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जिले में 18 मदरसों की मान्यता खत्म
ब्यूरो, अमर उजाला/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 28 Nov 2017 11:05 PM IST
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मुजफ्फरनगर। सूबे में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही खलबली मची हुई है। मुख्य रूप से सरकारी नियमों कायदों के नहीं मानने पर शिक्षण संस्थाओं पर नकेल कसी जा रही है। सरकार के रडार पर शिक्षा माफिया भी हैं। इसी कड़ी में जिले के 18 मदरसों को सरकार की सुविधाएं मंजूर नहीं है। इन मदरसों के संचालकों ने मदरसा पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है और न ही सूचनाएं दी है। इसके चलते इन मदरसों की मान्यता समाप्त हो गई है। जिले में कुल 134 मदरसों की मान्यता है। केवल 116 मदरसों के संचालकों ने ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है।
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प्रदेश सरकार ने अलग से मदरसा पोर्टल बनाया है। सरकार ने सभी जनपदों के मदरसा संचालकों से पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराते हुए सूचनाएं उपलब्ध कराने के आदेश जारी किए थे। मदरसा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए 30 अक्तूबर अंतिम तिथि तय की गई थी। जनपद में 134 मदरसों को मान्यता है। मदरसा पोर्टल पर केवल 116 मदरसों के संचालकों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है और अपने मदरसे से संबंधित सूचनाएं दी है। प्रदेश सरकार मदरसा आधुनिकीकरण योजना में मदरसों में शिक्षकों को एक निश्चित वेतन देती है। इसके अलावा मान्यता प्राप्त मदरसों के बच्चों को छात्रवृत्ति भी देती है। ये सुविधाएं केवल उन्हीं मदरसों को मिलेगी, जिन्होंने अपनी समस्त सूचनाएं पोर्टल पर उपलब्ध करा दी हैं। जिले में 18 मदरसे ऐसे पाए गए, जिन्होंने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। इन्होंने अपने आपको सरकारी सिस्टम से अलग कर लिया है।
इन मदरसों की मान्यता स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी भरत लाल गोंड ने बताया कि जिले के 18 मदरसे विड्रा कर गए हैं, जिन मदरसों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं उनकी भी जांच होगी कि वह मानक पूरे कर रहे हैं या नहीं। जिन मदरसों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, ये सरकारी सुविधा नहीं लेना चाहते हैं। इनकी मान्यता अपने आप ही समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि मदरसों की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थाओं को नियम के विरुद्ध काम नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन से मिले आदेश के आधार पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए मदरसा संचालकों को नियमों का हर हाल में पालन करना ही होगा। नियमों का बिना पालन किए कोई सरकारी सहायता नहीं ले सकता है। शासन की मंशा है कि मदरसों में बच्चों को अच्छी तालीम दी जाए, जिससे वह देश की प्रगति में अपना योगदान निभा सकें।
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