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तीन बदमाश पांच मिनट में लूट ले गए बैंक
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 31 May 2017 12:08 AM IST
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बैंक में पूछताछ करते पुलिसकर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
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पीनना गांव में बैंक को हथियारों के बल पर लूटने वाले बदमाश मात्र पांच मिनट में ही घटना को अंजाम देकर फरार हो गए। बदमाशों ने उस समय घटना को अंजाम दिया, जब बैंक में कोई ग्राहक नहीं था। बदमाशों ने सबसे पहले सायरन बजाने वाले लॉक की चाबी को अपने कब्जे में लिया। शामली रोड स्थित फैक्ट्री के बाहर लगे कैमरे की फुटेज की भी छानबीन की गई है।
पीनना स्थित बैंक शाखा में घुसे बदमाश पांच मिनट के भीतर ही साढ़े सात लाख की नगदी समेटकर फरार हो गए। बदमाशों को पता था कि सीसीटीवी फुटेज से पहचान हो सकती है, इसलिए बाइक चलाने वाले ने हेलमेट और बाकी दो साथियों ने अपने चेहरे कपड़े से ढक रखे थे। धड़धड़ाते हुए शाखा में घुसे और वहां मौजूद स्टाफ के तीनों लोगों को पिस्टल के बल पर बंधक बना लिया।
मैनेजर से सायरन वाले बॉक्स की चाबी कब्जे में ली। तीनों को रूम में बंद कर कैश लूटकर फरार हो गए। जांच में जुटी पुलिस ने शामली हाईवे पर घंटों बाइकों को चेक किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई। रोड पर स्थित फैक्ट्री के बाहर लगे कैमरे की सीसीटीवी फुटेज खंगाली, लेकिन ऐसी कोई बाइक फुटेज में दिखाई नहीं दी, जिस पर तीन युवक सवार हो। इस दौरान जो बाइकें गुजरीं, उन पर दो सवार थे या फिर एक। पुलिस को शक है घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश कहीं आसपास के गांव या जंगल में छुप गए हैं। पुलिस कई बिंदुओं पर घटना की जांच में जुटी है।
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एक वर्ष पहले ही खुली थी पीनना में शाखा
पीनना की जिस बैंक शाखा से बाइक सवार बदमाशों ने कैश लूटा है। यह शाखा एक वर्ष पूर्व ही गांव में खोली गई थी। अभी शाखा में खाते खोलने का ही काम चल रहा था। गांव में वर्षों से और भी तीन बैंक हैं, जिसके चलते इस शाखा में लोगों की आवाजाही कम है। 15 से 20 मिनट बाद ही शाखा में ग्राहक आता है। ग्रामीण कालूराम, राजबीर, धर्मबीर, पंकज, कन्हैया लाल आदि ने बताया कि इस शाखा पर किसान की गन्ने आदि का पेमेंट नहीं आता है, जिस कारण यहां कम ही भीड़ होती है।
बैंक में न गार्ड था और ही पुलिस की कोई गश्त
शहर से सटे पीनना गांव में सर्वयूपी ग्रामीण बैंक भगवान भरोसे चल रहा था। यहां न कोई गार्ड था न कोई पुलिस की गश्त। इतना ही नहीं बैंक के बाहर सीसीटीवी कैमरा तक नहीं है। अंदर लगे कैमरों की रिकार्डिंग भी ठीक से नहीं हो रही थी। इन्हीं कमजोरियों की वजह से यह बैंक बदमाशों का टारगेट बन गया। लुटेरों के चेहरे ढके हुए थे, लेकिन पुलिस को यकीन है कि बदमाश स्थानीय ही हैं।
पीनना गांव की सर्वयूपी ग्रामीण बैंक की शाखा में सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त नहीं थे। वारदात के बाद जब व्यवस्थाओं को खंगाला गया, तो पता चला कि सबकुछ भगवान भरोसे ही था। गांव में दूसरे बैंकों की दो शाखाएं और हैं, मगर वह मुख्य मार्ग पर हैं, जहां काफी चहल-पहल रहती है। सर्वयूपी ग्रामीण बैंक की यह शाखा एक साल पहले ही साहब सिंह के मकान में खुली थी।
