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परचियां नहीं मिलने से किसानों में आक्रोश
Updated Sun, 25 Mar 2018 12:28 AM IST
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पर्चियां नहीं मिलने से किसानों में आक्रोश
चरथावल।
इस बार मिल मालिकों की हठधर्मिता के चलते समय से पर्चियां नहीं मिलने से किसानों में आक्रोश है। आरोप है कि सामान्य प्रजाति की पर्चियां नहीं आने से खेतों में गन्ने की फसल सूखने के कगार पर है और अगले सत्र के लिए बुआई में विलंब हो रहा है।
शनिवार को किसान सेवा सहकारी समिति के सभापति कुबेर दत्त त्यागी के आवास पर किसानों की बैठक में वक्ताओं ने मिल प्रबंधन के खिलाफ भड़ास निकाली। किसान विजेंद्र त्यागी ने कहा कि गन्ना आयुक्त के फरमान के बाद खेतों में गन्ने का सर्वे नहीं किया जा रहा है। खेत खाली करने के कारण किसानों को बिचौलियों को 250 रुपये में गन्ना बेचना पड़ रहा है। सवाल यह है कि बिचौलियों को कहां से पर्चियां उपलब्ध हो रही है। आरोप है कि समिति और तौल क्लर्क की साठगांठ कर उन्हें पर्चियां मुहैया कराई जा रही है। किसान उन्हें मंदे दामों पर गन्ना देना पड़ता है, जिसमें घटतौली की आशंका भी बनी रहती है। महाबलीपुर के संचालक वेदप्रकाश ने कहा कि पर्चियां नहीं मिलने से कोल्हुओं पर गन्ने को सस्ते दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। सुनील दत्त त्यागी ने पूछा कि सरकार में किसान के अच्छे दिन कब आएंगें? केंद्रों पर गन्ना खरीद की अनिश्चितता के कारण किसानों की छिला गन्ना खेतों में सूखता है। तीन दिन में एक बार तौल होता है, वहां से गन्ना नहीं उठने के कारण तौल बंद कर दिया जाता है। छोटी काश्त के किसानों को मिलों के रवैये से भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है। दिनेश त्यागी ने कहा कि नियमित तौल नहीं होने से गन्ना बुआई नहीं हो पा रही है। इस बार पिछले साल की अपेक्षा काफी तादात में गन्ना खेतों में खड़ा है। किसानों का कहना था कि मिल मालिक अपने फायदे के चक्कर में सिर्फ अगेती प्रजाति का गन्ना खरीदने में रुचि ले रहे हैं। भुगतान भी समय से नहीं मिलने से तमाम कार्य में बाधा आ रही है। किसानों ने डीएम से खेतों में गन्ना रहने तक नियमित तौल कराने की मांग की है।
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चरथावल।
इस बार मिल मालिकों की हठधर्मिता के चलते समय से पर्चियां नहीं मिलने से किसानों में आक्रोश है। आरोप है कि सामान्य प्रजाति की पर्चियां नहीं आने से खेतों में गन्ने की फसल सूखने के कगार पर है और अगले सत्र के लिए बुआई में विलंब हो रहा है।
शनिवार को किसान सेवा सहकारी समिति के सभापति कुबेर दत्त त्यागी के आवास पर किसानों की बैठक में वक्ताओं ने मिल प्रबंधन के खिलाफ भड़ास निकाली। किसान विजेंद्र त्यागी ने कहा कि गन्ना आयुक्त के फरमान के बाद खेतों में गन्ने का सर्वे नहीं किया जा रहा है। खेत खाली करने के कारण किसानों को बिचौलियों को 250 रुपये में गन्ना बेचना पड़ रहा है। सवाल यह है कि बिचौलियों को कहां से पर्चियां उपलब्ध हो रही है। आरोप है कि समिति और तौल क्लर्क की साठगांठ कर उन्हें पर्चियां मुहैया कराई जा रही है। किसान उन्हें मंदे दामों पर गन्ना देना पड़ता है, जिसमें घटतौली की आशंका भी बनी रहती है। महाबलीपुर के संचालक वेदप्रकाश ने कहा कि पर्चियां नहीं मिलने से कोल्हुओं पर गन्ने को सस्ते दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। सुनील दत्त त्यागी ने पूछा कि सरकार में किसान के अच्छे दिन कब आएंगें? केंद्रों पर गन्ना खरीद की अनिश्चितता के कारण किसानों की छिला गन्ना खेतों में सूखता है। तीन दिन में एक बार तौल होता है, वहां से गन्ना नहीं उठने के कारण तौल बंद कर दिया जाता है। छोटी काश्त के किसानों को मिलों के रवैये से भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है। दिनेश त्यागी ने कहा कि नियमित तौल नहीं होने से गन्ना बुआई नहीं हो पा रही है। इस बार पिछले साल की अपेक्षा काफी तादात में गन्ना खेतों में खड़ा है। किसानों का कहना था कि मिल मालिक अपने फायदे के चक्कर में सिर्फ अगेती प्रजाति का गन्ना खरीदने में रुचि ले रहे हैं। भुगतान भी समय से नहीं मिलने से तमाम कार्य में बाधा आ रही है। किसानों ने डीएम से खेतों में गन्ना रहने तक नियमित तौल कराने की मांग की है।
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