{"_id":"5b82fd2742c79246344b2e48","slug":"61535311143-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संस्कृत दिवस पर विशेष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संस्कृत दिवस पर विशेष
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश में संस्कृत की अलख जगा रहे विद्यार्थी
मोरना (मुजफ्फरनगर)। ऋषि-मुनियों ने संस्कृत भाषा से वेद और शास्त्रों की रचना की। श्रावणी पर्व अर्थात रक्षा बंधन को संस्कृत दिवस भी मनाया जाता है। शुकतीर्थ जीर्णोद्धारक वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने वर्ष 1960 में देववाणी संस्कृत से विद्यार्थियों को जोड़ने की पहल की थी। श्री शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय शुक्रताल में संस्कृत भाषा में विद्वता हासिल कर बच्चे देश में संस्कृत की अलख जगा रहे हैं। कोई भागवत प्रवक्ता, तो कोई धार्मिक शिक्षक का दायित्व निभा रहा है।
भारतीय वैदिक संस्कृति की जीवंत भाषा संस्कृत के संवद्र्धन को भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में 58 साल पहले शुरुआत हो गई थी। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याणदेव द्वारा स्थापित शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय में शिक्षार्थियों की आवासीय व्यवस्था है, जिसमें 120 ब्रहमचारी अध्यनरत हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद से संबद्ध इस विद्यालय का लोकार्पण नेपाल के तत्कालीन राजदूत यदुनाथ झा ने किया था। 14 जुलाई, 2010 को तत्कालीन राज्यपाल बीएल जोशी ने संस्कृत विद्यालय के नए भवन का उद्घाटन किया था। संस्था में विद्यार्थियों को ध्यान, प्राणायाम और यज्ञ में प्रशिक्षित कर वेदों का स्वाध्याय, भागवत पाठ, दर्शनशास्त्र, व्याकरण, साहित्य और हिंदी आदि विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। कक्षा छह से 12 तक की संस्कृत शिक्षा को देश के कई प्रांतों से विद्यार्थी शुकतीर्थ आते हैं। मध्यप्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, यूपी, मिजोरम, असोम और नेपाल के बच्चे यहां संस्कृत की साधना में जुटे हैं। आचार्य गिरीशचंद उप्रेती बताते हैं कि संस्कृत भाषा में प्रवीण विद्यार्थी देश सेवा में जुटे हैं, जिनमें से कई सेना में धार्मिक शिक्षा की और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों के केंद्रीय विद्यालयों में संस्कृत शिक्षक हैं।
संस्कृत भाषा में उज्ज्वल भविष्य: ज्ञान प्रसाद
शुक्रताल। शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य ज्ञान प्रसाद जुलाई वर्ष 1981 में नेपाल से शुक्रताल आए थे। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याणदेव की प्रेरणा से हजारों विद्यार्थियों को संस्कृत की शिक्षा दी। वर्ष 2010 में उन्हें प्रधानाचार्य का दायित्व मिला। वह बताते हैं कि संस्कृत साहित्य के अलावा हिंदी और अंग्रेजी की शिक्षा भी विद्यालय में दी जाती है। चार कंप्यूटर भी लगाए गए हैं, ताकि बच्चे समय की दृष्टि से निपुण बने। संस्कृत भाषा में बच्चों का भविष्य उज्ज्वल है। कई संस्कृत विद्यार्थी राज्य स्तर पर पुरस्कृत हो चुके हैं।
विज्ञापन
देववाणी संस्कृत से ही भारत की संस्कृति अखंड है। संसार में संस्कृत जितनी कोई समृद्ध भाषा नहीं है। श्रावणी पूर्णिमा को ऋषि पर्व और संस्कृत दिवस के रुप में मनाया जाता है। गुरुदेव स्वामी कल्याणदेव ने शुक्रताल, कुरुक्षेत्र, हस्तिानापुर आदि में कई संस्कृत विद्यालयों की स्थापना की थी। विश्व में संस्कृत भाषा के प्रति विशेष रुझान बढ़ रहा है। यहां से पढ़ाई के बाद विद्यार्थी पीएचडी, नेट तक की उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
स्वामी ओमानंद सरस्वती, पीठाधीश्वर, भागवत पीठ शुकदेव आश्रम, शुक्रताल।
गुरुकुल बना संस्कृत शिक्षा का केंद्र
मोरना। गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय शुक्रताल भी संस्कृत शिक्षा का केंद्र है। स्वामी आनंदवेश महाराज ने वर्ष 1974 में गुरुकुल की स्थापना की। कक्षा छह से 12वीं तक की शिक्षा के साथ, शास्त्री और आचार्य की पढ़ाई भी कराई जा रही है। प्रधानाचार्य प्रेम शंकर मिश्रा ने बताया कि आवासीय विद्यालय में देशभर के सैकड़ों बच्चे अध्ययनरत हैं। व्यायाम, योगाभ्यास, हवन, संध्या का प्रतिदिन नियम है। ग्रेजुएशन के लिए वर्ष 2013 में संस्था को संपूर्णानंद संस्कृत महाविद्यालय वाराणसी से संबद्ध कराया गया है। मिश्रा कहते हैं कि संस्कृत के शब्द, व्याकरण, उच्चारण, श्लोकों का समवेत सस्वर पाठ भी कराया जाता है।
