{"_id":"59c7fa9e4f1c1bb1688b6966","slug":"black-river-and-its-contaminated-water","type":"story","status":"publish","title_hn":"काल बन रही काली, दूषित पानी 100 गांवों में बांट रहा बीमारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काल बन रही काली, दूषित पानी 100 गांवों में बांट रहा बीमारी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:04 AM IST
विज्ञापन
जिले से होकर गुजर रही काली नदी।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भंडूरा-धंधेड़ा नाले में दूषित जल डालने वाली फैक्ट्रियों पर एनजीटी की नजर टेढ़ी हो गई है। वहीं, इन फैक्ट्रियों के साथ बेगराजपुर औद्योगिक क्षेत्र का दूषित जल काली नदी, हिंडन में गिरता है। काली नदी के दूषित जल के कारण करीब 50 किलोमीटर का क्षेत्र प्रभावित हो गया है, जिसके दायरे में करीब 100 से अधिक गांव शामिल हैं। इन गांवों में लोगों की जिंदगी बेहाल हो गई है। एनजीटी के सख्त रुख के बाद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड काली, हिंडन नदी से महीने में तीन बार पानी का सेंपल भर रहा है।
कभी मोती सा साफ पानी लेकर बहने वाली काली और हिंडन नदी अब औद्योगिक इकाईयों का शिकार हो गई है। सबसे अधिक काली नदी (वेस्ट) प्रदूषित है। काली वेस्ट के दायरे में करीब 30 किलोमीटर का क्षेत्र है, जबकि ईस्ट क्षेत्र में 20 किलोमीटर क्षेत्र आता है। काली नदी के नजदीक बसे गांवों में हालात विकट हो रहे हैं। रतनपुरी के पास गांव डबल में नलों, खेतों पर लगे ट्यूबवेल से पीला पानी निकल रहा है। नदी के ईर्दगिर्द बसे गांवों में भूजल में करीब 80 प्रतिशत आयरन घुल कर आ रहा है।
भंडूरा-धंधेड़ा नाले में पानी डालने वाली 9 इंडस्ट्रियों पर एनजीटी ने जुर्माना लगाया है, जबकि 14 पर तलवार लटकी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रियों पर टेढ़ी नजर कर चुकी है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी इस मामले को लेकर फटकार लगाई है। एनजीटी काली नदी में जल डालने वाली इंडस्ट्रियों की भी जानकारी मांगी है, जबकि इसके प्रदूषण का स्तर भी देने के लिए कहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई विपुल कुमार ने बताया कि काली और हिंडन नदी का हर महीने तीन बार सेंपल भरा जाता है, जिसे लैब में जांचने के लिए लखनऊ स्तर भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट के आने के बाद स्थानीय स्तर पर कार्य होता है।
विज्ञापन
500 से अधिक टीडीएस, आयरन पी रहे लोग
मुजफ्फरनगर। काली नदी (ईस्ट-वेस्ट) के कारण इनसे पास बसे गांव के ग्रामीण पानी के बजाए धीमा जहर पी रहे हैं। भूजल प्रभावित होने के कारण नलों से 500 स्तर पर टीडीएस युक्त पानी तथा 80 फीसदी आयरन की मात्रा जल में निकल रही है। जिसे पीकर लोग बीमार पड़ रहे हैं। कई गांव ऐसे हो गए है कि यहां पर खेतों में खड़ी फसलें भी बीमार हो चुकी है।
इन गांवों में काली बरपा रही कहर
मुजफ्फरनगर। काली नदी के दूषित जल के कारण डबल, कितास, समौली, कैलाशनगर, इंचौड़ा, मंडावली खादर, वहलना, अंबरपुर, बेगराजपुर, सीमली, दीदाहेड़ी, लच्छेड़ा, नंगला, भनवाड़ा, पुरबालियान, जीवना, चलसीना, रतनपुरी आदि करीब 100 से अधिक गांवों का पानी पीने लायक नहीं है।
हैजा और कैंसर पनप रहा
