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यूपी चुनाव 2022: इस बार बदल गए मीरापुर विधानसभा के समीकरण, पढ़िए क्यों खास है इस सीट पर मुकाबला

Tue, 18 Jan 2022 08:14 AM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Tue, 18 Jan 2022 08:14 AM IST
सार

मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट के समीकरण इस बार बदल गए है। वैसे यहां जब-जब लहर चली तो भाजपा प्रत्याशी को जीत हासिल हुई। पढ़िए इस सीट का पूरा इतिहास क्या है। 

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Assembly Election 2022: Know what is the history of the Meerapur Seat of Muzaffarnagar
मतदाता। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुजफ्फरनगर जिले के सबसे बड़े धर्म क्षेत्र शुकतीर्थ और संभलहेड़ा सिद्ध पीठ वाली सीट मीरापुर के समीकरण दिलचस्प हो गए हैं। जानसठ सुरक्षित सीट का हिस्सा मीरापुर में मिलाए जाने के बाद यहां गुर्जर, अनुसूचित जाति और मुस्लिम समीकरण प्रभावी है। एक तरफ उत्तराखंड और दूसरी तरफ बिजनौर से यह सीट लगी हुई है।  

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यही वजह है कि राजनीतिक दल इस सीट से गुर्जर या मुस्लिम प्रत्याशी को तवज्जो देते रहे हैं। 2012 में बसपा के टिकट से मौलाना जमील विधायक बने थे। 2017 में भाजपा की लहर चली, लेकिन कांग्रेस-सपा के गठबंधन के प्रत्याशी लियाकत अली ने दमदार मुकाबला किया था, लेकिन 194 वोटों से भाजपा के अवतार भड़ाना जीतकर विधायक बन गए थे। इस बार भी इस सीट पर कांटे का मुकाबला होने के आसार बन गए हैं।
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यह भी पढ़ें: दिलचस्प है इस सीट का इतिहास: यहां होगा रोमांचक मुकाबला, अभी कांग्रेस और गठबंधन ने नहीं उतारा प्रत्याशी
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मोरना सीट, जिस पर यह बने विधायक
साल          विधायक              पार्टी

1967        राजेंद्र दत्त           कांग्रेस
1969        धर्मवीर सिंह        बीकेडी
1974        नारायण सिंह        कांग्रेस
1977        नारायण सिंह        जनता पार्टी
1980        मेहंदी असगर       जनता दल सेक्यूलर
1985        सईदुज्जमां           कांग्रेस
1989        अमीर आलम        जनता दल
1991        रामपाल सिंह        भाजपा
1993        रामपाल सिंह        भाजपा
1996        संजय चौहान        सपा
2002        राजपाल सैनी        बसपा
2007        कादिर राना        रालोद

मोरना से बनी मीरापुर, बना नया समीकरण
साल        विधायक        पार्टी
2012        मौलाना जमील    बसपा
2017        अवतार भड़ाना    भाजपा

भोकरहेड़ी के नाम से भी हुआ था चुनाव
मीरापुर क्षेत्र के भोकरहेड़ी सीट से भी एक चुनाव हुआ था। 1962 में सुरक्षित सीट भोकरहेड़ी से शुगनचंद मजदूर विधायक बने थे। बाद में परिसीमन में यह सीट खत्म हो गई थी।

तीसरी पीढ़ी के चंदन चौहान लड़ें चुनाव
मोरना से लगातार दो बार जीत हासिल करने वाले सूबे के डिप्टी सीएम रहे नारायण सिंह के बेटे स्वर्गीय संजय चौहान भी यहीं से 1996 में सपा से विधायक रहे थे। इस बार तीसरी पीढ़ी के चंदन चौहान मीरापुर सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

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मोरना-मीरापुर में मुस्लिम जमाते रहे अखाड़ा
पहले मोरना और फिर मीरापुर विधानसभा में मुस्लिम जीतते रहे हैं। 1980 में मेहंदी असगर उर्फ मटरू मियां जनता दल सेक्यूलर से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 1985 में कांग्रेस से सईदुज्जमां, 1989 में जनता दल से अमीर आलम, 2007 में रालोद से कादिर राना और 2012 में बसपा से मौलाना जमील जीते हैं।

जब-जब चली लहर तो जीत गई भाजपा
मोरना और मीरापुर में जब-जब लहर चली, तब-तब भाजपा जीत गई। 1991 और 1993 में रामपाल सिंह भाजपा लहर में जीते। 2017 में फिर लहर चली तो अवतार भड़ाना जीत गए।

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