{"_id":"5b352ef44f1c1bb16e8ba688","slug":"21530212084-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देश को जोड़ने का नाम है शायरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देश को जोड़ने का नाम है शायरी
Updated Fri, 29 Jun 2018 12:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश को जोड़ने का नाम है शायरी
मुजफ्फरनगर। मुशायरे में जनता की वाहवाही लूटने वाले शायर हाशिम फिरोजाबादी ऐसे शायर हैं, जो श्रृंगार और देशभक्ति के कलाम एक साथ पढते हैं। हाशिम कहते हैं कि देश को जोड़ने का नाम ही शायरी है। शायर सच कहे, लेकिन उसका उद्देश्य राष्ट्रप्रेम होना चाहिए। सच सुनना सबको अच्छा लगता है।
मुशायरे में शामिल होने आए हाशिम फिरोजाबादी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्हें युवा सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। वह कॉलेजों एवं अन्य संस्थाओं में आयोजित कार्यक्रमों में अधिक भाग लेते हैं। हाशिम ऐसे शायर हैं, जिन्हें मुशायरों और कवि सम्मेलन दोनों में बुलाया जाता है। हाशिम और उनकी पत्नी सबा बलरामपुरी ऐसी जोड़ी है, जो देश के बड़े मंचों पर एक साथ अपनी प्रस्तुति देते हैं। देश में इस समय दूसरा कोई ऐसा युगल नहीं है, जो एक साथ मंच पर बुलाया जा रहा है। हाशिम कहते हैं कि वैसे वह श्रृंगार रस के शायर हैं, लेकिन उनकी शायरी में राष्ट्र प्रेम सर्वोच्च है। एक शायर का काम समाज को जोड़ने का है। शायरी में बिना देशभक्ति के निरर्थक हैं। वह बताते हैं कि उनका सबसे मन पसंद शेर है- तेरे गुरूर को एक दिन जरूर तोडूंगा, तु आफताब सही, पर बुझाके छोडूंगा। मै अपने मुल्क की अमनो सलामती के लिए, हर एक हिंदू-मुसलमान को मिलाके छोडूंगा। पाकिस्तान को छोड़कर वह अधिकतम मुस्लिम देशों में अपने कलाम पेश कर चुके हैं। कक्षा 12 से 1995 वें में उन्होंने शायरी की शुरुआत की। 25 साल से लगातार वह मुशायरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। इस बीच उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पोस्ट गे्रजुएट किया। उनकी पत्नी सबा बलरामपुरी क्रिश्चियन कॉलेज लखनऊ में प्रवक्ता हैं। हाशिम का कहना है कि वह जब तक शायरी करेंगे लोगों को जोडऩे का काम करेंगे। ऊपर वाले से दुआ करेंगे कि देश को किसी की नजर ना लगे।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। मुशायरे में जनता की वाहवाही लूटने वाले शायर हाशिम फिरोजाबादी ऐसे शायर हैं, जो श्रृंगार और देशभक्ति के कलाम एक साथ पढते हैं। हाशिम कहते हैं कि देश को जोड़ने का नाम ही शायरी है। शायर सच कहे, लेकिन उसका उद्देश्य राष्ट्रप्रेम होना चाहिए। सच सुनना सबको अच्छा लगता है।
मुशायरे में शामिल होने आए हाशिम फिरोजाबादी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्हें युवा सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। वह कॉलेजों एवं अन्य संस्थाओं में आयोजित कार्यक्रमों में अधिक भाग लेते हैं। हाशिम ऐसे शायर हैं, जिन्हें मुशायरों और कवि सम्मेलन दोनों में बुलाया जाता है। हाशिम और उनकी पत्नी सबा बलरामपुरी ऐसी जोड़ी है, जो देश के बड़े मंचों पर एक साथ अपनी प्रस्तुति देते हैं। देश में इस समय दूसरा कोई ऐसा युगल नहीं है, जो एक साथ मंच पर बुलाया जा रहा है। हाशिम कहते हैं कि वैसे वह श्रृंगार रस के शायर हैं, लेकिन उनकी शायरी में राष्ट्र प्रेम सर्वोच्च है। एक शायर का काम समाज को जोड़ने का है। शायरी में बिना देशभक्ति के निरर्थक हैं। वह बताते हैं कि उनका सबसे मन पसंद शेर है- तेरे गुरूर को एक दिन जरूर तोडूंगा, तु आफताब सही, पर बुझाके छोडूंगा। मै अपने मुल्क की अमनो सलामती के लिए, हर एक हिंदू-मुसलमान को मिलाके छोडूंगा। पाकिस्तान को छोड़कर वह अधिकतम मुस्लिम देशों में अपने कलाम पेश कर चुके हैं। कक्षा 12 से 1995 वें में उन्होंने शायरी की शुरुआत की। 25 साल से लगातार वह मुशायरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। इस बीच उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पोस्ट गे्रजुएट किया। उनकी पत्नी सबा बलरामपुरी क्रिश्चियन कॉलेज लखनऊ में प्रवक्ता हैं। हाशिम का कहना है कि वह जब तक शायरी करेंगे लोगों को जोडऩे का काम करेंगे। ऊपर वाले से दुआ करेंगे कि देश को किसी की नजर ना लगे।
विज्ञापन