बैंक में अभी किसानों का गन्ना भुगतान नहीं होता था। इसी वजह से लोगों की आवाजाही भी कम थी। जिस बिल्डिंग में बैंक है, उसके आसपास का इलाका काफी सुनसान है। बैंक में किसी गार्ड की तैनाती नहीं है और न ही पुलिस की कोई गश्त होती है। बैंक के बाहर भी सीसीटीवी कैमरा नहीं है, इन्हीं कमियों की वजह से ही यह बैंक बदमाशों के निशाने पर आ गया। वारदात हो गई, अब बैंक अफसरों की आंखें खुल गईं और पुलिस अफसरों की भी।
सवाल यह उठता है कि बैंक के सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया, बैंक में गार्ड की तैनाती क्यों नहीं की गई। कागजों में बैंकों के लिए पुलिस गश्ती रवाना होती है, लेकिन घटना के वक्त पुलिस कहां थी। घटना के दौरान अथवा बाद में बैंक का सायरन क्यों नहीं बजाया गया। बैंक के बाहर सीसीटीवी कैमरा क्यों नहीं लगा था, ऐसे तमाम अनगिनत सवाल हैं, जो बैंक और पुलिस अफसरों को देने हैं।
शाखा के कर्मचारियों को सीसीटीवी कैमरों की तकनीकी जानकारी तक नहीं थी। उन्हें यह भी मालूम नहीं की कि कैमरे चल रहे हैं या नहीं। बैंक में लगा बोर्ड भी खाली पड़ा है, उस पर इमरजेंसी में पुलिस अधिकारियों के नंबर लिखे होने चाहिए थे। बदमाशों की बोलचाल से लग रहा है कि वह स्थानीय किसी गैंग से जुड़े हुए हैं। चेहरे ढके होने की वजह से बदमाशों की पहचान भी मुश्किल है।
बैंक स्टाफ का कहना है कि बदमाश मजबूत कदकाठी के थे। बदमाश कैश किस प्रकार के बैग में ले गए, यह भी बैंक कर्मचारियों को पता नहीं चल पाया। पुलिस भी वारदात में स्थानीय बदमाशों का हाथ मान रही है। पीनना गांव के व्यक्ति पर भी शक है। पुलिस का मानना है कि किसी स्थानीय व्यक्ति ने भी मुखबिरी कर बदमाशों की मदद की है। पीनना, बरवाला, किनौनी के कुछ संदिग्ध युवकों के बारे में भी छानबीन की जा रही है।
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पीनना स्थित बैंक शाखा में घुसे बदमाश पांच मिनट के भीतर ही साढ़े सात लाख की नगदी समेटकर फरार हो गए। बदमाशों को पता था कि सीसीटीवी फुटेज से पहचान हो सकती है, इसलिए बाइक चलाने वाले ने हेलमेट और बाकी दो साथियों ने अपने चेहरे कपड़े से ढक रखे थे। धड़धड़ाते हुए शाखा में घुसे और वहां मौजूद स्टाफ के तीनों लोगों को पिस्टल के बल पर बंधक बना लिया।
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मैनेजर से सायरन वाले बॉक्स की चाबी कब्जे में ली। तीनों को रूम में बंद कर कैश लूटकर फरार हो गए। जांच में जुटी पुलिस ने शामली हाईवे पर घंटों बाइकों को चेक किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई। रोड पर स्थित फैक्ट्री के बाहर लगे कैमरे की सीसीटीवी फुटेज खंगाली, लेकिन ऐसी कोई बाइक फुटेज में दिखाई नहीं दी, जिस पर तीन युवक सवार हो। इस दौरान जो बाइकें गुजरीं, उन पर दो सवार थे या फिर एक। पुलिस को शक है घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश कहीं आसपास के गांव या जंगल में छुप गए हैं। पुलिस कई बिंदुओं पर घटना की जांच में जुटी है।
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एक वर्ष पहले ही खुली थी पीनना में शाखा
