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क्राइम कैपिटल में बढ़ा सजा का ग्राफ, गवाही और मजबूत पैरवी से आठ माह में हुईं 263 को सजा
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 30 Oct 2018 11:46 PM IST
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क्राइम कैपिटल के रूप में बदनाम हुए मुजफ्फरनगर में अपराधियों पर शिकंजा तेज हुआ है। गवाही और मजबूत पैरवी से गत वर्ष के मुकाबले सजा के प्रतिशत में वृद्धि हुई है। गत वर्ष 132 लोगों को सजा हुईं , इस साल 263 लोगों को सजा सुनाई गई हैं। भोपा थाना क्षेत्र के नंगला बुजुर्ग में तीन शाल की लायमा की हत्या के मामले में तो चार माह में ही सजा सुना दी गई। लायमा की हत्या उसके पिता शमीम ने अपने दोस्त जहीर अब्बास के साथ मिलकर की थी और हत्या में अपने भाई को फंसाने का प्रयास किया था।
इस मामले में एडीजे कोर्ट संख्या दो ने हत्यारोपियों को आजीवन कारावास और 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। हत्या के जिन मामलों में सजा सुनाई गई इनमें अधिकांश मामले 2014 से 2017 के बीच के हैं। फरवरी से सितंबर तक बीते आठ माह में 263 लोगों पर दोष सिद्ध हुआ है, जिन्हें अलग-अलग सजा मिली है।इनमें 39 लोग 302 में, 29 लोग 376 और 304 में 195 लोग अन्य धाराओं में दोषी पाए गए। 25 मुकदमों में 62 लोग तो ऐसे है जिन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
गत वर्ष 17 मुकदमों में 37 लोगों को सजा सुनाई गई थीं। पोक्सों एक्ट में बीते वर्ष इस मध्य केवल दो लोगों को सजा मिली इस बार सात लोगों को सजा सुनाई गई। प्रशासन ने गवाहों की सुरक्षा देने और उनकी गवाही कराने पर जोर दिया तो पैरवी भी मजबूत की। एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में वह स्वयं शासकीय अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर लगातार मॉनिटरिंग करते हैं। प्रयास यही रहता है कि सरकारी वकील अपनी जिम्मेदारी सही से निभाएं। समय से गवाही हो, जिससे दोषियों को सजा मिले।
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सजा 2017 2018
आजीवन कारावास 37 को 62 को
पोक्सो में सजा 02 को 07 को
हत्या में 19 को 39 को
बलात्कार में 12 को 29 को
कुल सजा 132 को 263 को
गवाहों की सुरक्षा और गवाही जरूरी
मुजफ्फरनगर। डीएम राजीव शर्मा का कहना है कि हत्या, बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में समय से गवाही बहुत जरूरी है। शासकीय अधिवक्ताओं की बैठक लेकर उन पर लगातार यह दबाव बनाया गया कि वह समय से गवाही कराएं। किसी भी मामले में लापरवाही न करें, जिससे दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जा सके। सरकारी वकीलों की मेहनत से ही जिले में इतने लोगों को सजा दिलाई जा सकी। इस कार्य में ओर तेजी लाई जाएगी, जिससे अपराधों पर अंकुश लाया जा सके। कानून व्यवस्था पहली प्राथमिकता है।
सजा में 199.24 प्रतिशत की वृद्धि
मुजफ्फरनगर। बीते आठ माह में अपराधियों को जो सजा मिली है, बीते वर्ष के मुकाबले इन माह में 199.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि समस्त वादों में कुल सजा की है। आजीवन कारावास भी लगभग दोगुना लोगों को हुआ है। पोक्सो एक्ट में 77.78 प्रतिशत अधिक लोगों को सजा हुई है।
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इस मामले में एडीजे कोर्ट संख्या दो ने हत्यारोपियों को आजीवन कारावास और 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। हत्या के जिन मामलों में सजा सुनाई गई इनमें अधिकांश मामले 2014 से 2017 के बीच के हैं। फरवरी से सितंबर तक बीते आठ माह में 263 लोगों पर दोष सिद्ध हुआ है, जिन्हें अलग-अलग सजा मिली है।इनमें 39 लोग 302 में, 29 लोग 376 और 304 में 195 लोग अन्य धाराओं में दोषी पाए गए। 25 मुकदमों में 62 लोग तो ऐसे है जिन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
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गत वर्ष 17 मुकदमों में 37 लोगों को सजा सुनाई गई थीं। पोक्सों एक्ट में बीते वर्ष इस मध्य केवल दो लोगों को सजा मिली इस बार सात लोगों को सजा सुनाई गई। प्रशासन ने गवाहों की सुरक्षा देने और उनकी गवाही कराने पर जोर दिया तो पैरवी भी मजबूत की। एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में वह स्वयं शासकीय अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर लगातार मॉनिटरिंग करते हैं। प्रयास यही रहता है कि सरकारी वकील अपनी जिम्मेदारी सही से निभाएं। समय से गवाही हो, जिससे दोषियों को सजा मिले।
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सजा 2017 2018
आजीवन कारावास 37 को 62 को
पोक्सो में सजा 02 को 07 को
हत्या में 19 को 39 को
बलात्कार में 12 को 29 को
कुल सजा 132 को 263 को
गवाहों की सुरक्षा और गवाही जरूरी
मुजफ्फरनगर। डीएम राजीव शर्मा का कहना है कि हत्या, बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में समय से गवाही बहुत जरूरी है। शासकीय अधिवक्ताओं की बैठक लेकर उन पर लगातार यह दबाव बनाया गया कि वह समय से गवाही कराएं। किसी भी मामले में लापरवाही न करें, जिससे दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जा सके। सरकारी वकीलों की मेहनत से ही जिले में इतने लोगों को सजा दिलाई जा सकी। इस कार्य में ओर तेजी लाई जाएगी, जिससे अपराधों पर अंकुश लाया जा सके। कानून व्यवस्था पहली प्राथमिकता है।
सजा में 199.24 प्रतिशत की वृद्धि
मुजफ्फरनगर। बीते आठ माह में अपराधियों को जो सजा मिली है, बीते वर्ष के मुकाबले इन माह में 199.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि समस्त वादों में कुल सजा की है। आजीवन कारावास भी लगभग दोगुना लोगों को हुआ है। पोक्सो एक्ट में 77.78 प्रतिशत अधिक लोगों को सजा हुई है।