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पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता जरूरी

Mon, 22 Apr 2013 05:30 AM IST
Muzaffar nagar
Muzaffar nagar Updated Mon, 22 Apr 2013 05:30 AM IST
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मुजफ्फरनगर। आइए, पृथ्वी को बचाने के लिए अपना एक कदम आगे बढ़ाएं। ग्लोबल वार्मिंग, वर्षा चक्र बदलने और वायु मंडल में बढ़ती गरमी और गैसाें के उत्सर्जन से पृथ्वी के जीवन पर संकट का घेरा है। जनसंख्या वृद्धि से जिले में हरा भरा वन क्षेत्र घट रहा है। हिंडन, काली और कृष्णी नदियाें में प्रदूषण और पेड़ पौधों के संरक्षण की कमी चिंताजनक है।
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जनमानस में अभी भी ‘वर्ल्ड अर्थ डे’ को लेकर जागरूकता का अभाव है। शिक्षण संस्थाआें में अवश्य बच्चाें में पृथ्वी को बचाने के संदेश पर आधारित कार्यक्रम किए जाते हैं। मुजफ्फरनगर और शामली क्षेत्र में बहती हिंडन, काली और कृष्णी नदियां प्रदूषित पानी का नाला बन चुकी है। इनके किनारे का पेयजल स्रोत पीने योग्य नहीं रहा है। हाल ही में राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकाें की टीम ने वेस्ट यूपी के 75 गांव के पानी के नमूने लिए। इनकी जांच में पता चला कि प्रदूषित पेयजल पीने से कई गांव में हेपेटाइटिस, पीलिया, त्वचा, कैंसर रोगी बढ़ रहे है।
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शासन के कडे़ रुख के बाद भी पॉलीथिन का प्रयोग प्रकृति संरक्षण के लिए हानिकारक बना हुआ है। वहीं, मोरना, पुरकाजी, जानसठ, बुढ़ाना को छोड़कर जिले के अन्य ब्लाक में वन क्षेत्र घटा है। हालांकि केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र घोषित होने से शुक्रताल, रामराज और गंगा खादर क्षेत्र में प्रकृति का दोहन कम हुआ है। शामली क्षेत्र में यमुना में अवैध खनन से प्राकृतिक खतरे के संकेत हैं।
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कैसे बचाएं धरती
* खेती में रसायनाें का प्रयोग कम करें।
* ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण किया जाए।
* शुक्रताल हरित क्षेत्र का संरक्षण किया जाए।
* अवैध खनन प्रकृति के लिए घातक है।
* पेड़ पौधों का कटान बंद करें।
* हर घर में एक वृक्ष लगाने का संकल्प लें।
* बिजली बचत करने की आदत डालें।
* वन्य एवं जल जीव जंतुआें को बचाएं।

तालाबाें पर न हो अवैध कब्जे : डीएम
तालाब, पोखर और कुएं पर अवैध कब्जा भी प्रकृति और धरती की रक्षा में संकट का सबब बना हुआ है। शासन के निर्देश पर जिले में प्रशासन ने कार्रवाई कर गांव में तालाब से अवैध कब्जे हटाए हैं। डीएम सुरेंद्र सिंह का कहना है कि प्रशासन ने हर तहसील क्षेत्र में अवैध कब्जाें को बड़ी संख्या में हटवाया है।
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