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हिंदी और हिंदुस्तान के रीति-रिवाज की कायल है नार्वे में डियाना
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नार्वे में नवजात बेटी संग निशांत मलिक-डियाना दंपती, जिन्हें लुभाती है हिंदी और हिंदुस्तान के रीत?
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
हिंदी और हिंदुस्तान के रीति-रिवाज की कायल है नार्वे में डियाना
चरथावल। हिंदी भाषा का यशोगान विदेशी सरजमीं पर खूब फलफूल रहा है। बधाई कलां गांव के निशांत मलिक एवं उनकी जीवनसंगिनी डियाना विदेशी होने के बावजूद घरेलू कामकाज में हिंदी बोलते हैं। पीएचडी करने के दौरान दो साल पहले दोनों ने नार्वे में विवाह किया था। दंपती ने आकर स्वागत सत्कार मुजफ्फरनगर में किया था। जुलाई में उन्होंने नार्वे में बेटी को जन्म दिया, तो उससे पहले ही हिंदी की वर्णमाला के अक्षरों का खजाना और दादा-दादी, नाना-नानी आदि की कहानियों की किताबों को ऑनलाइन मंगाया है।
पांच वर्ष पूर्व बधाई कलां निवासी अरविंद मलिक-मेनका दंपती का बेटा निशांत नार्वे के कोस्लो शहर में पीएचडी कर रहा था। वहां पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात पोलेंड निवासी सहपाठी डियाना के साथ हुई। वर्ष 2019 में उन्होंने विदेश में ही एक दूजे के हो गए। स्वागत के दौरान पति संग गांव आईं, तो 10 दिन यहां रहकर गांव की पृष्ठभूमि की कायल हो गई। गांव में सास मेनका मलिक के सानिध्य में हिंदी और हिंदुस्तान की संस्कृति, रीति रिवाज और खान पान उन्हें खूब लुभाएं थे। निशांत कहते हैं मेरी पत्नी से घर पर पारिवारिक वार्तालाप हिंदी में करने लगे हैं। ओस्लो यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद रहते हुए साथियों के बीच हिंदी की तारीफ करती हैं और नमस्ते बोलती है।
हिंदी की रोचक कहानियों से प्रभावित है डियाना
अप्रैल में लॉकडाउन के दौरान निशांत गांव आए हुए थे। बताते हैं कि डियाना ने बेटी के जन्म तीन जुलाई से पहले ही हिंदी की रोचक एवं शिक्षाप्रद कहानियों का खजाना पंचतंत्र, हिंदी वर्णमाला एवं हिंदी से संबंधित सामग्री भारत से मंगवा ली थी। बेटी को हिंदी ज्ञान कराना डियाना की इच्छा है। बेटी ऐलिसा मलिक को दादा-दादी, नाना-नानी और पशु पक्षियों की कहानियां सुनाकर हिंदी और हिंदुस्तान के रीति रिवाजों से अवगत कराने की दंपती की मंशा है।
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चरथावल। हिंदी भाषा का यशोगान विदेशी सरजमीं पर खूब फलफूल रहा है। बधाई कलां गांव के निशांत मलिक एवं उनकी जीवनसंगिनी डियाना विदेशी होने के बावजूद घरेलू कामकाज में हिंदी बोलते हैं। पीएचडी करने के दौरान दो साल पहले दोनों ने नार्वे में विवाह किया था। दंपती ने आकर स्वागत सत्कार मुजफ्फरनगर में किया था। जुलाई में उन्होंने नार्वे में बेटी को जन्म दिया, तो उससे पहले ही हिंदी की वर्णमाला के अक्षरों का खजाना और दादा-दादी, नाना-नानी आदि की कहानियों की किताबों को ऑनलाइन मंगाया है।
पांच वर्ष पूर्व बधाई कलां निवासी अरविंद मलिक-मेनका दंपती का बेटा निशांत नार्वे के कोस्लो शहर में पीएचडी कर रहा था। वहां पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात पोलेंड निवासी सहपाठी डियाना के साथ हुई। वर्ष 2019 में उन्होंने विदेश में ही एक दूजे के हो गए। स्वागत के दौरान पति संग गांव आईं, तो 10 दिन यहां रहकर गांव की पृष्ठभूमि की कायल हो गई। गांव में सास मेनका मलिक के सानिध्य में हिंदी और हिंदुस्तान की संस्कृति, रीति रिवाज और खान पान उन्हें खूब लुभाएं थे। निशांत कहते हैं मेरी पत्नी से घर पर पारिवारिक वार्तालाप हिंदी में करने लगे हैं। ओस्लो यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद रहते हुए साथियों के बीच हिंदी की तारीफ करती हैं और नमस्ते बोलती है।
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हिंदी की रोचक कहानियों से प्रभावित है डियाना
अप्रैल में लॉकडाउन के दौरान निशांत गांव आए हुए थे। बताते हैं कि डियाना ने बेटी के जन्म तीन जुलाई से पहले ही हिंदी की रोचक एवं शिक्षाप्रद कहानियों का खजाना पंचतंत्र, हिंदी वर्णमाला एवं हिंदी से संबंधित सामग्री भारत से मंगवा ली थी। बेटी को हिंदी ज्ञान कराना डियाना की इच्छा है। बेटी ऐलिसा मलिक को दादा-दादी, नाना-नानी और पशु पक्षियों की कहानियां सुनाकर हिंदी और हिंदुस्तान के रीति रिवाजों से अवगत कराने की दंपती की मंशा है।
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