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अमर उजाला ने पहले ही चेताया था रेलवे को
Updated Sun, 20 Aug 2017 02:12 AM IST
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अमर उजाला ने पहले ही चेताया था रेलवे को
मुजफ्फरनगर। खतौली और सकौती क्षेत्र के बीच रेलवे लाइन पर करीब सात किलोमीटर का टुकड़ा मयाद पूरी कर चुका है। यहां ट्रैक की हालत लगातार ट्रेनों के संचालन की नहीं रही हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन इससे पूरी तरह अनजान बना रहा। जिसका नतीजा शनिवार को उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद सामने आया।
अमर उजाला ने 12 अगस्त के अंक में प्रमुखता से ‘कमजोर ट्रैक पर दौड़ रहीं ट्रेनें’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसके माध्यम से खतौली में लगातार क्रैक हो रहे ट्रैक और उसके कारणों को दर्शाया गया। खतौली और सकौती के बीच सात किलोमीटर तक रेलवे लाइन का टुकड़ा बेहद कमजोर हो गया है। इस दूरी में रेलवे प्रशासन द्वारा अनेक बार मरम्मत कर ज्वाइंट, नट-बोल्ट कसे गए हैं। खतौली के तिलक नगर, नई तहसील के साथ सफेदा फाटक के निकट लगातार ट्रैक क्रैक होने की घटनाएं सामने आई थी। हालांकि रेलवे प्रशासन खुद स्वीकार कर चुका है कि यहां रेलवे ट्रैक कमजोर है। जिसे बदलने की प्रक्रिया शुरू करने को प्रपोजल मांगा गया है। घटना से सात दिन पूर्व अमर उजाला ने रेलवे को चेताया था, मगर बावजूद इसके कमजोर ट्रैक से ही स्पीड में ट्रेनों को निकाला जा रहा था। जिसके चलते शनिवार को भयावह हादसा सामने आया है।
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मुजफ्फरनगर। खतौली और सकौती क्षेत्र के बीच रेलवे लाइन पर करीब सात किलोमीटर का टुकड़ा मयाद पूरी कर चुका है। यहां ट्रैक की हालत लगातार ट्रेनों के संचालन की नहीं रही हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन इससे पूरी तरह अनजान बना रहा। जिसका नतीजा शनिवार को उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद सामने आया।
अमर उजाला ने 12 अगस्त के अंक में प्रमुखता से ‘कमजोर ट्रैक पर दौड़ रहीं ट्रेनें’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसके माध्यम से खतौली में लगातार क्रैक हो रहे ट्रैक और उसके कारणों को दर्शाया गया। खतौली और सकौती के बीच सात किलोमीटर तक रेलवे लाइन का टुकड़ा बेहद कमजोर हो गया है। इस दूरी में रेलवे प्रशासन द्वारा अनेक बार मरम्मत कर ज्वाइंट, नट-बोल्ट कसे गए हैं। खतौली के तिलक नगर, नई तहसील के साथ सफेदा फाटक के निकट लगातार ट्रैक क्रैक होने की घटनाएं सामने आई थी। हालांकि रेलवे प्रशासन खुद स्वीकार कर चुका है कि यहां रेलवे ट्रैक कमजोर है। जिसे बदलने की प्रक्रिया शुरू करने को प्रपोजल मांगा गया है। घटना से सात दिन पूर्व अमर उजाला ने रेलवे को चेताया था, मगर बावजूद इसके कमजोर ट्रैक से ही स्पीड में ट्रेनों को निकाला जा रहा था। जिसके चलते शनिवार को भयावह हादसा सामने आया है।
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