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ओपीडी में नहीं मिलते चिकित्सक, सहायक देखते हैं मरीज
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ओपीडी में नहीं मिलते चिकित्सक, सहायक देखते हैं मरीज
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग का हाल बुरा है। नेत्र विशेषज्ञ ओपीडी में नहीं मिलते। अस्पताल में आने वाले मरीज उनके इंतजार में बैठे रहते हैं। मजबूरन उन्हें डाक्टर कक्ष में बैठने वाले दृष्टिमितिज्ञ या नेत्र सहायक से ही परामर्श लेना होता है।
स्वामी कल्याणदेव जिला चिकित्सालय के नेत्र रोग विभाग में प्रतिदिन 200 से 250 तक मरीज आते हैं। मंगलवार सुबह दस बजे अमर उजाला टीम नेत्र विभाग में पहुंची। पाया कि डाक्टर के कमरे में बाहर मरीजों की लाइन लगती जा रही है, लेकिन डाक्टर कक्ष में नहीं हैं। मरीज इंतजार करते रहे। परेशान होकर कक्ष में बैठे दृष्टिमितिज्ञ और नेत्र सहायक से डाक्टर के बारे में जानकारी करते हैं, लेकिन वे भी गोलमाल जवाब देते हैं। काफी इंतजार के बाद भी जब डाक्टर ओपीडी कक्ष में नहीं बैठते, तो मरीज दृष्टिमितिज्ञ और नेत्र सहायक से ही परामर्श लेने पहुंच जाते हैं। कुछ मरीज तो ऐसे मिले, जो नेत्र सहायक को ही डाक्टर समझ बैठे। आंखों में मोतियाबिंद की जांच कराने आए मुस्तकीम ने बताया कि वह पहले भी दो बार दवा लेने आ चुके हैं, लेकिन कक्ष में डाक्टर नहीं मिले। उनके कक्ष में बैठने वाले सहायक से ही दवा लिखवाकर ले गए। संतोष देवी, अमरीश और शकीला भी यही बात दोहराते हैं। कहते हैं कि वे तो कक्ष में बैठे व्यक्ति को ही डाक्टर समझते हैं। उन्हें क्या मालूम कि वह नेत्र रोग विशेषज्ञ है या नेत्र सहायक।
एक ही विशेषज्ञ, वहीं रहते हैं ऑपरेशन में
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. पंकज अग्रवाल का कहना है कि अस्पताल में केवल एक ही नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. अरविंद गर्ग की तैनाती है। रोजाना ऑपरेशन होते हैं। वह ऑपरेशन में रहते हैं। इसलिए ओपीडी में नेत्र सहायक मरीजों को देखते हैं। उन्होंने बताया कि एक मात्र नेत्र रोग विशेषज्ञ के सहारे किसी तरह व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग का हाल बुरा है। नेत्र विशेषज्ञ ओपीडी में नहीं मिलते। अस्पताल में आने वाले मरीज उनके इंतजार में बैठे रहते हैं। मजबूरन उन्हें डाक्टर कक्ष में बैठने वाले दृष्टिमितिज्ञ या नेत्र सहायक से ही परामर्श लेना होता है।
स्वामी कल्याणदेव जिला चिकित्सालय के नेत्र रोग विभाग में प्रतिदिन 200 से 250 तक मरीज आते हैं। मंगलवार सुबह दस बजे अमर उजाला टीम नेत्र विभाग में पहुंची। पाया कि डाक्टर के कमरे में बाहर मरीजों की लाइन लगती जा रही है, लेकिन डाक्टर कक्ष में नहीं हैं। मरीज इंतजार करते रहे। परेशान होकर कक्ष में बैठे दृष्टिमितिज्ञ और नेत्र सहायक से डाक्टर के बारे में जानकारी करते हैं, लेकिन वे भी गोलमाल जवाब देते हैं। काफी इंतजार के बाद भी जब डाक्टर ओपीडी कक्ष में नहीं बैठते, तो मरीज दृष्टिमितिज्ञ और नेत्र सहायक से ही परामर्श लेने पहुंच जाते हैं। कुछ मरीज तो ऐसे मिले, जो नेत्र सहायक को ही डाक्टर समझ बैठे। आंखों में मोतियाबिंद की जांच कराने आए मुस्तकीम ने बताया कि वह पहले भी दो बार दवा लेने आ चुके हैं, लेकिन कक्ष में डाक्टर नहीं मिले। उनके कक्ष में बैठने वाले सहायक से ही दवा लिखवाकर ले गए। संतोष देवी, अमरीश और शकीला भी यही बात दोहराते हैं। कहते हैं कि वे तो कक्ष में बैठे व्यक्ति को ही डाक्टर समझते हैं। उन्हें क्या मालूम कि वह नेत्र रोग विशेषज्ञ है या नेत्र सहायक।
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एक ही विशेषज्ञ, वहीं रहते हैं ऑपरेशन में
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. पंकज अग्रवाल का कहना है कि अस्पताल में केवल एक ही नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. अरविंद गर्ग की तैनाती है। रोजाना ऑपरेशन होते हैं। वह ऑपरेशन में रहते हैं। इसलिए ओपीडी में नेत्र सहायक मरीजों को देखते हैं। उन्होंने बताया कि एक मात्र नेत्र रोग विशेषज्ञ के सहारे किसी तरह व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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