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जिसने भी भगवान की परीक्षा ली,
Updated Sun, 03 Sep 2017 12:04 AM IST
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भगवान की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए : विजय कौशल
खतौली(मुजफ्फरनगर)। श्रीराम कथा में अमृत वर्षा करते हुए कथा व्यास विजय कौशल जी महाराज ने माता सती चरित्र का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान की परीक्षा नहीं ली जाती। जिसने भी भगवान की परीक्षा ली, उसका विनाश हुआ। इसलिए भगवान की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।
शनिवार को केके जैन एजूकेशन सभास्थल में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन अमृत वर्षा करते हुए कथा व्यास विजय कौशल महाराज ने कहा कि कथा सुनने का फल तभी प्राप्त होता है, जब उसे पति और पत्नी दोनों ही सुने। केवल एक के सुनने से वो फल प्राप्त नहीं होता है। भगवान शिव ने माता सती से कहा कि इनको प्रणाम करो। माता सती चूंकि शंका में थी वह उनको साधारण मनुष्य ही समझ रही थी। इसलिए सती ने प्रणाम नहीं किया, जिससे भगवान शिव नाराज हुए। सती की जिद के आगे भगवान शंकर जी ने मन ही मन सती जी का त्याग कर दिया। उन्होंने कहा कि जो भी विधि के विपरीत गया, उसका सर्वनाश निश्चित है। विधि से तात्पर्य है विधान, तरीका, तौर तरीके बदलिए। घर से जाने का समय बदलिए, घर में आने का समय बदलिए। खान पान का तरीका बदलिए, रहन सहन का तरीका बदलिए। माता सती ने भगवान राम की परीक्षा लेने के लिए माता सीता का रूप धारण कर लिया और उनके सामने पहुंच गई। भगवान राम ने माता सती को हाथ जोड़ कर प्रणाम कर लिया और कहा माता मैं राजा दशरथ पुत्र राम आपको प्रणाम करता हूं। महाराज जी ने कहा कि जब मनुष्य को शारीरिक कष्ट होता है, तो मां को याद करता है और जब मानसिक कष्ट होता है तो पिता को याद करता है। भगवान राम की परीक्षा लेने के उपरांत माता सती भगवान शंकर के पास आती हैं।
भगवान शंकर माता सती की आंखें देखकर समझ जाते हैं कि सती ने सीता का रूप धारण कर प्रभु की परीक्षा ली है। इन्होंने मेरी मां का रूप धारण किया है। अब मैं इन्हें पत्नी रूप में कैसे स्वीकार करूं। इसलिए भगवान शंकर माता सती का त्याग कर देते हैं। कथा में मुख्य रूप से समिति अध्यक्ष दीपक बंसल, सचिव ज्योति मोहन गोयल, कोषाध्यक्ष मदन छाबड़ा, सुधीर गोयल, प्रधानाचार्य संजीव शर्मा, प्रशांत अग्रवाल, मीनाक्षी बंसल, कमल लोचन, विशाल लोचन, धर्मेंद्र शर्मा, सचिव शर्मा, सुधीर शर्मा, श्रीचंद शर्मा, डोली बंसल, अतुल अग्रवाल, पवन अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, अमित बंसल, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, विनीत ठाकुर, अक्षयजीत सहरावत, आलोक गोयल, अनिल धारीवाल, नरेश नागपाल आदि उपस्थित रहे।
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खतौली(मुजफ्फरनगर)। श्रीराम कथा में अमृत वर्षा करते हुए कथा व्यास विजय कौशल जी महाराज ने माता सती चरित्र का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान की परीक्षा नहीं ली जाती। जिसने भी भगवान की परीक्षा ली, उसका विनाश हुआ। इसलिए भगवान की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।
शनिवार को केके जैन एजूकेशन सभास्थल में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन अमृत वर्षा करते हुए कथा व्यास विजय कौशल महाराज ने कहा कि कथा सुनने का फल तभी प्राप्त होता है, जब उसे पति और पत्नी दोनों ही सुने। केवल एक के सुनने से वो फल प्राप्त नहीं होता है। भगवान शिव ने माता सती से कहा कि इनको प्रणाम करो। माता सती चूंकि शंका में थी वह उनको साधारण मनुष्य ही समझ रही थी। इसलिए सती ने प्रणाम नहीं किया, जिससे भगवान शिव नाराज हुए। सती की जिद के आगे भगवान शंकर जी ने मन ही मन सती जी का त्याग कर दिया। उन्होंने कहा कि जो भी विधि के विपरीत गया, उसका सर्वनाश निश्चित है। विधि से तात्पर्य है विधान, तरीका, तौर तरीके बदलिए। घर से जाने का समय बदलिए, घर में आने का समय बदलिए। खान पान का तरीका बदलिए, रहन सहन का तरीका बदलिए। माता सती ने भगवान राम की परीक्षा लेने के लिए माता सीता का रूप धारण कर लिया और उनके सामने पहुंच गई। भगवान राम ने माता सती को हाथ जोड़ कर प्रणाम कर लिया और कहा माता मैं राजा दशरथ पुत्र राम आपको प्रणाम करता हूं। महाराज जी ने कहा कि जब मनुष्य को शारीरिक कष्ट होता है, तो मां को याद करता है और जब मानसिक कष्ट होता है तो पिता को याद करता है। भगवान राम की परीक्षा लेने के उपरांत माता सती भगवान शंकर के पास आती हैं।
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भगवान शंकर माता सती की आंखें देखकर समझ जाते हैं कि सती ने सीता का रूप धारण कर प्रभु की परीक्षा ली है। इन्होंने मेरी मां का रूप धारण किया है। अब मैं इन्हें पत्नी रूप में कैसे स्वीकार करूं। इसलिए भगवान शंकर माता सती का त्याग कर देते हैं। कथा में मुख्य रूप से समिति अध्यक्ष दीपक बंसल, सचिव ज्योति मोहन गोयल, कोषाध्यक्ष मदन छाबड़ा, सुधीर गोयल, प्रधानाचार्य संजीव शर्मा, प्रशांत अग्रवाल, मीनाक्षी बंसल, कमल लोचन, विशाल लोचन, धर्मेंद्र शर्मा, सचिव शर्मा, सुधीर शर्मा, श्रीचंद शर्मा, डोली बंसल, अतुल अग्रवाल, पवन अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, अमित बंसल, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, विनीत ठाकुर, अक्षयजीत सहरावत, आलोक गोयल, अनिल धारीवाल, नरेश नागपाल आदि उपस्थित रहे।
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