विज्ञापन
मोरना (मुजफ्फरनगर)। ऋषि-मुनियों ने संस्कृत भाषा से वेद और शास्त्रों की रचना की। श्रावणी पर्व अर्थात रक्षा बंधन को संस्कृत दिवस भी मनाया जाता है। शुकतीर्थ जीर्णोद्धारक वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने वर्ष 1960 में देववाणी संस्कृत से विद्यार्थियों को जोड़ने की पहल की थी। श्री शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय शुक्रताल में संस्कृत भाषा में विद्वता हासिल कर बच्चे देश में संस्कृत की अलख जगा रहे हैं। कोई भागवत प्रवक्ता, तो कोई धार्मिक शिक्षक का दायित्व निभा रहा है।
भारतीय वैदिक संस्कृति की जीवंत भाषा संस्कृत के संवद्र्धन को भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में 58 साल पहले शुरुआत हो गई थी। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याणदेव द्वारा स्थापित शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय में शिक्षार्थियों की आवासीय व्यवस्था है, जिसमें 120 ब्रहमचारी अध्यनरत हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद से संबद्ध इस विद्यालय का लोकार्पण नेपाल के तत्कालीन राजदूत यदुनाथ झा ने किया था। 14 जुलाई, 2010 को तत्कालीन राज्यपाल बीएल जोशी ने संस्कृत विद्यालय के नए भवन का उद्घाटन किया था। संस्था में विद्यार्थियों को ध्यान, प्राणायाम और यज्ञ में प्रशिक्षित कर वेदों का स्वाध्याय, भागवत पाठ, दर्शनशास्त्र, व्याकरण, साहित्य और हिंदी आदि विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। कक्षा छह से 12 तक की संस्कृत शिक्षा को देश के कई प्रांतों से विद्यार्थी शुकतीर्थ आते हैं। मध्यप्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, यूपी, मिजोरम, असोम और नेपाल के बच्चे यहां संस्कृत की साधना में जुटे हैं। आचार्य गिरीशचंद उप्रेती बताते हैं कि संस्कृत भाषा में प्रवीण विद्यार्थी देश सेवा में जुटे हैं, जिनमें से कई सेना में धार्मिक शिक्षा की और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों के केंद्रीय विद्यालयों में संस्कृत शिक्षक हैं।
विज्ञापन
संस्कृत भाषा में उज्ज्वल भविष्य: ज्ञान प्रसाद
शुक्रताल। शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य ज्ञान प्रसाद जुलाई वर्ष 1981 में नेपाल से शुक्रताल आए थे। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याणदेव की प्रेरणा से हजारों विद्यार्थियों को संस्कृत की शिक्षा दी। वर्ष 2010 में उन्हें प्रधानाचार्य का दायित्व मिला। वह बताते हैं कि संस्कृत साहित्य के अलावा हिंदी और अंग्रेजी की शिक्षा भी विद्यालय में दी जाती है। चार कंप्यूटर भी लगाए गए हैं, ताकि बच्चे समय की दृष्टि से निपुण बने। संस्कृत भाषा में बच्चों का भविष्य उज्ज्वल है। कई संस्कृत विद्यार्थी राज्य स्तर पर पुरस्कृत हो चुके हैं।
विज्ञापन
देववाणी संस्कृत से ही भारत की संस्कृति अखंड है। संसार में संस्कृत जितनी कोई समृद्ध भाषा नहीं है। श्रावणी पूर्णिमा को ऋषि पर्व और संस्कृत दिवस के रुप में मनाया जाता है। गुरुदेव स्वामी कल्याणदेव ने शुक्रताल, कुरुक्षेत्र, हस्तिानापुर आदि में कई संस्कृत विद्यालयों की स्थापना की थी। विश्व में संस्कृत भाषा के प्रति विशेष रुझान बढ़ रहा है। यहां से पढ़ाई के बाद विद्यार्थी पीएचडी, नेट तक की उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
स्वामी ओमानंद सरस्वती, पीठाधीश्वर, भागवत पीठ शुकदेव आश्रम, शुक्रताल।
गुरुकुल बना संस्कृत शिक्षा का केंद्र
मोरना। गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय शुक्रताल भी संस्कृत शिक्षा का केंद्र है। स्वामी आनंदवेश महाराज ने वर्ष 1974 में गुरुकुल की स्थापना की। कक्षा छह से 12वीं तक की शिक्षा के साथ, शास्त्री और आचार्य की पढ़ाई भी कराई जा रही है। प्रधानाचार्य प्रेम शंकर मिश्रा ने बताया कि आवासीय विद्यालय में देशभर के सैकड़ों बच्चे अध्ययनरत हैं। व्यायाम, योगाभ्यास, हवन, संध्या का प्रतिदिन नियम है। ग्रेजुएशन के लिए वर्ष 2013 में संस्था को संपूर्णानंद संस्कृत महाविद्यालय वाराणसी से संबद्ध कराया गया है। मिश्रा कहते हैं कि संस्कृत के शब्द, व्याकरण, उच्चारण, श्लोकों का समवेत सस्वर पाठ भी कराया जाता है।