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चंद्रशेखर को रिहा िकया जाए

Sat, 10 Mar 2018 12:13 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर। Updated Sat, 10 Mar 2018 12:13 AM IST
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Chandrasekhar should be released
revel - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। भीम आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष चंद्रशेखर उर्फ रावण की रिहाई की मांग को लेकर भीम आर्मी के साथ ही दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी देने को लेकर प्रदर्शन किया। कलक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारी की घोषण होने के बाद कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन दिया।
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सहारनपुर में हिंसा के मामले को लेकर भीम आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष चंद्रशेखर उर्फ रावण को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। चंद्रशेखर पर रासुका भी लगाया गया है।  भीम आर्मी और दलित संगठन के कार्यकर्ता सरकार की इस कार्रवाई को उत्पीड़न की कार्रवाई मान रहे हैं। शुक्रवार को भीम आर्मी, जय सिंधु संघ, शहीद उधम सिंह सेना सहित कई दलित संगठनों ने रावण की रिहाई को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।
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प्रदर्शन को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क नजर आया। कार्यकर्ताओं के वहां पहुंचते ही सिविल लाईन थाने से भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। यहां पुलिस ने कार्यकर्ताओं को माइक नहीं बजाने दिया। इसको लेकर कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आक्रोश जाहिर कर हंगामा किया। बाद में मौके पर पहुंचे एडीएम प्रशासन हरीश चंद्र को कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
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कहा कि चंद्रशेखर पर सहारनपुर के गांव शब्बीरपुर की घटना के संबंध में प्रशासन द्वारा शासन के दबाव में रासुका की कार्यवाही की गई है, जो गलत है। शासन प्रशासन आज दलितों, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कर उनका शोषण कर रहा है। जब तक सड़क दूधली कांड के आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।


उन्होंने चंद्रशेखर की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि यूपी में भाजपा सरकार दलितों पर दमनकारी नीति अपना रही है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जेल भरो आंदोलन के लिए कारागार जाने की तैयारी की तो पुलिस ने उनको वहीं पर रोक लिया। एसडीएम कुमार धर्मेंद्र ने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और रिहाई की एक साथ घोषणा की तो कार्यकर्ता नहीं माने। बाद में एडीएम के आदेश पर इन कार्यकर्ताओं को पुलिस गिरफ्तार कर सिविल लाईन थाने ले गयी। मौके पर नील कुमार, मंजीत सिंह नौटियाल, दिनेश कुमार, प्रदीप कुमार, अजय पालीवाल, आरिफ खां, दीपक आदि सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल रहे।
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