अमर उजाला एक्सक्लूसिव: लगातार तीसरे साल भी बढ़ा गन्ने का रकबा, जानिए- क्या है बड़ी वजह
यूपी के इस जिले में लगातार तीसरे साल भी गन्ने की रकबे में वृद्धि हुई है। जानिए इसके पीछे की वजह क्या है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में लगातार तीसरे साल भी गन्ने की रकबे में वृद्धि हुई है और दो लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से एक लाख 66 हजार 610 हेक्टेयर पर गन्ना बोया जा रहा है। जिले में दो लाख 18 हजार 18 किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं। गन्ना सर्वे के अनुसार इस सत्र में जिले में 2209 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल और 8377 गन्ना किसान बढ़े हैं।
साल 2018-19 में गन्ने का क्षेत्रफल एक लाख 35 हजार हेक्टेयर, 2019-20 में एक लाख 47 हजार हेक्टेयर, 2020-21 में एक लाख 64 हजार हेक्टेयर में गन्ने की फसल बोई गई थी। सर्वे के अनुसार 2021-22 में करीब एक लाख 66 हजार 610 हेक्टेयर जमीन में गन्ना बोया गया। बीते चार साल में लगभग 30 हजार हेक्टेयर गन्ने का रकबा बढ़ा है। जिले में लगभग 83 प्रतिशत जमीन पर गन्ने की ही खेती हो रही है। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि गत वर्ष के मुकाबले 2209 हेक्टेयर गन्ने का रकबा बढ़ गया है और गन्ने के 8377 किसान बढे़ हैं। जिले के किसानों का गन्ना जनपद की आठ चीनी मिलों सहित 13 चीनी मिलों में जाता है, इनमें सहारनपुर की देवबंद व गांगनौली, मेरठ की मवाना व दौराला, शामली जिले की थानाभवन चीनी मिल भी शामिल हैं।
वर्ष क्षेत्रफल किसान
2019-20 : 147029 हेक्टेयर 192576
2020-21 : 164391 हेक्टेयर 209641
2021-22 : 166610 हेक्टेयर 218018
उत्पादन में वृद्धि रकबा बढ़ने का कारण
जिले में गन्ना उत्पादन बढ़ने और अधिक लाभ मिलने से किसानों का मोह गन्ने की खेती की तरफ बढ़ा है। गन्ना ऐसी फसल है, जिस पर सर्दी-गर्मी, बरसात, बाढ़ का अधिक प्रभाव नहीं पड़ता। किसान इसे सुरक्षित फसल मानता है। यही कारण है कि किसानों का रुझान लगातार गन्ने की खेती की ओर बढ़ रहा है।
चीनी मिलों पर 569 करोड़ बकाया
मुजफ्फरनगर जिले की चीनी मिलों पर किसानों का 569 करोड़ बकाया है। इसमें अकेली भैसाना चीनी मिल पर आधे से अधिक 339 करोड़ बाकी है। पांच चीनी मिले 90 प्रतिशत से अधिक भुगतान कर चुकी हैं। चीनी मिलों में किसानों ने इस सत्र में 3246 करोड़ 23 लाख दस हजार का गन्ना डाला है। चीनी मिले किसानों को अब तक 2677 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं। जिले की खतौली चीनी मिल 94.09 प्रतिशत भुगतान कर चुकी है। तितावी 91.97 प्रतिशत, मंसूरपुर 91.78 प्रतिशत, टिकौला 97.67 प्रतिशत, रोहाना 95.86 प्रतिशत भुगतान कर चुकी है। खाईखेडी ने 87.25 प्रतिशत और मोरना ने 64.94 प्रतिशत भुगतान किया है। भैसाना चीनी मिल ही ऐसी मिल है जो अब तक केवल 24 प्रतिशत भुगतान कर पाई है।
मिल किसानों का कुल पैसा बकाया
खतौली: 760 करोड़- 45 करोड़
तितावी: 537 करोड़- 43 करोड़
भैसाना: 447 करोड़- 339 करोड़
मंसूरपुर: 466 करोड़- 38 करोड़
टिकौला: 551 करोड़- 13 करोड़
खाईखेडी: 207 करोड़- 26 करोड़
रोहाना: 107 करोड़- चार करोड़
मोरना: 168 करोड़- 59 करोड़
इस बार 13281 हेक्टेयर जमीन पर हो रही धान की खेती
राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस बार जिले में लगभग 13281 हेक्टेयर जमीन में धान की खेती हो रही है। 5360 हेक्टेयर जमीन में बाग, 831 हेक्टेयर में फूल व सब्जी व अन्य में औषधीय एवं मसालों की खेती होती है। गेहूं का क्षेत्रफल तो यहां 60 से 70 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। सिखेड़ा के किसान राहुल का कहना है कि धान की खेती में लागत ज्यादा है। खेत पर रात को रहकर जंगली पशुओं से रखवाली करनी पड़ती है। मेहनत भी वसूल नहीं होती। बेहड़ा थ्रू के किसान पुष्पेंद्र ने बताया कि धान की खेती में मेहनत अधिक है। धान में कई बार दवाइयों का छिड़काव करना पड़ता है।
मुजफ्फरनगर जनपद में धान का क्षेत्रफल धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष धान का क्षेत्रफल कुछ बढ़ने की उम्मीद है। धान की कम पैदावार होने का कारण गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ा है। - पवन कुमार विश्वकर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी