{"_id":"59496cb84f1c1ba25e8b471f","slug":"121497984184-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शामली का गौरव हत्याकांड:","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शामली का गौरव हत्याकांड:
Updated Wed, 21 Jun 2017 12:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो युवकों को आजीवन कारावास
मुजफ्फरनगर। अदालत ने शामली के गौरव हत्याकांड में दो युवकों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 75-75 हजार रुपये जुर्माना भी किया है। न्यायालय ने जुर्माना की आधी रकम वादी को देने के आदेश दिए हैं।
शामली के मोहल्ला रामशाला निवासी धर्मबीर सिंह के छह वर्षीय बेटे गौरव उर्फ गौरा की 4 दिसंबर 2010 को अपहरण के बाद हत्या कर शव यमुना नहर में फेंक दिया गया था। बच्चे के पिता धर्मवीर सिंह ने शहर कोतवाली पर मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि उसके चचेरे भाई कमल पुत्र महावीर उसके बेटे गौरव उर्फ गौरा को वैन में बैठा कर ले गया था, जिसको मोहल्ला निवासी दीपक व रामचंद्र ने देखा था। इस मुकदमे में कमल पुत्र महावीर और उसके दोस्त कुबेर पुत्र ओमदत्त शर्मा निवासीगण शामली को नामजद किया गया था। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर जानकारी हासिल की। इस पर अभियुक्तों ने बताया कि गौरव उर्फ गौरा की गला दबाकर हत्या कर शव नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने दस दिन बाद 14 दिसंबर 2010 दोनों की निशानदेही पर बच्चे का शव लिलौन की नहर से बरामद किया था। पुलिस ने अभियुक्त कमल की निशानदेही पर बच्चे का कपड़ा भी बरामद कर लिया था। अभियुक्तों ने पुलिस को बताया था कि धर्मवीर ने उन्हें शराब पीने के लिए रुपये नहीं दिए थे तथा उनको बुरा भला कहा था, इसी रंजिश में उन्होंने उसके बेटे का अपहरण कर हत्या कर दी। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे वीके पांडे की अदालत संख्या 9 में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अंजुम खान और वादी के अधिवक्ता आजम शमशी ने कोर्ट में 8 गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए मंगलवार को अभियुक्त कमल व कुबेर को दोषी करार देते हुए धारा 364 के तहत 10 वर्ष का कारावास व 20 हजार रुपया जुर्माना, धारा 302 के तहत आजीवन कारावास व 50 हजार रुपया जुर्माना तथा धारा 201 के तहत 4 वर्ष का कारावास व 5 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना की आधी रकम वादी को देने के आदेश दिए। दोनों अभियुक्तों की जमानत नहीं हो पायी थी और दोनों तभी से जेल में बंद है।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। अदालत ने शामली के गौरव हत्याकांड में दो युवकों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 75-75 हजार रुपये जुर्माना भी किया है। न्यायालय ने जुर्माना की आधी रकम वादी को देने के आदेश दिए हैं।
शामली के मोहल्ला रामशाला निवासी धर्मबीर सिंह के छह वर्षीय बेटे गौरव उर्फ गौरा की 4 दिसंबर 2010 को अपहरण के बाद हत्या कर शव यमुना नहर में फेंक दिया गया था। बच्चे के पिता धर्मवीर सिंह ने शहर कोतवाली पर मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि उसके चचेरे भाई कमल पुत्र महावीर उसके बेटे गौरव उर्फ गौरा को वैन में बैठा कर ले गया था, जिसको मोहल्ला निवासी दीपक व रामचंद्र ने देखा था। इस मुकदमे में कमल पुत्र महावीर और उसके दोस्त कुबेर पुत्र ओमदत्त शर्मा निवासीगण शामली को नामजद किया गया था। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर जानकारी हासिल की। इस पर अभियुक्तों ने बताया कि गौरव उर्फ गौरा की गला दबाकर हत्या कर शव नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने दस दिन बाद 14 दिसंबर 2010 दोनों की निशानदेही पर बच्चे का शव लिलौन की नहर से बरामद किया था। पुलिस ने अभियुक्त कमल की निशानदेही पर बच्चे का कपड़ा भी बरामद कर लिया था। अभियुक्तों ने पुलिस को बताया था कि धर्मवीर ने उन्हें शराब पीने के लिए रुपये नहीं दिए थे तथा उनको बुरा भला कहा था, इसी रंजिश में उन्होंने उसके बेटे का अपहरण कर हत्या कर दी। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे वीके पांडे की अदालत संख्या 9 में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अंजुम खान और वादी के अधिवक्ता आजम शमशी ने कोर्ट में 8 गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए मंगलवार को अभियुक्त कमल व कुबेर को दोषी करार देते हुए धारा 364 के तहत 10 वर्ष का कारावास व 20 हजार रुपया जुर्माना, धारा 302 के तहत आजीवन कारावास व 50 हजार रुपया जुर्माना तथा धारा 201 के तहत 4 वर्ष का कारावास व 5 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना की आधी रकम वादी को देने के आदेश दिए। दोनों अभियुक्तों की जमानत नहीं हो पायी थी और दोनों तभी से जेल में बंद है।
विज्ञापन