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अनीता के हौसलें से हार गई जीवन की हर कठिनाई

Sat, 24 Oct 2020 04:11 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2020 04:11 PM IST
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Every difficulty of life lost due to Anita's freshness
डा. अनीता रानी प्राचार्या - फोटो : MUZAFFARNAGAR
अनीता के हौसले से हार गई जीवन की हर कठिनाई
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मुजफ्फरनगर, चरथावल। हौसले और हिम्मत के दम पर महाराजा अग्रसेन कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या डा. अनीता रानी ने जीवन की हर मुश्किल पर विजय पाई। उनकी जिंदगी संघर्षों की किताब है। वह कॅरियर में कामयाबी पाकर शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की प्रेरणा से नारी शक्ति की मिसाल बन गई।
डा. अनीता बताती हैं कि उनकी शादी से पहले पिता ने अचानक गृहस्थ जीवन त्याग कर संन्यास ग्रहण कर लिया। परिवार में मां और तीन छोटे भाई बहन थे। मां के साथ पशुपालन का कार्य करते हुए उन्होंने भाई-बहनों को पढ़ाया और खुद बड़ौत से एमए और बीएड किया। 1994 में उनकी शादी किसान परिवार में हुई। मेधावी होने के कारण उनकी नौकरी अंशकालिक हिंदी प्रवक्ता के रूप में बड़ौत कॉलेज में लग गई किंतु संयुक्त परिवार के पुराने विचारों का होने के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी। पति ने मुजफ्फरनगर प्राइवेट जॉब शुरू किया तो वह भी दोनों बेटों को लेकर मुजफ्फरनगर शिफ्ट हो गईं।
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बड़े बेटे को स्कूल में दाखिल कराने के बाद खुद पीएचडी पर ध्यान केंद्रित कर लिया और चरथावल महाराजा अग्रसेन कन्या महाविद्यालय में प्रवक्ता पद ज्वॉइन किया। उन्हें वर्ष 2008 में पीएचडी की उपाधि भी मिल गई। उसी वर्ष पति के असमय निधन से उन्हें गहरा आघात लगा। जीवन में दोराहे पर खड़ी हो गईं लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारीं और धैर्य के साथ मुसीबतों के सामने डटे रहने का फैसला कर लिया। जीवन के सफर के अगले नौ वर्ष मुश्किल से बीते। बच्चे बड़े हुए। अचानक ऐसी खबर मिली जो हिम्मत और हौसला दोनों खोने वाली थी। चेतना शून्य हो गई। मालूम चला 21 साल के बेटे को कैंसर है। लेकिन अंतरात्मा ने फिर हिम्मत दी और पूरी ताकत के साथ खड़ी हुईं। उनके आत्मबल और दृढ़ विश्वास को ईश्वर ने फलीभूत किया। बेटा लंबे समय इलाज के बाद स्वस्थ हुआ और उसने बीमारी के दौरान परीक्षा पास की। दिसंबर 2018 में वह बेसिक शिक्षा परिषद में शिक्षक के पद पर तैनात हुआ। छोटा बेटा सीसीएस यूनिवर्सिटी में एलएलबी कर रहा है। कहती है विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य का साथ नहीं छोड़ा और शक्ति के दम पर हर मुसीबत को हराया।
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