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पिंकी के आयशा बनने से सुलग रही थी नफरत
Updated Tue, 18 Jul 2017 12:39 AM IST
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नहीं सोचा था ऐसे होगा प्रेम कहानी का अंत
मोरना (मुजफ्फरनगर)। किसी ने नहीं सोचा था कि घर से भागकर दूसरे समुदाय के युवक नसीम से ब्याह रचाने वाली पिंकी की प्रेम कहानी का अंत इतना दुखद होगा। खून-खराबा भी उस दिन हुआ, जब घर में एक साल के बेटे की जन्मदिन की पार्टी थी। नसीम को जिस समय गोली मारी गई, तब वह बेटे के जन्मदिन के लिए केक लेकर लौट रहा था. जिस केक को उसने बेटे के लिए खरीदा, वह घटनास्थल पर बिखरा पड़ा था।
भोकरहेड़ी का नसीम नौ बहन-भाइयों में सबसे बड़ा था। वह फेरी लगाकर कपड़े का व्यापार करता था। कपड़ा बेचने के दौरान ही नसीम का कबीरपंथी परिवार की पिंकी से प्रेम प्रसंग हो गया। दो साल पहले दोनों घर से फरार हो गए। नसीम ने पिंकी का धर्म परिवर्तन कराकर उसका नाम आयशा रखा और निकाह कर लिया। एक साल पहले ही नसीम और आयशा गांव आए थे। यहीं से नफरत की नींव पड़ गई। गांव में ही दूसरे समुदाय की बहू बनी पिंकी को देख घरवालों का खून खौल रहा था। सोमवार को घर में खुशी का माहौल था। एक साल के बेटे का जन्मदिन था। नसीम बेटे के जन्मदिन के लिए केक लेकर जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के पीछे पूरी रणनीति बनाई गई। पुलिस को पता चला है कि लड़की पक्ष ने कुछ दिन पहले ही अपनी जमीन बेची है। चाचा नजर मोहम्मद की ओर से युवती पक्ष के प्रदीप पुत्र राजेश, राजेश पुत्र रामसिंह, सोनू पुत्र राकेश व नीटू पुत्र भूषण को नामजद किया गया है। मामला दो संप्रदायों से जुड़ा होने के कारण गांव में माहौल तनावपूर्ण है। हालात काबू में रखने के लिए आला अफसरों ने गांव में ही डेरा डाला हुआ है। माहौल को देखते हुए गांव में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
ईद पर विशाखापट्टम से आया था नसीम
मुजफ्फरनगर। मृतक नसीम के पिता तस्लीम गांव में ही बटाई पर खेती करते हैं। परिवार की स्थिति संभालने के लिए नसीम विशाखापट्टम कपड़े का कारोबार करने गया था। ईद पर नसीम वहां से लौटा था, जो बेेटे का जन्मदिन मनाकर फिर से वहीं जाने की तैयारी में था, लेकिन उसको खबर नहीं थी यहां मौत उसके लिए तैयार बैठी है।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। किसी ने नहीं सोचा था कि घर से भागकर दूसरे समुदाय के युवक नसीम से ब्याह रचाने वाली पिंकी की प्रेम कहानी का अंत इतना दुखद होगा। खून-खराबा भी उस दिन हुआ, जब घर में एक साल के बेटे की जन्मदिन की पार्टी थी। नसीम को जिस समय गोली मारी गई, तब वह बेटे के जन्मदिन के लिए केक लेकर लौट रहा था. जिस केक को उसने बेटे के लिए खरीदा, वह घटनास्थल पर बिखरा पड़ा था।
भोकरहेड़ी का नसीम नौ बहन-भाइयों में सबसे बड़ा था। वह फेरी लगाकर कपड़े का व्यापार करता था। कपड़ा बेचने के दौरान ही नसीम का कबीरपंथी परिवार की पिंकी से प्रेम प्रसंग हो गया। दो साल पहले दोनों घर से फरार हो गए। नसीम ने पिंकी का धर्म परिवर्तन कराकर उसका नाम आयशा रखा और निकाह कर लिया। एक साल पहले ही नसीम और आयशा गांव आए थे। यहीं से नफरत की नींव पड़ गई। गांव में ही दूसरे समुदाय की बहू बनी पिंकी को देख घरवालों का खून खौल रहा था। सोमवार को घर में खुशी का माहौल था। एक साल के बेटे का जन्मदिन था। नसीम बेटे के जन्मदिन के लिए केक लेकर जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के पीछे पूरी रणनीति बनाई गई। पुलिस को पता चला है कि लड़की पक्ष ने कुछ दिन पहले ही अपनी जमीन बेची है। चाचा नजर मोहम्मद की ओर से युवती पक्ष के प्रदीप पुत्र राजेश, राजेश पुत्र रामसिंह, सोनू पुत्र राकेश व नीटू पुत्र भूषण को नामजद किया गया है। मामला दो संप्रदायों से जुड़ा होने के कारण गांव में माहौल तनावपूर्ण है। हालात काबू में रखने के लिए आला अफसरों ने गांव में ही डेरा डाला हुआ है। माहौल को देखते हुए गांव में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
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ईद पर विशाखापट्टम से आया था नसीम
मुजफ्फरनगर। मृतक नसीम के पिता तस्लीम गांव में ही बटाई पर खेती करते हैं। परिवार की स्थिति संभालने के लिए नसीम विशाखापट्टम कपड़े का कारोबार करने गया था। ईद पर नसीम वहां से लौटा था, जो बेेटे का जन्मदिन मनाकर फिर से वहीं जाने की तैयारी में था, लेकिन उसको खबर नहीं थी यहां मौत उसके लिए तैयार बैठी है।
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