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गालिबपुर में शिया सोगवारों ने मातमी जुलूस निकाला
Updated Mon, 17 Sep 2018 12:01 AM IST
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खतौली। मोहर्रम की पांचवीं तारीख को गांव गालिबपुर में मातमी जुलूस निकाला गया। जिसमें शिया सोगवारों ने इमाम हुसैन को याद कर मातमपुर्सी की।
रविवार को गांव गालिबपुर में सैय्यद खैरात अली के आवास पर आयोजित मजलिस में मौलाना नैय्यर रजा नकवी ने कहा कि इमाम हुसैन ने इंसानियत को जिंदा रखने के लिए करबला में शहादत दी। इमाम हुसैन के सामने दुनिया के बादशाह छोटे हैं। करबला के वाकयात सुनकर शिया सोगवारों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद मातमी जुलूस निकाला गया, जो गांव के मुख्य मार्गो से होता हुआ इमामबाड़ा पहुंच कर खत्म हुआ। इसमें अंजुमन फरोगे अजा महलका के सोगवार शामिल थे। मरसियाख्वानी अमीर अब्बास उर्फ छुग्गन मियां ने की। शहजाद हुसैन, अमीर अब्बास, चांद मियां, हसन जाहिद, जुगनू, हसीन हैदर, बाबर अली, हुसैन जाहिद आदि ने मातमपुर्सी कर इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश की।
इमामबाड़ा मामले को लेकर पुलिस बल तैनात रहा
गांव गालिबपुर में इमामबाड़ा सगीर हसन को लेकर विगत कई वर्षों से विवाद चला आ रहा है। जिसको लेकर पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों की बैठक लेकर मुहर्रम को शांति पूवर्क संपन्न कराने की अपील की। शिया समाज के लोगों ने बताया कि पांचवीं तारीख को निकाला गया मातमी जुलूस विवादित इमामबाड़ा पर नहीं जाने तथा मोहर्रम की दसवीं तारीख को इसी इमामबाड़ा से ताजिया उठाने पर सहमति बनी है। जिसे दोनों पक्षों ने माना है।
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रविवार को गांव गालिबपुर में सैय्यद खैरात अली के आवास पर आयोजित मजलिस में मौलाना नैय्यर रजा नकवी ने कहा कि इमाम हुसैन ने इंसानियत को जिंदा रखने के लिए करबला में शहादत दी। इमाम हुसैन के सामने दुनिया के बादशाह छोटे हैं। करबला के वाकयात सुनकर शिया सोगवारों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद मातमी जुलूस निकाला गया, जो गांव के मुख्य मार्गो से होता हुआ इमामबाड़ा पहुंच कर खत्म हुआ। इसमें अंजुमन फरोगे अजा महलका के सोगवार शामिल थे। मरसियाख्वानी अमीर अब्बास उर्फ छुग्गन मियां ने की। शहजाद हुसैन, अमीर अब्बास, चांद मियां, हसन जाहिद, जुगनू, हसीन हैदर, बाबर अली, हुसैन जाहिद आदि ने मातमपुर्सी कर इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश की।
इमामबाड़ा मामले को लेकर पुलिस बल तैनात रहा
गांव गालिबपुर में इमामबाड़ा सगीर हसन को लेकर विगत कई वर्षों से विवाद चला आ रहा है। जिसको लेकर पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों की बैठक लेकर मुहर्रम को शांति पूवर्क संपन्न कराने की अपील की। शिया समाज के लोगों ने बताया कि पांचवीं तारीख को निकाला गया मातमी जुलूस विवादित इमामबाड़ा पर नहीं जाने तथा मोहर्रम की दसवीं तारीख को इसी इमामबाड़ा से ताजिया उठाने पर सहमति बनी है। जिसे दोनों पक्षों ने माना है।
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