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जेल में संघर्ष के बाद सतेंद्र बलिया शिफ्ट
ब्यूरो / अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 04 Jan 2016 12:06 AM IST
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मुजफ्फरनगर। जेल में बंदियों के संघर्ष के मामले में गंभीरता बरतते हुए शासन ने कुख्यात सतेंद्र बरवाला को बलिया जेल शिफ्ट कर दिया है।
बरवाला के अलावा दो और अन्य बंदियों को भी प्रदेश की दूसरी जेलों में भेजा गया है। पूरी कार्रवाई आनन फानन में करते हुए जेल प्रशासन ने रविवार दोपहर को ही तीनों बंदियों को रवाना कर दिया।
जिला कारागार में आए दिन खूनी संघर्ष से कारागार प्रशासन के हाथ पांव फूल गए हैं। शनिवार की रात सतेंद्र बरवाला और विक्की त्यागी समर्थकों में मामूली कहासुनी पर संघर्ष हो गया था।
करीब आधा दर्जन बंदी घायल हो गए थे। जेल प्रबंधन को लाठियां भांजकर बंदियों को बैरकों में बंद करना पड़ा था। नसीरपुर का एक घायल बंदी प्रदीप जिला चिकित्सालय में उपचाराधीन है। संघर्ष के खतरे और जेल के गुटों में फैले तनाव की रिपोर्ट पर शासन नेे गंभीरता दिखाई।
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आनन-फानन में जेलर से मिली रिपोर्ट के बाद डीएम और एसएसपी ने शासन को जेल की स्थिति से अवगत कराया। शासन के आदेश सुबह ही जेल पहुंच गए। शाहपुर थाने के बरवाला गांव निवासी कुख्यात सतेंद्र बरवाला को पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया जिला कारागार में भेज दिया गया है।
जेल प्रशासन ने तत्काल प्रक्रिया पूरी कर दोपहर एक बजे पुलिस सुरक्षा में तीन बंदियों को ट्रांसफर कर दिया। बरवाला के अलावा जिन दो बंदियों को सूबे की दूसरी जेलों में भेजा गया है, उनमें बागपत का जाकिर और देवेंद्र है।
जाकिर को पूर्वांचल के मऊ और देवेंद्र को आजमगढ शिफ्ट किया गया है। जेलर अवेंद्रनाभ त्रिपाठी ने बताया कि शासन के आदेश मिलते ही सतेंद्र बरवाला समेत तीन बंदियों को जिला कारागार से दूसरी जेलों में भेज दिया गया है। फिलहाल जेल के हालात ठीक हैं।
संघर्ष और मारपीट के मामलों में सक्रिय दूसरे बंदियों की भी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जल्द ही गुटबाजी और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाले कई बंदियों को प्रदेश की अन्य जेलों में भेजा जाएगा।
जेल से बज रही हैं फोन की घंटियां
मुजफ्फरनगर। बजट के सवा तीन करोड़ रुपये आवंटित होने के बाद भी जैमर का कार्य शुरू नहीं हो पाने से जेल से फोन की घंटियां लगातार बज रही हैं। नामचीन बदमाशों में गुटबाजी की एक वजह मोबाइल, सिम की उपलब्धता भी है।
डीएम और एसएसपी के अलावा डीआईजी जेल आए दिन जिला कारागार का औचक निरीक्षण करते हैं, लेकिन जेल में कुछ नहीं मिलता। सूत्रों के मुताबिक अभी भी जेल में पचास से ज्यादा मोबाइल फोन सक्रिय हैं। सिम की तादाद सैकड़ों में है। जिन्हें बदल-बदल कर अपराधियों ने अपना नेटवर्क चला रखा है।
जेल से व्यापारी से वसूली गई रकम
मुजफ्फरनगर। जरायम के कुख्यात जेल में भी बेखौफ है। कारागार से मांगी गई रंगदारी पर शामली के खाद व्यापारी ने सवा तीन लाख रुपये पहुंचा दिए। कानून का डर खत्म हो चुका है, तभी तो गत सप्ताह रंगदारी लेकर आए व्यक्ति को बदमाशों ने मिलाई के दौरान जेल में ही तमाचे जड़ दिए थे।
पूरे मामले पर जेल प्रशासन चुप है। जेल से शिफ्ट किए गए तीन बंदियों में से ही किसी ने व्यापारी से यह वसूली की थी। यह कोई नया मामला नहीं है, शहर में नई मंडी के एक ट्रांसपोर्टर से भी जेल से ही रंगदारी मांगी गई थी। डर के मारे दी गई तहरीर को भी ट्रांसपोर्टर ने वापस ले लिया था।
