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दवा फैक्टरी में काम करते-करते बन बैठा मालिक

Tue, 29 Jun 2021 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Jun 2021 11:45 PM IST
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Became the owner while working in the pharmaceutical factory
दवा फैक्टरी में काम करते-करते बन बैठा मालिक
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मुजफ्फरनगर। नकली दवाइयों के धंधे से जुड़ा गांव बिलासपुर निवासी सहदेश चंद सालों में ही नकली दवाइयों के धंधे से जुड़कर मालामाल हो गया। पहले दवा फैक्टरी में काम करने वाले युवक ने एक बंद फैक्टरी से मशीनें खरीदीं और महमूदनगर के मुरसलीन को साझीदार बनाया। इसके बाद आयुर्वेदिक दवाइयों के निर्माण का लाइसेंस लेकर धड़ल्ले से नकली दवाइयां बनानी शुरू कर दीं।
नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के गांव बिलासपुर निवासी सहदेश जनपद में तैयार हो रहीं नकली दवाइयों के कारोबार का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस उम्मेद कुमार ने बताया कि सहदेश पहले किसी दवा फैक्टरी में काम करता था। वहां से ही उसने दवाइयां बनाने के गुर सीखे। इसके कुछ समय बाद नई मंडी क्षेत्र स्थित एक बंद दवा फैक्टरी से उसने औने-पौने दाम में मशीनें खरीदीं और खुद आयुर्वेदिक दवाइयों के निर्माण का लाइसेंस ले लिया। इसके बाद आरोपी ने अपने साथ ही दवा फैक्टरी में काम करने वाले महमूदनगर निवासी मुरसलीन को साझीदार बनाया और आयुर्वेदिक दवाइयों की आड़ में नकली एलोपैथिक दवाइयां बनानी शुरू कर दीं। मुरसलीन ने भी अपने यहां कैप्सूल निर्माण की मशीनें लगाकर दवाइयों का निर्माण शुरू कर दिया। नकली दवाइयों की सप्लाई के लिए आर्यसमाज रोड स्थित इसी तरह के धंधे से जुड़े बलराज गर्ग को जिम्मेदारी दी गई, जिसके बाद सूबे के कई जनपदों में इन दवाइयों की सप्लाई शुरू कर दी गई। फैक्टरी श्रमिक से नकली दवा फैक्टरी का मालिक बनने वाले सहदेश व मुरसलीन इसी धंधे से चंद सालों में मालामाल हो गए थे।
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आखिर कैसे नहीं लगी प्रशासन को भनक
मुजफ्फरनगर। आयुर्वेदिक दवाइयों के निर्माण का लाइसेंस लेकर नकली एलोपैथिक दवाइयां बनाने वाले सहदेश व मुरसलीन कई साल से इस धंधे से जुड़े हुए थे, लेकिन आश्चर्यजनक तौर पर पुलिस-प्रशासन के साथ ही औषधि विभाग को भी इसकी भनक तक नहीं लगी। आयुर्वेदिक लाइसेंस लेने के नाम पर कौन सी दवाइयां बनाईं जा रहीं हैं, क्या लाइसेंस के तहत काम किया जा रहा है अथवा नहीं, प्रशासन व औषधि विभाग ने कभी इसका निरीक्षण करना भी उचित नहीं समझा। यही कारण रहा कि आरोपियों का यह नेटवर्क सूबे के कई जनपदों तक जा पहुंचा, जिसकी परत-दर-परत अब खुलकर सामने आ रही है।
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