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बसों में लादकर नहीं ले जाने दी गईं साइकिलें और रिक्शा

Mon, 18 May 2020 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2020 11:36 PM IST
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Bicycles and rickshaws were not allowed to be carried in buses
रतनपुरी में रोके जाने पर हंगामा करते श्रमिक। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
बसों में लादकर नहीं ले जाने दी गईं साइकिलें और रिक्शा
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मुजफ्फरनगर। साहब, घर जाने के लिए चार-चार हजार रुपये की साइकिलें खरीदीं थीं। कुछ के पास रिक्शाएं थीं। इन्हीं के सहारे घर जा रहे थे। सरकार ने बसों का इंतजाम तो करा दिया, लेकिन उनकी साइकिलें और रिक्शाएं छिन गईं। पुलिस ने कहा है कि लॉकडाउन खुलने के बाद आकर ले जाना। अब वे दोबारा यहां नहीं आना चाहते। अब तो यही सोच लिया है कि साइकिलें जान से कीमती नहीं थी।

रोडवेज बस से रायबरेली के लिए निकले लवकुश की आंखें यह सब कहते हुए छलक उठी। उनके साथ सुरेश, राजेंद्र समेत अन्य कई मजदूर थे, जो पंजाब से छह साइकिलों और चार रिक्शाओं से चले गए। उन्हें दो दिन पहले मुजफ्फरनगर-सहारनपुर के बॉर्डर पर रोक लिया गया। एक स्कूल में ठहराया गया और सोमवार सुबह रोडवेज बस से उनके जनपदों के लिए रवाना कर दिया गया। बस रोडवेज बस स्टैंड पर रुकी थी। श्रमिकों ने बताया कि उनके जैसे कई अन्य श्रमिकों की साइकिलें यहीं रख ली गईं थी। उन्होंने मिन्नतें भी की, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। पुलिस ने कह दिया कि लॉकडाउन के बाद आकर ले जाना, लेकिन अब यहां कौन आएगा। उन्हें तो उस जगह का नाम भी पता, जहां साइकिलें रखीं गई हैं। श्रमिकों ने बताया कि जहां उन्हें रोका गया था, वहां सैकड़ों साइकिलें खड़ी हैं और मजदूरों को भेजा जा रहा है।
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