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मातृशक्ति के सम्मान से बढ़ेगी गरिमा: ओमानंद
Updated Sat, 17 Mar 2018 12:28 AM IST
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मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की मातृ शक्ति ने विद्या और आध्यात्मिक बल से विश्व में श्रेष्ठता सिद्ध की है। नारी के मान-सम्मान से समाज और राष्ट्र की गरिमा बढ़ती है।
शुकदेव आश्रम में कथा व्यास साध्वी प्रेम कंवर मीराबाई की भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत व्यक्ति को भक्ति के उच्च शिखर पर ले जाती है। हृदय में भक्ति का स्थायी भाव पैदा होता है। भागवत के आध्यात्मिक ज्ञान से प्राणी भव सागर से मुक्त हो जाता है। भारतीय मातृ शक्ति ने विद्या और आध्यात्मिक बल से विश्व की नारी की तुलना में श्रेष्ठता साबित की है। संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक ज्ञान की समृद्धि में मातृ शक्ति की सेवाएं अद्वितीय हैं। जीवन के हर क्षेत्र में बेटियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। बेटियों में आत्मविश्वास और स्वाभिमान का भाव पैदा करें। शिक्षित नारी परिवार और राष्ट्र की धरोहर बनती हैं। कथा व्यास प्रेम कंवर ने कहा कि श्रद्धाभाव से भक्ति, समर्पण और सेवा का सौभाग्य मिलता है। इससे पूर्व राजस्थान के झालावाड़ से आए यज्ञमान राकेश मेहरा ने विधि-विधान से पूजन किया। भागवत भक्तों ने शुकदेव आश्रम में भागवत पोथी यात्रा निकाली।
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शुकदेव आश्रम में कथा व्यास साध्वी प्रेम कंवर मीराबाई की भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत व्यक्ति को भक्ति के उच्च शिखर पर ले जाती है। हृदय में भक्ति का स्थायी भाव पैदा होता है। भागवत के आध्यात्मिक ज्ञान से प्राणी भव सागर से मुक्त हो जाता है। भारतीय मातृ शक्ति ने विद्या और आध्यात्मिक बल से विश्व की नारी की तुलना में श्रेष्ठता साबित की है। संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक ज्ञान की समृद्धि में मातृ शक्ति की सेवाएं अद्वितीय हैं। जीवन के हर क्षेत्र में बेटियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। बेटियों में आत्मविश्वास और स्वाभिमान का भाव पैदा करें। शिक्षित नारी परिवार और राष्ट्र की धरोहर बनती हैं। कथा व्यास प्रेम कंवर ने कहा कि श्रद्धाभाव से भक्ति, समर्पण और सेवा का सौभाग्य मिलता है। इससे पूर्व राजस्थान के झालावाड़ से आए यज्ञमान राकेश मेहरा ने विधि-विधान से पूजन किया। भागवत भक्तों ने शुकदेव आश्रम में भागवत पोथी यात्रा निकाली।
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