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Muzaffarnagar News: आइए...पर्यावरण की सुरक्षा के लिए मनाएं ग्रीन दीवाली
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मुजफ्फरनगर। खुशियों के त्योहार दीवाली पर पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लें। हल्के पटाखों का प्रयोग करें। पटाखे जलाने के दौरान सावधानी बरतें। सूती कपड़े पहनें। अगर पटाखे से कोई जल जाए तो उसे पानी से साफ करें। ऐसा करने से जलन कम होगी और त्वचा पर फफोले पड़ने की आशंका कम रहेगी। बच्चों को अकेले में पटाखे नहीं छुड़ाने दें। आतिशबाजी के दौरान लापरवाही नुकसानदेय साबित हो सकती है। यदि पटाखा हाथ में फट जाए तो जलने का खतरा रहता है। पटाखों की तेज आवाज स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ.अमित सैनी का कहना है कि पटाखों की तेज ध्वनि कानों की सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती है, जिसमें बहरेपन का भी खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि दिवाली पर कुछ पटाखों से निकलने वाली आवाज 140 डेसिबल या उससे भी अधिक हो सकती है जबकि 85 डेसिबल से अधिक की कोई भी ध्वनि लंबे समय तक सुनना कानों के लिए नुकसानदायक होता है। उन्होंने सलाह दी कि तेज आवाज वाले पटाखे न जलाएं।
पटाखों से जल जाएं त्वचा तो क्या करें
जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. पंकज अग्रवाल का कहना है कि पटाखे से हाथ या त्वचा जल जाए तो जले हुए स्थान को ठंडे पानी में 10-15 मिनट तक रखें। इससे जलन कम होती है और सूजन नहीं बढ़ती। जले हुए स्थान को साफ और सूखे कपड़े से ढकें ताकि धूल और गंदगी न लगे। इस तरह संक्रमण का खतरा कम होता है। कई बार जलने के कारण छाले भी पड़ जाते हैं, जिससे आपको तेज दर्द हो सकता है। छालों को फोड़ने से बचें क्योंकि इससे संक्रमण हो सकता है।
जिला अस्पताल में 10 बेड रखे सुरक्षित
जिला अस्पताल सीएमएस डॉ.संजय वर्मा का कहना है कि पटाखे जलाते समय सावधानी की आवश्यकता है। बताया कि पटाखे जलाते समय यदि कोई दुर्घटना हो जाती है तो जिला अस्पताल में उपचार के लिए 10 बेड सुरक्षित किए गए हैं। चिकित्सक एवं आवश्यक दवाइयां भी मौजूद हैं।
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दीपावली पर बरतें ये विशेष सावधानी
- बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें।
- पटाखे जलाते समय सूती और फिटिंग के कपड़े पहने।
- पटाखे जलाते ही उनसे काफी दूर हट जाएं।
- पटाखे हमेशा किसी खुली जगह पर जलाएं।
- आस-पास पानी की बाल्टी और रेत रखें तैयार।
- अगर पटाखा एक बार में न जले तो उसे न छुएं।
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पटाखों से जल जाएं त्वचा तो क्या करें
जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. पंकज अग्रवाल का कहना है कि पटाखे से हाथ या त्वचा जल जाए तो जले हुए स्थान को ठंडे पानी में 10-15 मिनट तक रखें। इससे जलन कम होती है और सूजन नहीं बढ़ती। जले हुए स्थान को साफ और सूखे कपड़े से ढकें ताकि धूल और गंदगी न लगे। इस तरह संक्रमण का खतरा कम होता है। कई बार जलने के कारण छाले भी पड़ जाते हैं, जिससे आपको तेज दर्द हो सकता है। छालों को फोड़ने से बचें क्योंकि इससे संक्रमण हो सकता है।
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जिला अस्पताल में 10 बेड रखे सुरक्षित
जिला अस्पताल सीएमएस डॉ.संजय वर्मा का कहना है कि पटाखे जलाते समय सावधानी की आवश्यकता है। बताया कि पटाखे जलाते समय यदि कोई दुर्घटना हो जाती है तो जिला अस्पताल में उपचार के लिए 10 बेड सुरक्षित किए गए हैं। चिकित्सक एवं आवश्यक दवाइयां भी मौजूद हैं।
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दीपावली पर बरतें ये विशेष सावधानी
- बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें।
- पटाखे जलाते समय सूती और फिटिंग के कपड़े पहने।
- पटाखे जलाते ही उनसे काफी दूर हट जाएं।
- पटाखे हमेशा किसी खुली जगह पर जलाएं।
- आस-पास पानी की बाल्टी और रेत रखें तैयार।
- अगर पटाखा एक बार में न जले तो उसे न छुएं।