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बरवाला के अलावा दो और अन्य बंदियों को भी प्रदेश की दूसरी जेलों में भेजा गया है। पूरी कार्रवाई आनन फानन में करते हुए जेल प्रशासन ने रविवार दोपहर को ही तीनों बंदियों को रवाना कर दिया।
जिला कारागार में आए दिन खूनी संघर्ष से कारागार प्रशासन के हाथ पांव फूल गए हैं। शनिवार की रात सतेंद्र बरवाला और विक्की त्यागी समर्थकों में मामूली कहासुनी पर संघर्ष हो गया था।
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करीब आधा दर्जन बंदी घायल हो गए थे। जेल प्रबंधन को लाठियां भांजकर बंदियों को बैरकों में बंद करना पड़ा था। नसीरपुर का एक घायल बंदी प्रदीप जिला चिकित्सालय में उपचाराधीन है। संघर्ष के खतरे और जेल के गुटों में फैले तनाव की रिपोर्ट पर शासन नेे गंभीरता दिखाई।
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आनन-फानन में जेलर से मिली रिपोर्ट के बाद डीएम और एसएसपी ने शासन को जेल की स्थिति से अवगत कराया। शासन के आदेश सुबह ही जेल पहुंच गए। शाहपुर थाने के बरवाला गांव निवासी कुख्यात सतेंद्र बरवाला को पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया जिला कारागार में भेज दिया गया है।
जेल प्रशासन ने तत्काल प्रक्रिया पूरी कर दोपहर एक बजे पुलिस सुरक्षा में तीन बंदियों को ट्रांसफर कर दिया। बरवाला के अलावा जिन दो बंदियों को सूबे की दूसरी जेलों में भेजा गया है, उनमें बागपत का जाकिर और देवेंद्र है।
जाकिर को पूर्वांचल के मऊ और देवेंद्र को आजमगढ शिफ्ट किया गया है। जेलर अवेंद्रनाभ त्रिपाठी ने बताया कि शासन के आदेश मिलते ही सतेंद्र बरवाला समेत तीन बंदियों को जिला कारागार से दूसरी जेलों में भेज दिया गया है। फिलहाल जेल के हालात ठीक हैं।
संघर्ष और मारपीट के मामलों में सक्रिय दूसरे बंदियों की भी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जल्द ही गुटबाजी और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाले कई बंदियों को प्रदेश की अन्य जेलों में भेजा जाएगा।
जेल से बज रही हैं फोन की घंटियां
मुजफ्फरनगर। बजट के सवा तीन करोड़ रुपये आवंटित होने के बाद भी जैमर का कार्य शुरू नहीं हो पाने से जेल से फोन की घंटियां लगातार बज रही हैं। नामचीन बदमाशों में गुटबाजी की एक वजह मोबाइल, सिम की उपलब्धता भी है।
डीएम और एसएसपी के अलावा डीआईजी जेल आए दिन जिला कारागार का औचक निरीक्षण करते हैं, लेकिन जेल में कुछ नहीं मिलता। सूत्रों के मुताबिक अभी भी जेल में पचास से ज्यादा मोबाइल फोन सक्रिय हैं। सिम की तादाद सैकड़ों में है। जिन्हें बदल-बदल कर अपराधियों ने अपना नेटवर्क चला रखा है।
जेल से व्यापारी से वसूली गई रकम
मुजफ्फरनगर। जरायम के कुख्यात जेल में भी बेखौफ है। कारागार से मांगी गई रंगदारी पर शामली के खाद व्यापारी ने सवा तीन लाख रुपये पहुंचा दिए। कानून का डर खत्म हो चुका है, तभी तो गत सप्ताह रंगदारी लेकर आए व्यक्ति को बदमाशों ने मिलाई के दौरान जेल में ही तमाचे जड़ दिए थे।
पूरे मामले पर जेल प्रशासन चुप है। जेल से शिफ्ट किए गए तीन बंदियों में से ही किसी ने व्यापारी से यह वसूली की थी। यह कोई नया मामला नहीं है, शहर में नई मंडी के एक ट्रांसपोर्टर से भी जेल से ही रंगदारी मांगी गई थी। डर के मारे दी गई तहरीर को भी ट्रांसपोर्टर ने वापस ले लिया था।