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श्रीमद् भागवत कथा श्रवण बिना जीवन व्यर्थ:साक्षी
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:05 AM IST
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भागवत कथा श्रवण बिना जीवन व्यर्थ
मुजफ्फरनगर। इस्कॉन प्रचार समिति की ओर से नई मंडी के मेहता क्लब में भागवत कथा की अमृत वर्षा की। साक्षी गोपाल महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन पाकर भी यदि किसी ने कथा का श्रवण नहीं किया तो उसका जीवन व्यर्थ है।
उन्होंने कहा कि जीवन में भक्ति आती है तो फिर धन ना छिन जाए, मृत्यु और भविष्य में क्या होगा, की चिंता नहीं रहती। भक्ति रानी जीव को कहती है कि संसार में भगवान कृष्ण के अलावा तेरा कुछ भी नहीं। सब एक दिन छूट जाता है। 84 लाख योनियों के बाद जीवात्मा को मनुष्य जन्म मिलता है, तब भी जीवन को प्रभु चरणों में नहीं लगाया तो सब व्यर्थ है। भवसागर से पार भगवान की कथा ही लगा सकती है। संसार सागर में कष्ट ही कष्ट है। सिर्फ भगवान की शरणगति से ही भगवान की कथा जीव के अंदर जाती है, जिससे जीवन बदल जाता है।
देवता भी भगवान की भक्ति को तरसते है। सर्वोत्तम कार्य भगवान की भक्ति ही है। वह जीव को भगवान की कृपा से ही मिलती है। इस दौरान रघुराज गर्ग, शंकर स्वरुप, कुशपुरी, पंकज अग्रवाल, कुलवंत काकन, जगेश कपूर, मनीष कपूर, मनोज खंडेलवाल, रमेश मिश्रा, राकेश जैन, मनमोहन जैन, मुकुल, मोहन, आकाश, समकित जैन आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। इस्कॉन प्रचार समिति की ओर से नई मंडी के मेहता क्लब में भागवत कथा की अमृत वर्षा की। साक्षी गोपाल महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन पाकर भी यदि किसी ने कथा का श्रवण नहीं किया तो उसका जीवन व्यर्थ है।
उन्होंने कहा कि जीवन में भक्ति आती है तो फिर धन ना छिन जाए, मृत्यु और भविष्य में क्या होगा, की चिंता नहीं रहती। भक्ति रानी जीव को कहती है कि संसार में भगवान कृष्ण के अलावा तेरा कुछ भी नहीं। सब एक दिन छूट जाता है। 84 लाख योनियों के बाद जीवात्मा को मनुष्य जन्म मिलता है, तब भी जीवन को प्रभु चरणों में नहीं लगाया तो सब व्यर्थ है। भवसागर से पार भगवान की कथा ही लगा सकती है। संसार सागर में कष्ट ही कष्ट है। सिर्फ भगवान की शरणगति से ही भगवान की कथा जीव के अंदर जाती है, जिससे जीवन बदल जाता है।
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देवता भी भगवान की भक्ति को तरसते है। सर्वोत्तम कार्य भगवान की भक्ति ही है। वह जीव को भगवान की कृपा से ही मिलती है। इस दौरान रघुराज गर्ग, शंकर स्वरुप, कुशपुरी, पंकज अग्रवाल, कुलवंत काकन, जगेश कपूर, मनीष कपूर, मनोज खंडेलवाल, रमेश मिश्रा, राकेश जैन, मनमोहन जैन, मुकुल, मोहन, आकाश, समकित जैन आदि मौजूद रहे।
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