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दलितों को लेकर जिले में राजनीति गरमाई
Updated Thu, 05 Apr 2018 12:56 AM IST
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दलितों को लेकर जिले में राजनीति गरमाई
मुजफ्फरनगर।
दलितों के भारत बंद के बाद जिले में राजनीति गरमा गई है। पीस पार्टी के बाद कांग्रेस भी खुलकर दलितों के समर्थन में उतर आई है। बसपा प्रारंभ से ही दलितों के साथ है। ऐसे में भाजपा नो कमेंट की स्थिति में पहुंच गई है।
भारत बंद के दौरान शहर में हुए उपद्रव और उसमें एक दलित युवक की गोली लगने से मौत हो जाने के बाद से जनपद की राजनीति गरम हो गई है। प्रशासन ने जिस तरह उपद्रव में शामिल युवकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की तो विरोध के स्वर भी उबरने लगे हैं। बसपा जहां चुप है और पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही है, वहीं पीस पार्टी और कांग्रेस खुलकर दलितों के समर्थन में उतर गई है। दोनो पार्टियों ने बवाल के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। पीस पार्टी जहां दलितों की मांग को जायज बता रही है, वहीं कांग्रेस ने डीएम को ज्ञापन देकर मृतक और घायल दलितों को मुआवजा देने की मांग की है। कांग्रेस ने जिला प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है और बवाल के लिए जिम्मेदार ठहराया है। ऐसे हालात में भाजपा असमंजस में है। भाजपा के नेताओं ने पहले दिन तो अफसरों के साथ बैठक ली, उसके बाद वह परिदृश्य से गायब हो गये। भाजपा अब किसी भी प्रतिक्रिया से बच रही है। गिरफ्तारियों को लेकर भी राजनीति जोर पकड़ रही है।
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मुजफ्फरनगर।
दलितों के भारत बंद के बाद जिले में राजनीति गरमा गई है। पीस पार्टी के बाद कांग्रेस भी खुलकर दलितों के समर्थन में उतर आई है। बसपा प्रारंभ से ही दलितों के साथ है। ऐसे में भाजपा नो कमेंट की स्थिति में पहुंच गई है।
भारत बंद के दौरान शहर में हुए उपद्रव और उसमें एक दलित युवक की गोली लगने से मौत हो जाने के बाद से जनपद की राजनीति गरम हो गई है। प्रशासन ने जिस तरह उपद्रव में शामिल युवकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की तो विरोध के स्वर भी उबरने लगे हैं। बसपा जहां चुप है और पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही है, वहीं पीस पार्टी और कांग्रेस खुलकर दलितों के समर्थन में उतर गई है। दोनो पार्टियों ने बवाल के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। पीस पार्टी जहां दलितों की मांग को जायज बता रही है, वहीं कांग्रेस ने डीएम को ज्ञापन देकर मृतक और घायल दलितों को मुआवजा देने की मांग की है। कांग्रेस ने जिला प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है और बवाल के लिए जिम्मेदार ठहराया है। ऐसे हालात में भाजपा असमंजस में है। भाजपा के नेताओं ने पहले दिन तो अफसरों के साथ बैठक ली, उसके बाद वह परिदृश्य से गायब हो गये। भाजपा अब किसी भी प्रतिक्रिया से बच रही है। गिरफ्तारियों को लेकर भी राजनीति जोर पकड़ रही है।
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