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आतंकी से मिला बांग्लादेशी भाइयों का सुराग, तीनों आरोपियों को जल्द लाया जा सकता है देवबंद   

Fri, 15 Sep 2017 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Fri, 15 Sep 2017 01:21 AM IST
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Bangladeshi clues found in terrorists
Crime
सवा महीने पहले चरथावल के गांव कुटेसरा से पकड़े गए आतंकी अब्दुल्लाह अल मामून से मिले सुराग के बाद ही तीन और बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी हुई है। लखनऊ में एटीएस के हत्थे चढ़े तीनों भाइयों के पास से फर्जी आईडी, फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए हैं। सबूतों की तलाश में एटीएस तीनों को देवबंद लेकर आने की तैयारी में जुटी है। पकड़े गए युवकों के आतंकी कनेक्शन भी खंगाले जा रहे हैं। युवकों से पूछताछ के बाद आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।  
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छह अगस्त को एटीएस ने अंसारुल्ला बांग्लादेशी टीम के आतंकी अब्दुल्लाह अल मामून पुत्र रहीसुद्दीन को चरथावल थाने के कुटेसरा गांव की मसजिद से गिरफ्तार किया था। अब्दुल्लाह से पूछताछ में उसके अन्य साथियों के नाम भी प्रकाश में आए थे। एटीएस अब्दुल्लाह से मिले इनपुट पर लगातार काम कर रही थी। 12 सितंबर को देवबंद स्थित कई मदरसों में पूछताछ की गई।
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कुछ समय बाद ही एटीएस को सूचना मिली कि एक मदरसे से तीन युवक (एक अध्यापक और उसके दो भाई) भाग गए हैं। इनकी घेराबंदी की गई और इन्हें लखनऊ रेलवे स्टेशन पर हावड़ा अमृतसर एक्सप्रेस से हिरासत में लिया गया। इन्होंने स्वयं को बांग्लादेशी (भारत में अवैध निवासी) होने की बात स्वीकारी। इनके पास से नकली आईडी और गलत नाम पते से बनवाया गया आधार कार्ड बरामद हुए हैं। पकड़े गए तीनों युवक बांग्लादेशी मोहम्मद इमरान, रजीदुद्दीन, फिरदौस पुत्रगण अब्दुल खालिक निवासी छितिगड़ा, पंतवाड़ा पोस्ट सूतीघटा थाना कोतवाली  जिला जसौर बांग्लादेश हैं।
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एटीएस रिमांड पर इन्हें देवबंद और कुटेसरा लाने की तैयारी कर रही है। यहां तीनों बांग्लादेशी किसके संपर्क में थे और इन्हें यहां ठिकाना उपलब्ध कराने में किस-किसने मदद की, इस सब तथ्यों को खंगाला जा रहा है। प्रथमदृष्टया पूछताछ में यह सामने आया है कि तीनों युवकों को देवबंद के मदरसे में ठिकाना दिलाने में आतंकी अब्दुल्लाह का हाथ है। उसी ने इनके फर्जी कागजात तैयार कराने में मदद की थी। 

कुटेसरा से पकड़ा गया  था आतंकी अब्दुल्लाह 
मुजफ्फरनगर। एटीएस ने छह अगस्त को बेहद गोपनीय अंदाज में कुटेसरा में दबिश देकर हुसैनिया मस्जिद में मौलवी का काम करने वाले आतंकी अब्दुल्लाह को पकड़ा था। उसके बांग्लादेशी आतंकी कनेक्शन के बाद ग्रामीण हैरत में आ गए थे। मस्जिद में इमामत कराने वाले अब्दुल्लाह के कमरे से तलाशी में फर्जी कागजात बरामद हुए थे। ग्रामीणों का कहना था कि अब्दुल्लाह इस मस्जिद में असम का बताकर रहता था,

जबकि एटीएस के खुलासे के बाद उसका बांग्लादेश के होने के साथ आतंकी संगठन से जुड़ा होने की बात सामने आई थी। उसे पकड़े जाने के एक माह पहले आठ जुलाई को निकटवर्ती गांव अंबेहटा शेख की मस्जिद से गांव की मस्जिद में इमामत के लिए रखा था। आतंकी अब्दुल्लाह अल मॉमून पुत्र रहीसुद्दीन अहमद, निवासी गांव एवं थाना हुसनपुर जिला मोमीन शाही बांग्लादेश का है। 

रोजाना देवबंद जाने  का राज सामने आया 
चरथावल। लखनऊ में एटीएस द्वारा पकड़े गए तीनों बांग्लादेशी देवबंद के एक मदरसे में रहते थे। कुटेसरा मस्जिद में करीब एक महीने रहकर अब्दुल्लाह ने यहां किसी को हमराज नहीं बनाया। सुबह नमाज के बाद रोजाना देवबंद जाना उसकी दिनचर्या थी, लेकिन वह क्यों जाता था,  

यह किसी का मालूम नहीं था, जबकि देवबंद में रहने वाले आतंकी फैजान से उसका गहरा नाता था, जो अभी तक एटीएस की पकड़ से बाहर है। बुधवार को लखनऊ में तीन बांग्लादेशी भाइयों की गिरफ्तारी के बाद तस्वीर साफ हो गई कि अब्दुल्लाह देवबंद में बांग्लादेशी युवकों से मिलने जाता था और उन्हें फर्जी आईडी, आधार कार्ड आदि मुहैया कराता था। 

अब्दुल्लाह से बरामद  हुई थी फर्जी मुहरें 
चरथावल। कुटेसरा मस्जिद से पकड़े गए अब्दुल्लाह के कब्जे से ग्राम पंचायत अधिकारी, तहसीलदार आदि की फर्जी मुहरें बरामद हुई थीं, जिससे वह बांग्लादेशी युवकों को यहां का बाशिंदा बनाकर अपना नेटवर्क तैयार कर रहा था। वह देवबंद में रहने वाले फैजान के साथ मिलकर फर्जी आईडी तैयार कर आतंकियों खासकर बांग्लादेशियों को भारत में सुरक्षित ठिकाना दिलाने में सहयोग करता था।


देवबंद मदरसे में रहने वाले तीनों भाइयों के पास से फर्जी आईडी बरामद होने के बाद यह साफ हो गया है कि यह कारनामा अब्दुल्लाह का ही है। वह कुटेसरा के मदरसे में 265 दिन और मुजफ्फरनगर महमूदिया मदरसे में सालभर रहकर पढ़ाई करता रहा। सादा मोबाइल फोन रखना और कुटेसरा के लोगों से दूरी बनाकर रखना उसकी आदत में शुमार था। 
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