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राष्ट्र का गौरव होते हैं संस्कारित बच्चे: आर्य
Updated Wed, 31 Jan 2018 11:28 PM IST
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राष्ट्र का गौरव होते हैं संस्कारित बच्चे : आर्य
मुजफ्फरनगर। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि जीवन में कर्मों का फल अवश्य मिलता है। शुभ कर्म के लिए तत्पर रहें। पुण्य की प्राप्ति के लिए मन, वचन और कर्म से सत्य व्यवहार करना चाहिए। छल, कपट, द्वेष, अन्याय, अत्याचार, पाखंड और अविद्या से बचें। संस्कारित बच्चे परिवार और राष्ट्र का गौरव होते हैं।
ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल लालूखेड़ी में इंटर के विद्यार्थियों के लिए विशेष आशीर्वाद यज्ञ का आयोजन हुुआ। यज्ञ शिरोमणि आचार्य गुरुदत्त आर्य ने विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति जागरूकता और उनको माता-पिता तथा समाज के प्रति आदर्श संस्कारों का कतर्व्यबोध कराया। आचार्य ने कहा कि जीवन में आचरण ही परम धर्म है। धर्म की कसौटी आस्था, विश्वास नहीं आचरण है। सत्य के लिए संघर्ष में जीत मिलती है। आचरण की पवित्रता व्यक्ति में सद्गुणों की ऊर्जा बढ़ाती है। सत्य और सदाचार के मार्ग में ही जीवन आनंद, शांति और आत्मिक सुख की प्राप्ति कर सकता है। उन्होंने कहा कि सत्य, सद आचरण, त्याग, अनुशासन, देशभक्ति और सद्गुणों को धारण करना वैदिक संस्कृति के गुण हैं। ज्ञान की प्राप्ति से जीवन सुखमय बनता है। यज्ञ संस्कृति से परिवार जुड़ें, ताकि भावी पीढ़ी में संस्कार बढ़ें। यज्ञ और योग से जीवन निरोगी और मन पवित्र बनता है। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने शिक्षाप्रद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। वाणी गौड़ ने मार्मिक गीत सुनाया। विद्यालय निदेशक पीके निर्वाल ने छात्र-छात्राओं को उनको भविष्यपथ पर सतत दृढ़ निश्चयी होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एकलव्य, अर्जुन और गुरुभक्त आरुणि के उदाहरण देकर विद्यार्थियों को आशीर्वाद दिया। प्रधानाचार्य मेघराज सिंह और प्रशासनिक अधिकारी अर्जुन निर्वाल ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में वे शुद्ध आचरण व दृढ़ संकल्प के साथ अपना लक्ष्य प्राप्त कर अपनेो विद्यालय एवं अपने माता-पिता का नाम रोशन कर सकते हैं।
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मुजफ्फरनगर। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि जीवन में कर्मों का फल अवश्य मिलता है। शुभ कर्म के लिए तत्पर रहें। पुण्य की प्राप्ति के लिए मन, वचन और कर्म से सत्य व्यवहार करना चाहिए। छल, कपट, द्वेष, अन्याय, अत्याचार, पाखंड और अविद्या से बचें। संस्कारित बच्चे परिवार और राष्ट्र का गौरव होते हैं।
ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल लालूखेड़ी में इंटर के विद्यार्थियों के लिए विशेष आशीर्वाद यज्ञ का आयोजन हुुआ। यज्ञ शिरोमणि आचार्य गुरुदत्त आर्य ने विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति जागरूकता और उनको माता-पिता तथा समाज के प्रति आदर्श संस्कारों का कतर्व्यबोध कराया। आचार्य ने कहा कि जीवन में आचरण ही परम धर्म है। धर्म की कसौटी आस्था, विश्वास नहीं आचरण है। सत्य के लिए संघर्ष में जीत मिलती है। आचरण की पवित्रता व्यक्ति में सद्गुणों की ऊर्जा बढ़ाती है। सत्य और सदाचार के मार्ग में ही जीवन आनंद, शांति और आत्मिक सुख की प्राप्ति कर सकता है। उन्होंने कहा कि सत्य, सद आचरण, त्याग, अनुशासन, देशभक्ति और सद्गुणों को धारण करना वैदिक संस्कृति के गुण हैं। ज्ञान की प्राप्ति से जीवन सुखमय बनता है। यज्ञ संस्कृति से परिवार जुड़ें, ताकि भावी पीढ़ी में संस्कार बढ़ें। यज्ञ और योग से जीवन निरोगी और मन पवित्र बनता है। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने शिक्षाप्रद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। वाणी गौड़ ने मार्मिक गीत सुनाया। विद्यालय निदेशक पीके निर्वाल ने छात्र-छात्राओं को उनको भविष्यपथ पर सतत दृढ़ निश्चयी होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एकलव्य, अर्जुन और गुरुभक्त आरुणि के उदाहरण देकर विद्यार्थियों को आशीर्वाद दिया। प्रधानाचार्य मेघराज सिंह और प्रशासनिक अधिकारी अर्जुन निर्वाल ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में वे शुद्ध आचरण व दृढ़ संकल्प के साथ अपना लक्ष्य प्राप्त कर अपनेो विद्यालय एवं अपने माता-पिता का नाम रोशन कर सकते हैं।
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