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एसआईटी, पुलिस की चूक से सीएम तक पहुंचे फर्जी नाम
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 14 Oct 2016 12:54 AM IST
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बुजुर्ग महिला आसिमा।
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री को भेजी गई लापता आश्रितों की मुआवजा सूची में दो लोगों के जीवित पाए जाने के मामले में एसआईटी और पुलिस जांच कटघरे में है। उन्हीं पात्रों को 15 लाख की सहायता राशि के लिए चुना गया था, जिनकी रिपोर्ट सूबे के गृह मंत्रालय ने मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी थी। पात्रों में शामिल किए गए शहर की बुजुर्ग आसिमा और शाहपुर के गुलफाम की जो सच्चाई सामने आई है, उससे हर कोई दंग रह गया है।
दंगे के बाद प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित कर जांच कराई थी, मगर लापता लोगों का कोई रहस्य आज तक सामने नहीं आया है। एसआईटी ने गृहमंत्रालय को मुजफ्फरनगर और शामली के जिन 18 लापता लोगों की सूची भेजी थी, उसमें थाना भौराकलां के गांव हडौली से लापता जुम्मा को एक लावारिस शव की डीएनए की जांच के बाद मृत घोषित किया गया था। इसी लापता आश्रित सूची के आधार पर जीवित पाई गई आसिमा और गुलफाम को मुआवजा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को नाम भेज दिया गया।
ऐन वक्त पर खुली हकीकत से एसआईटी और पुलिस की जांच पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। शासन ने 15 लाख के मुआवजा चेक दिए जाने से पहले लापता लोगों के वारिसान को लखनऊ भेजने की व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे। एडीएम वित्त सुनील कुमार सिंह के आदेश पर शहर लेखपाल मूलचंद सैनी ने बुजुर्ग आसिमा के खालापार स्थित घर जाकर वारिसों की सूची तैयार की। 15 लाख की रकम देख दस वारिसों ने मुआवजे पर अपना-अपना हक जताया।
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आसिमा के दो पुत्र महताब और इसरार तथा आठ विवाहित पुत्रियों सलमा, जरीना, हसीना, चंदाबी, रेशमा, जहांआरा, सितारा, नजराना के नाम वारिसों में दाखिल कर लिए गए। लेखपाल को शक हुआ तो आस-पडोस से खोजबीन की गई। पता चला कि कोतवाली शहर में गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद आसिमा दो साल से बाहर रही और अब यहीं है। खुलासे के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में शासन को रिपोर्ट देकर सच्चाई से अवगत कराया।
शाहपुर के गांव सोरम के निवासी गुलफाम उर्फ जीशान पुत्र मेहरदीन के प्रकरण में भी पुलिस लापरवाही रही है। शाहपुर थाने में 13 सितंबर, 2013 को गुलफाम की गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। पुलिस जांच के बाद दस अक्तूबर 2013 में यह मामला अपहरण में तब्दील कर दिया गया। पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी, जिस पर सीओ बुढ़ाना ने पुन: जांच के निर्देश दे दिए। इसी बीच पता चला कि बागपत के थाना खेकड़ा में दर्ज हमले के एक मुकदमे में गुलफाम गिरफ्तार होकर मेरठ जेल में बंद है।
हालांकि वहां उसने अपना नाम जीशान लिखवाया है। परिजन भी उससे जाकर जेल में मिले। हकीकत जानने के बाद एसडीएम बुढ़ाना ने दस सितंबर 2015 को डीएम को रिपोर्ट प्रेषित कर पात्रों की सूची से गुलफाम का नाम हटाने की संस्तुति कर दी। आखिर कैसे एसडीएम की रिपोर्ट फाइलों में दब गई और गुलफाम का नाम अंतिम समय तक मुआवजा सूची में चलता रहा।
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दंगे के बाद प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित कर जांच कराई थी, मगर लापता लोगों का कोई रहस्य आज तक सामने नहीं आया है। एसआईटी ने गृहमंत्रालय को मुजफ्फरनगर और शामली के जिन 18 लापता लोगों की सूची भेजी थी, उसमें थाना भौराकलां के गांव हडौली से लापता जुम्मा को एक लावारिस शव की डीएनए की जांच के बाद मृत घोषित किया गया था। इसी लापता आश्रित सूची के आधार पर जीवित पाई गई आसिमा और गुलफाम को मुआवजा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को नाम भेज दिया गया।
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ऐन वक्त पर खुली हकीकत से एसआईटी और पुलिस की जांच पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। शासन ने 15 लाख के मुआवजा चेक दिए जाने से पहले लापता लोगों के वारिसान को लखनऊ भेजने की व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे। एडीएम वित्त सुनील कुमार सिंह के आदेश पर शहर लेखपाल मूलचंद सैनी ने बुजुर्ग आसिमा के खालापार स्थित घर जाकर वारिसों की सूची तैयार की। 15 लाख की रकम देख दस वारिसों ने मुआवजे पर अपना-अपना हक जताया।
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आसिमा के दो पुत्र महताब और इसरार तथा आठ विवाहित पुत्रियों सलमा, जरीना, हसीना, चंदाबी, रेशमा, जहांआरा, सितारा, नजराना के नाम वारिसों में दाखिल कर लिए गए। लेखपाल को शक हुआ तो आस-पडोस से खोजबीन की गई। पता चला कि कोतवाली शहर में गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद आसिमा दो साल से बाहर रही और अब यहीं है। खुलासे के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में शासन को रिपोर्ट देकर सच्चाई से अवगत कराया।
शाहपुर के गांव सोरम के निवासी गुलफाम उर्फ जीशान पुत्र मेहरदीन के प्रकरण में भी पुलिस लापरवाही रही है। शाहपुर थाने में 13 सितंबर, 2013 को गुलफाम की गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। पुलिस जांच के बाद दस अक्तूबर 2013 में यह मामला अपहरण में तब्दील कर दिया गया। पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी, जिस पर सीओ बुढ़ाना ने पुन: जांच के निर्देश दे दिए। इसी बीच पता चला कि बागपत के थाना खेकड़ा में दर्ज हमले के एक मुकदमे में गुलफाम गिरफ्तार होकर मेरठ जेल में बंद है।
हालांकि वहां उसने अपना नाम जीशान लिखवाया है। परिजन भी उससे जाकर जेल में मिले। हकीकत जानने के बाद एसडीएम बुढ़ाना ने दस सितंबर 2015 को डीएम को रिपोर्ट प्रेषित कर पात्रों की सूची से गुलफाम का नाम हटाने की संस्तुति कर दी। आखिर कैसे एसडीएम की रिपोर्ट फाइलों में दब गई और गुलफाम का नाम अंतिम समय तक मुआवजा सूची में चलता रहा।