खतौली। जैन धर्म के दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर जैन मंदिरों में जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक पूजन और विधान पूर्ण किए गए। वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर प्रत्येक मंदिर में निर्वाण फल चढ़ाया गया। जल कलश यात्रा निकाली गई। चन्द्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर पीसनोपाड़ा में मंदिर प्रबन्ध समिति व अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के तत्वावधान में पंडित अखिल जैन शास्त्री ने बताया कि आत्मा में रमण करना ब्रह्मचर्य है। रागोत्पादक साधनों के होने पर भी उन सबसे विरक्त होकर आत्मोन्मुखी बने रहना, उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है। श्रावक को शील के व्रतों का पालन करना चाहिए। बैंडबाजों के साथ यह जलकलश यात्रा निकाली गई। कनिष्क शास्त्री ने बच्चों की कक्षा में जैन धर्म के नैतिक व धार्मिक संस्कारों को बच्चों में डालने हेतु अनेक कथानक सुनाए। दस दिन तक जो भूल चुक हुई, उसके प्रायश्चित हेतु प्रतिक्रमण कराया गया। कलपेन्द्र जैन ,डॉ ज्योति जैन, अरुण जैन, अशोक शास्त्री, संजय जैन, शैली जैन, सम्यक जैन, रामकुमार जैन, मदन जैन, निशांत जैन उपस्थित रहे।

खतौली जैन मंदिर में जिनेंद्र भगवान का जलाभिषेक करते श्रद्धालु।स्त्रोत स्वयं