मुजफ्फरनगर। जब छत्तीसगढ़ में सरकार ने घर भेजने की कोई व्यवस्था नहीं की तो प्रवासी मजदूर बच्चों के साथ पैदल ही चल दिए। कई के पास चप्पल भी नहीं थी और न ही खाने-पीने का सामान।
छत्तीसगढ़ में कोल्हुओं पर काम करने वाले चरथावल के कई परिवार सोमवार को रोडवेज बस स्टैंड पर पहुंचे। उन्होंने अपनी विपदा सुनाते हुए कहा कि मजदूरों की कोई सुध नहीं लेता। अकबरगढ़ के ईश्वर ने बताया कि उन्होंने लॉकडाउन के कारण कितने कष्ट सहे हैं, वहीं जानते हैं। छोटे-छोटे बच्चे तपती दोपहर में सड़कों पर नंगे पैर भूखे-प्यासे चले हैं। इसके अलावा गुजरात के मौरवी से भी कई श्रमिक यहां लौटे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें गोरखपुर तक 850 रुपये ट्रेन का किराया देना पड़ा। जट मुझेड़ा निवासी अमित, विकास, पंकज, शुभम एवं विकास ने बताया कि वे वहां पर मेंटीनेंस का काम करते थे। साथ ही छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से 25 और लोग परिवार के साथ पैदल आए हैं। इन्हें सोनभद्र से बस मिल सकी। इससे पहले इन्होंने कभी पैदल तो कभी किसी अन्य वाहन में लिफ्ट लेकर सफर पूरा किया।