पीनना की जिस बैंक शाखा से बाइक सवार बदमाशों ने कैश लूटा है। यह शाखा एक वर्ष पूर्व ही गांव में खोली गई थी। अभी शाखा में खाते खोलने का ही काम चल रहा था। गांव में वर्षों से और भी तीन बैंक हैं, जिसके चलते इस शाखा में लोगों की आवाजाही कम है। 15 से 20 मिनट बाद ही शाखा में ग्राहक आता है। ग्रामीण कालूराम, राजबीर, धर्मबीर, पंकज, कन्हैया लाल आदि ने बताया कि इस शाखा पर किसान की गन्ने आदि का पेमेंट नहीं आता है, जिस कारण यहां कम ही भीड़ होती है।
बैंक में न गार्ड था और ही पुलिस की कोई गश्त
शहर से सटे पीनना गांव में सर्वयूपी ग्रामीण बैंक भगवान भरोसे चल रहा था। यहां न कोई गार्ड था न कोई पुलिस की गश्त। इतना ही नहीं बैंक के बाहर सीसीटीवी कैमरा तक नहीं है। अंदर लगे कैमरों की रिकार्डिंग भी ठीक से नहीं हो रही थी। इन्हीं कमजोरियों की वजह से यह बैंक बदमाशों का टारगेट बन गया। लुटेरों के चेहरे ढके हुए थे, लेकिन पुलिस को यकीन है कि बदमाश स्थानीय ही हैं।
पीनना गांव की सर्वयूपी ग्रामीण बैंक की शाखा में सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त नहीं थे। वारदात के बाद जब व्यवस्थाओं को खंगाला गया, तो पता चला कि सबकुछ भगवान भरोसे ही था। गांव में दूसरे बैंकों की दो शाखाएं और हैं, मगर वह मुख्य मार्ग पर हैं, जहां काफी चहल-पहल रहती है। सर्वयूपी ग्रामीण बैंक की यह शाखा एक साल पहले ही साहब सिंह के मकान में खुली थी।
बैंक में अभी किसानों का गन्ना भुगतान नहीं होता था। इसी वजह से लोगों की आवाजाही भी कम थी। जिस बिल्डिंग में बैंक है, उसके आसपास का इलाका काफी सुनसान है। बैंक में किसी गार्ड की तैनाती नहीं है और न ही पुलिस की कोई गश्त होती है। बैंक के बाहर भी सीसीटीवी कैमरा नहीं है, इन्हीं कमियों की वजह से ही यह बैंक बदमाशों के निशाने पर आ गया। वारदात हो गई, अब बैंक अफसरों की आंखें खुल गईं और पुलिस अफसरों की भी।
सवाल यह उठता है कि बैंक के सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया, बैंक में गार्ड की तैनाती क्यों नहीं की गई। कागजों में बैंकों के लिए पुलिस गश्ती रवाना होती है, लेकिन घटना के वक्त पुलिस कहां थी। घटना के दौरान अथवा बाद में बैंक का सायरन क्यों नहीं बजाया गया। बैंक के बाहर सीसीटीवी कैमरा क्यों नहीं लगा था, ऐसे तमाम अनगिनत सवाल हैं, जो बैंक और पुलिस अफसरों को देने हैं।
शाखा के कर्मचारियों को सीसीटीवी कैमरों की तकनीकी जानकारी तक नहीं थी। उन्हें यह भी मालूम नहीं की कि कैमरे चल रहे हैं या नहीं। बैंक में लगा बोर्ड भी खाली पड़ा है, उस पर इमरजेंसी में पुलिस अधिकारियों के नंबर लिखे होने चाहिए थे। बदमाशों की बोलचाल से लग रहा है कि वह स्थानीय किसी गैंग से जुड़े हुए हैं। चेहरे ढके होने की वजह से बदमाशों की पहचान भी मुश्किल है।
बैंक स्टाफ का कहना है कि बदमाश मजबूत कदकाठी के थे। बदमाश कैश किस प्रकार के बैग में ले गए, यह भी बैंक कर्मचारियों को पता नहीं चल पाया। पुलिस भी वारदात में स्थानीय बदमाशों का हाथ मान रही है। पीनना गांव के व्यक्ति पर भी शक है। पुलिस का मानना है कि किसी स्थानीय व्यक्ति ने भी मुखबिरी कर बदमाशों की मदद की है। पीनना, बरवाला, किनौनी के कुछ संदिग्ध युवकों के बारे में भी छानबीन की जा रही है।