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सीसीटीवी कैमरों का सुरक्षा सिस्टम फिर फेल, कैसे खोजें उपद्रवी
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 03 Apr 2018 11:58 PM IST
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शहर में तैनात पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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उपद्रव के दौरान प्रशासन की तीसरी आंख बंद मिली। बवालियों की खोजबीन में शहर के सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए तो पुलिस अफसरों को कोई खास पुख्ता सुबूत नहीं मिले हैं। ज्यादातर कैमरे बंद मिले या रिकार्डिंग फुटेज साफ नहीं दिखाई दी। ऐसे में अराजक तत्वों को चिह्नित करना पुलिस प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा।
प्रशासन, एमडीए और नगर पालिका ने मुजफ्फरनगर दंगे के बाद शहर के चौराहों और मुख्य केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों का सुरक्षा कवच बनाने का प्लान तैयार किया था। शिव चौक, प्रकाश चौक, महावीर चौक, सरवट गेट, मीनाक्षी चौक, ईदगाह चौक पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए।
एक्ट में बदलाव के विरोध में सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान जिन जगहों पर उपद्रव, तोड़फोड़ और बवाल हुआ, वहां ज्यादातर सीसीटीवी कैमरे ही नजर नहीं आए। रेलवे रोड, जानसठ फ्लाईओवर ब्रिज और नई मंडी कोतवाली क्षेत्र में सबसे ज्यादा आगजनी और उपद्रव हुआ।
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पुलिस प्रशासन ने दिनभर सीसीटीवी कैमरे खंगाले, मगर अधिकांश बंद मिले। कहीं पर वायरिंग टूटी हुई थी तो कहीं रिकार्डिंग नहीं हो रही थी। रिकार्डिंग फुटेज भी इस लायक नहीं है जो उपद्रवियों की पहचान करा सके। महावीर चौक, प्रकाश चौक और कोर्ट रोड पर भीड़ नारेबाजी और हो-हल्ला करती दिख रही है, मगर प्रशासन की खोजबीन अधर में लटकी हुई है।
ऐसे में सीसीटीवी कैमरों के संचालन में हुई चूक बवालियों के लिए राहत बनती दिख रही है। नईमंडी पीएनबी, साईंधाम और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कैमरों से सुबूत तलाशने में पुलिस जुटी है। निजी कैमरों, मोबाइल से उपद्रव की मूवी बनाने वालों से भी रिकार्ड जुटाया जा रहा है।
खुफिया एजेंसियां अपने-अपने तरीके से सीसीटीवी कैमरों के रिकार्ड पलट रही है। अभी तक की जांच में उपद्रवियों की पहचान साफ नहीं हो पाई है। दंगे के पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन शहर में सीसीटीवी कैमरों की सुरक्षा व्यवस्था लापरवाही की बानगी हुई है।
जीआरपी के चार कैमरों में छिपे बवाली
मुजफ्फरनगर। जीआरपी के सीसीटीवी कैमरों पर पुलिस-प्रशासन की नजरें टिकी है। रेलवे स्टेशन क्षेत्र में जीआरपी ने अलग-अलग जगह पर छह कैमरे लगाए हुए हैं। उनमें से भी जांच के दौरान दो कैमरे बंद मिले।
चार कैमरों में जीआरपी और आरपीएफ उपद्रवियों को चिह्नित करने में जुटी है। हालांकि जीआरपी को डीएम और एसएसपी ने कैमरों की फुटेज किसी को भी लीक नहीं करने के निर्देश दिए हैं। पूरी पड़ताल के बाद चिह्नित उपद्रवियों को बवाल, उपद्रव और आगजनी का आरोपी बनाया जाना है।
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प्रशासन, एमडीए और नगर पालिका ने मुजफ्फरनगर दंगे के बाद शहर के चौराहों और मुख्य केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों का सुरक्षा कवच बनाने का प्लान तैयार किया था। शिव चौक, प्रकाश चौक, महावीर चौक, सरवट गेट, मीनाक्षी चौक, ईदगाह चौक पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए।
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एक्ट में बदलाव के विरोध में सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान जिन जगहों पर उपद्रव, तोड़फोड़ और बवाल हुआ, वहां ज्यादातर सीसीटीवी कैमरे ही नजर नहीं आए। रेलवे रोड, जानसठ फ्लाईओवर ब्रिज और नई मंडी कोतवाली क्षेत्र में सबसे ज्यादा आगजनी और उपद्रव हुआ।
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पुलिस प्रशासन ने दिनभर सीसीटीवी कैमरे खंगाले, मगर अधिकांश बंद मिले। कहीं पर वायरिंग टूटी हुई थी तो कहीं रिकार्डिंग नहीं हो रही थी। रिकार्डिंग फुटेज भी इस लायक नहीं है जो उपद्रवियों की पहचान करा सके। महावीर चौक, प्रकाश चौक और कोर्ट रोड पर भीड़ नारेबाजी और हो-हल्ला करती दिख रही है, मगर प्रशासन की खोजबीन अधर में लटकी हुई है।
ऐसे में सीसीटीवी कैमरों के संचालन में हुई चूक बवालियों के लिए राहत बनती दिख रही है। नईमंडी पीएनबी, साईंधाम और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कैमरों से सुबूत तलाशने में पुलिस जुटी है। निजी कैमरों, मोबाइल से उपद्रव की मूवी बनाने वालों से भी रिकार्ड जुटाया जा रहा है।
खुफिया एजेंसियां अपने-अपने तरीके से सीसीटीवी कैमरों के रिकार्ड पलट रही है। अभी तक की जांच में उपद्रवियों की पहचान साफ नहीं हो पाई है। दंगे के पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन शहर में सीसीटीवी कैमरों की सुरक्षा व्यवस्था लापरवाही की बानगी हुई है।
जीआरपी के चार कैमरों में छिपे बवाली
मुजफ्फरनगर। जीआरपी के सीसीटीवी कैमरों पर पुलिस-प्रशासन की नजरें टिकी है। रेलवे स्टेशन क्षेत्र में जीआरपी ने अलग-अलग जगह पर छह कैमरे लगाए हुए हैं। उनमें से भी जांच के दौरान दो कैमरे बंद मिले।
चार कैमरों में जीआरपी और आरपीएफ उपद्रवियों को चिह्नित करने में जुटी है। हालांकि जीआरपी को डीएम और एसएसपी ने कैमरों की फुटेज किसी को भी लीक नहीं करने के निर्देश दिए हैं। पूरी पड़ताल के बाद चिह्नित उपद्रवियों को बवाल, उपद्रव और आगजनी का आरोपी बनाया जाना है।