मुजफ्फरनगर। इन गांवों में अधिकांश लोग पेट की बीमारी, हैजा, बुखार के साथ कैंसर जैसी घातक बीमारी में जकड़ रहे है। नीर फाउंडेशन से डबल गांव निवासी मोहन त्यागी ने बताया कि गांव में दर्जनभर से अधिक कैंसर के मरीज है। यहां के नलों का पानी पीला निकलता है। अप्रैल माह में भारत मंत्रालय से आए वैज्ञानिक कुलदीप भदौरिया समेत क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम भी कई बार सर्वे कर चुकी है। गांव में समस्या से निजात दिलाए जाने को करीब 212 परिवारों को आरओ फिल्टर दिए जा रहे हैं।
विज्ञापन
कभी मोती सा साफ पानी लेकर बहने वाली काली और हिंडन नदी अब औद्योगिक इकाईयों का शिकार हो गई है। सबसे अधिक काली नदी (वेस्ट) प्रदूषित है। काली वेस्ट के दायरे में करीब 30 किलोमीटर का क्षेत्र है, जबकि ईस्ट क्षेत्र में 20 किलोमीटर क्षेत्र आता है। काली नदी के नजदीक बसे गांवों में हालात विकट हो रहे हैं। रतनपुरी के पास गांव डबल में नलों, खेतों पर लगे ट्यूबवेल से पीला पानी निकल रहा है। नदी के ईर्दगिर्द बसे गांवों में भूजल में करीब 80 प्रतिशत आयरन घुल कर आ रहा है।
विज्ञापन
भंडूरा-धंधेड़ा नाले में पानी डालने वाली 9 इंडस्ट्रियों पर एनजीटी ने जुर्माना लगाया है, जबकि 14 पर तलवार लटकी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रियों पर टेढ़ी नजर कर चुकी है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी इस मामले को लेकर फटकार लगाई है। एनजीटी काली नदी में जल डालने वाली इंडस्ट्रियों की भी जानकारी मांगी है, जबकि इसके प्रदूषण का स्तर भी देने के लिए कहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई विपुल कुमार ने बताया कि काली और हिंडन नदी का हर महीने तीन बार सेंपल भरा जाता है, जिसे लैब में जांचने के लिए लखनऊ स्तर भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट के आने के बाद स्थानीय स्तर पर कार्य होता है।
विज्ञापन
500 से अधिक टीडीएस, आयरन पी रहे लोग
मुजफ्फरनगर। काली नदी (ईस्ट-वेस्ट) के कारण इनसे पास बसे गांव के ग्रामीण पानी के बजाए धीमा जहर पी रहे हैं। भूजल प्रभावित होने के कारण नलों से 500 स्तर पर टीडीएस युक्त पानी तथा 80 फीसदी आयरन की मात्रा जल में निकल रही है। जिसे पीकर लोग बीमार पड़ रहे हैं। कई गांव ऐसे हो गए है कि यहां पर खेतों में खड़ी फसलें भी बीमार हो चुकी है।
इन गांवों में काली बरपा रही कहर
मुजफ्फरनगर। काली नदी के दूषित जल के कारण डबल, कितास, समौली, कैलाशनगर, इंचौड़ा, मंडावली खादर, वहलना, अंबरपुर, बेगराजपुर, सीमली, दीदाहेड़ी, लच्छेड़ा, नंगला, भनवाड़ा, पुरबालियान, जीवना, चलसीना, रतनपुरी आदि करीब 100 से अधिक गांवों का पानी पीने लायक नहीं है।
हैजा और कैंसर पनप रहा
मुजफ्फरनगर। इन गांवों में अधिकांश लोग पेट की बीमारी, हैजा, बुखार के साथ कैंसर जैसी घातक बीमारी में जकड़ रहे है। नीर फाउंडेशन से डबल गांव निवासी मोहन त्यागी ने बताया कि गांव में दर्जनभर से अधिक कैंसर के मरीज है। यहां के नलों का पानी पीला निकलता है। अप्रैल माह में भारत मंत्रालय से आए वैज्ञानिक कुलदीप भदौरिया समेत क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम भी कई बार सर्वे कर चुकी है। गांव में समस्या से निजात दिलाए जाने को करीब 212 परिवारों को आरओ फिल्टर दिए जा रहे हैं।