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अमर उजाला अपनत्व : कोरोना ने बच्चों से मां का आंचल भी छीना
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अमर उजाला अपनत्व : कोरोना ने बच्चों से मां का आंचल भी छीना
मुजफ्फरनगर/ भोपा। वैश्विक महामारी कोरोना का कहर कई परिवारों के सदस्यों को जिंदगीभर नहीं भरने वाला जख्म दे गया है। इस समय हालात काफी विषम है। कई परिवारों से बातचीत करने पर यह सामने आया कि बच्चों के भरण पोषण के लिए काफी मुसीबतें झेलनी पड़ रही है। इसी कड़ी में सुजडू गांव के चार मासूम भी अनाथ हो गए। पिता का साया पहले ही इनके सिर से उठ गया था, अब कोरोना संक्रमण ने मां का आंचल भी छीन लिया है। चारों बच्चों की जिम्मेदारी अब उनके वृद्ध नाना-नानी पर आ गई है। वे चार बच्चों को सुजडू से लेकर अपने पास गांव मोरना ले आए हैं।
सुजडू निवासी चार बच्चों के पिता विनोद की कुछ साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उस वक्त विनोद अपने पीछे तीन मासूम बेटी और एक बेटे को छोड़ गया था। चारों बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी विनोद की पत्नी संगीता पर आ गई थी। संगीता अपने चारों बच्चों का पालन-पोषण सिलाई व कढ़ाई का कार्य कर रही थी। चारों बच्चों पर दुखों का एक और बड़ा पहाड़ उस समय टूट गया, जब मां संगीता की कोरोना संक्रमण से पांच मई को मौत हो गई। पहले पिता और फिर कोरोना संक्रमण से मां की मौत के बाद अब चारों बहन-भाई निशा (14) ,वर्षिका (13), वंशिका (12), कार्तिक (11) अनाथ हो गए। मां-बाप की मौत होने के बाद चारों बच्चे सुजडू स्थित मकान का ताला लगाकर गांव मोरना निवासी नाना-नानी महेंद्र सिंह व उर्मिला के पास रह रहे हैं। नाना-नानी के वृद्ध होने के कारण यहां भी उन्हें अपने जीवन यापन की चिंता सता रही है। बच्चों के नाना नानी का कहना है कि बेटी और दामाद की मौत ने उन्हें तोड़ कर रख दिया है। अब चारों बच्चों के पालन पोषण की चिंता भी सता रही है। वह बच्चों के पालन पोषण के लिए दिन-रात मजदूरी कार्य कर रहे हैं, इसके बाद भी यह संभव नहीं है कि वह उन्हें पढ़ा लिखा सकें।
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मुजफ्फरनगर/ भोपा। वैश्विक महामारी कोरोना का कहर कई परिवारों के सदस्यों को जिंदगीभर नहीं भरने वाला जख्म दे गया है। इस समय हालात काफी विषम है। कई परिवारों से बातचीत करने पर यह सामने आया कि बच्चों के भरण पोषण के लिए काफी मुसीबतें झेलनी पड़ रही है। इसी कड़ी में सुजडू गांव के चार मासूम भी अनाथ हो गए। पिता का साया पहले ही इनके सिर से उठ गया था, अब कोरोना संक्रमण ने मां का आंचल भी छीन लिया है। चारों बच्चों की जिम्मेदारी अब उनके वृद्ध नाना-नानी पर आ गई है। वे चार बच्चों को सुजडू से लेकर अपने पास गांव मोरना ले आए हैं।
सुजडू निवासी चार बच्चों के पिता विनोद की कुछ साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उस वक्त विनोद अपने पीछे तीन मासूम बेटी और एक बेटे को छोड़ गया था। चारों बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी विनोद की पत्नी संगीता पर आ गई थी। संगीता अपने चारों बच्चों का पालन-पोषण सिलाई व कढ़ाई का कार्य कर रही थी। चारों बच्चों पर दुखों का एक और बड़ा पहाड़ उस समय टूट गया, जब मां संगीता की कोरोना संक्रमण से पांच मई को मौत हो गई। पहले पिता और फिर कोरोना संक्रमण से मां की मौत के बाद अब चारों बहन-भाई निशा (14) ,वर्षिका (13), वंशिका (12), कार्तिक (11) अनाथ हो गए। मां-बाप की मौत होने के बाद चारों बच्चे सुजडू स्थित मकान का ताला लगाकर गांव मोरना निवासी नाना-नानी महेंद्र सिंह व उर्मिला के पास रह रहे हैं। नाना-नानी के वृद्ध होने के कारण यहां भी उन्हें अपने जीवन यापन की चिंता सता रही है। बच्चों के नाना नानी का कहना है कि बेटी और दामाद की मौत ने उन्हें तोड़ कर रख दिया है। अब चारों बच्चों के पालन पोषण की चिंता भी सता रही है। वह बच्चों के पालन पोषण के लिए दिन-रात मजदूरी कार्य कर रहे हैं, इसके बाद भी यह संभव नहीं है कि वह उन्हें पढ़ा लिखा सकें।
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