्हीं के प्रेरणा से उनके पिता चौधरी रघुवीर सिंह भी आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। स्वतंत्रता आंदोलन में वह सिंगापुर, जापान के अलावा 1942 में बर्मा की जिगर कच्चा नामक जेल में रहे जिसके बाद वह देश आजाद होने पर 1947 में गांव में आए।
दिल्ली पुलिस में भी रहे
शाहपुर। स्वतंत्रता सेनानी देश आजाद होने के बाद दिल्ली पुलिस में भी कार्यरत रहे। इस दौरान उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति भवन व प्रधानमंत्री आवास पर रही । वर्तमान में उनको तीन जगह से पेंशन मिल रही थी। चौधरी रघुवीर सिंह सन 1951 से 1981 तक दिल्ली पुलिस में कार्यरत रहे ।
इस दौरान उनकी ड्यूटी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद व प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के आवासों पर रही। इसके बाद वह पूर्व प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी के आवास पर भी तैनात रहे। तीनों नेताओं को उनसे काफी लगाव था। वर्तमान में उन्हें केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानी के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा पेंशन मिल रही थी।
देश के बंटवारे पर दु:ख व्यक्त करते थे
शाहपुर। स्वतंत्रता सेनानी की पुत्रवधू गुंजन सिंह ने बताया कि वह हमेशा देश के बंटवारे पर दु:ख व्यक्त करते रहते थे। साथ ही वर्तमान में देश में हो रही जाति की राजनीति पर भी दुख व्यक्त करते थे।
हमेशा सुबह शाम पूजा में सभी देशवासियों के मंगल की कामना करते थे। साथ ही वह जब देश के हालात पर बात करते थे तो वह हमेशा देश के बंटवारे पर दुख जताते थे। साथ ही वर्तमान में हो रही जाति की राजनीति पर दुख व्यक्त करते थे।
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शाहपुर क्षेत्र के गांव बरवाला निवासी चौधरी रघुवीर सिंह वर्तमान में जिले के एकमात्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वह शामली में अपने पुत्र रविंद्र सिंह के पास रह रहे थे। एक सप्ताह पूर्व उन्हें सांस लेने में परेशानी महसूस हुई। जिसके बाद उन्हें नोएडा के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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नोएडा से उनका शव गांव बरवाला लाया गया। दोपहर एक बजे घर से शव यात्रा निकली। उनके पार्थिक शरीर को तिरंगे में लपेटे गया था। इस दौरान शामिल सैकड़ों लोगों ने भारत माता की जय, स्वतंत्रता सेनानी अमर रहे का जयघोष किया। गांव के शमशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री मंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान, क्षेत्रीय विधायक विजय कश्यप, एसडीएम सदर कुमार धर्मेंद्र, तहसीलदार सदर रंजीत सिंह, नायब तहसीलदार सदर शिव अवतार, सीओ बुढ़ाना हरिराम यादव, थाना प्रभारी निरीक्षक कुशलपाल सिंह ने पुष्प चक्र अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही पुलिस लाइन से आई गार्द ने स्वतंत्रता सेनानी को सलामी दी।
उनके पुत्र रविंद्र सिंह ने मुखाग्नि दी। जिला पंचायत सदस्य धीरेंद्र सिंह, भाकियू नेता सुखपाल सिंह, आसकरण, अरविंद मलिक आदि मौजूद रहे। एडीएम प्रशासन शियाराम मौर्य और एसपी क्राइम रामभजन चौरसिया दोपहर लगभग तीन बजे गांव बरवाला में स्वतंत्रता सेनानी के आवास पर पहुंचे। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र से उनके पिता के निधन के बारे में जानकारी लेकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
भरा पूरा परिवार छोड़ गए
शाहपुर। स्वतंत्रता सेनानी चौधरी रघुबीर सिंह अपने पीछे पूरा भरा परिवार छोड़ गए है। वे अपने चार भाइयो में सबसे बड़े थे। वह अपने पीछे एक पुत्र रविंद्र सिंह, पुत्रवधू गुंजन सिंह, पौत्र पार्थ, पौत्री खुशी के अलावा दो पुत्री माया देवी व संध्या के साथ आठ नाती छोड़ गये है ।
उनके पुत्र रविंद्र सिंह शामली में लोक निर्माण विभाग में अधिशासी अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। जबकि एक पुत्री शामली के सिक्का के इंटर कॉलेज व दूसरी पुत्री भोपा में बेसिक विद्यालय में शिक्षिका हैं।
आजाद हिंद फौज में हुए थे शामिल
शाहपुर। महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद बोस के नारे से प्रभावित होकर स्वतंत्रता सेनानी के पिता ने ब्रिटिश सरकार की नौकरी छोड़ आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए थे। जिनसे प्रेरणा लेकर स्वतंत्रता सेनानी भी आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए थे।
स्वतंत्रता सेनानी चौधरी रघुवीर सिंह के पुत्र रविंद्र सिंह ने बताया कि उनके बाबा बुद्ध सिंह ब्रिटिश सरकार में नौकरी करते थे। एक दिन उन्होंने महान क्रांतिकारी सुभाष चंद बोस का भाषण सुना।
जिसमें उन्होंने तुम मुझे खून दो , मैं तुम्हे आजादी दूंगा, का नारा दिया तो वह उस नारे से काफी प्रभावित हुए और ब्रिटिश सरकार की नौकरी छोड़ आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए उन्हीं के प्रेरणा से उनके पिता चौधरी रघुवीर सिंह भी आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। स्वतंत्रता आंदोलन में वह सिंगापुर, जापान के अलावा 1942 में बर्मा की जिगर कच्चा नामक जेल में रहे जिसके बाद वह देश आजाद होने पर 1947 में गांव में आए।
दिल्ली पुलिस में भी रहे
शाहपुर। स्वतंत्रता सेनानी देश आजाद होने के बाद दिल्ली पुलिस में भी कार्यरत रहे। इस दौरान उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति भवन व प्रधानमंत्री आवास पर रही । वर्तमान में उनको तीन जगह से पेंशन मिल रही थी। चौधरी रघुवीर सिंह सन 1951 से 1981 तक दिल्ली पुलिस में कार्यरत रहे ।
इस दौरान उनकी ड्यूटी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद व प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के आवासों पर रही। इसके बाद वह पूर्व प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी के आवास पर भी तैनात रहे। तीनों नेताओं को उनसे काफी लगाव था। वर्तमान में उन्हें केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानी के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा पेंशन मिल रही थी।
देश के बंटवारे पर दु:ख व्यक्त करते थे
शाहपुर। स्वतंत्रता सेनानी की पुत्रवधू गुंजन सिंह ने बताया कि वह हमेशा देश के बंटवारे पर दु:ख व्यक्त करते रहते थे। साथ ही वर्तमान में देश में हो रही जाति की राजनीति पर भी दुख व्यक्त करते थे।
हमेशा सुबह शाम पूजा में सभी देशवासियों के मंगल की कामना करते थे। साथ ही वह जब देश के हालात पर बात करते थे तो वह हमेशा देश के बंटवारे पर दुख जताते थे। साथ ही वर्तमान में हो रही जाति की राजनीति पर दुख व्यक्त करते थे।