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उज्ज्वला योजना की हकीकत: चूल्हे पर पकता है खाना, गैस चूल्हे और सिलिंडर बने शोपीस, पढ़ें क्या कहती हैं महिलाएं

Fri, 24 Sep 2021 05:56 PM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Fri, 24 Sep 2021 05:56 PM IST
सार

केंद्र सरकार की उज्जवला योजना के तहत मुजफ्फरनगर जिले के दो लाख परिवारों को लाभ मिला था। लेकिन सिलिंडर के दाम 900 रुपये के आसपास पहुंचने से सालभर में 25 फीसदी लाभार्थी ही इस योजना के सिलिंडर भरवा रहे हैं।

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Muzaffarnagar News: Food is cooked on the stove, gas stove and cylinders become showpieces
दूधली में चूल्हे में लकड़ी जलाकर खाना पकाती गृहिणी नीलम। - फोटो : amar ujala

विस्तार

केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना की हकीकत गांवों में की गई पड़ताल में सामने आई है। जरूरतमंदों को मुफ्त में मिले गैस चूल्हे और सिलिंडर घर में शोपीस बनकर रह गए हैं। सरकार की योजना में फ्री में पहला सिलिंडर घर पहुंचा, तो महिलाओं को नई उम्मीद जगी। फिर महंगाई के तड़के में मजदूरी पेशा परिवार दूसरा सिलिंडर भरवाने में लाचार और बेबस है। मुजफ्फरनगर जिलेभर में दो लाख परिवारों को इस योजना का लाभ दिया गया है, लेकिन सिलिंडर के दाम 900 रुपये के आसपास पहुंचने से सालभर में 25 फीसदी लाभार्थी ही इस योजना के सिलिंडर भरवा रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को चूल्हे पर खाना पकाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

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क्या कहती हैं लाभार्थी महिलाएं
- दूधली गांव की महिला रामवती को डेढ़ साल पहले सरकार की योजना से मुफ्त में गैस सिलिंडर और चूल्हा मिला था। उन्हें लकड़ी जलाकर खाना बनाने से मुक्ति मिली थी। लेकिन उसके बाद सब्सिडी खत्म कर देने से सिलिंडर रिफलिंग करना परिवार की सामर्थ्य से बाहर हो गया है।
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- मजदूरी पेशा परिवार से ताल्लुक रखने वाली दूधली निवासी गृहिणी उमा का कहना है कि उज्ज्वला योजना से मिला चूल्हा और रिफिल शोपीस बनकर रहे गए हैं। सिलिंडर महंगा होने से लकड़ी जलाकर चूल्हे पर खाना पकाना पड़ता है।
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- पति के निधन के बाद दूधली गांव में सुरेशवती को मुश्कीपुर गांव की एजेंसी से योजना का लाभ दिया गया। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वह खेतों में मजदूरी करती है। गैस सिलिंडर रिफिल दोबारा नहीं होने से वह घर का खाना लकड़ी से बनाती है।

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- चरथावल के दूधली की नीलम परिवार का खाना चूल्हे पर बनाने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल किया कि सरकार से मिले फ्री के सिलिंडरों का गरीबों को क्या फायदा हुआ? मुफ्त की लत लगाकर सब्सिडी खत्म करना लाभार्थियों के साथ नाइंसाफी है।


उज्ज्वला योजना में परिवार में दूसरे नाम से ज्यादातर लाभार्थियों ने फ्री के कनेक्शन लिए थे, जबकि उनके परिवार में पहले से कनेक्शन थे। पिछले एक महीने में 50 रुपये बढ़ने से करीब 900 रुपये का सिलिंडर रिफिल मिल रहा है। एजेंसी पर योजना के करीब 4500 कनेक्शन हैं, उनमें 50 प्रतिशत लोग ही रिफिलिंग करवा पाते हैं। चूंकि परिवार खपत के अनुसार रिफिल खरीदता है। - धमेंद्र पुंडीर, प्रबंधक, बालाजी इंडेन गैस एजेंसी

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जनपद में अलग-अलग कंपनियों की 51 एजेंसी से 199505 कनेक्शन उज्ज्वला योजना से आवंटित हैं। सालभर में मिलने वालों में से एक परिवार पर तीन रिफिल का औसत आ रहा है। - वरुण सिंह, नोडल अधिकारी मुजफ्फरनगर बीपीसीएल

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