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18 बाल श्रमिक मुक्त कराए, श्रम विभाग की टीम का भट्ठों, जूस की दुकानों पर छापे
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 14 Apr 2017 12:47 AM IST
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श्रम विभाग द्वारा मुक्त कराए गए बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
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श्रम विभाग और एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग यूनिट की टीम ने बृहस्पतिवार को जिले में भट्ठों, ढाबों और जूस की दुकानों पर छापेमारी कर 18 बाल श्रमिक मुक्त कराए। सभी बच्चों का मेडिकल कराकर बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया।
सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के श्रम प्रवर्तन अधिकारी सत्यवीर सिंह एवं केके मिश्रा और एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग यूनिट के उधमसिंह एवं अन्य पुलिस कर्मियों की टीम ने जिले भर के भट्टों पर छापामारी की। छापेमारी में विभिन्न भट्ठों पर 11 बाल श्रमिक मिले। इन सभी बच्चों को मुक्त कराया गया।
इसी के साथ ही शहर एवं मुख्य मार्गो पर चल रहे ढाबों और जूस की दुकानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में सात बच्चों को मुक्त कराया गया। सहायक श्रमायुक्त अनिल सिंह ने बताया कि जिन प्रतिष्ठानों पर बच्चे कार्य करते पाए गए हैं, उनके मालिकों पर 20 हजार का जुर्माना तत्काल किया गया है।
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मामला सीजेएम की अदालत में जाएगा। अदालत से 50 हजार तक का जुर्माना और छह माह की सजा तक हो सकती है। दिनभर श्रम विभाग के अधिकारियों की कार्रवाई से उन लोगों में हड़कंप मचा रहा जो बच्चों से काम कराते हैं। मुक्त कराए गए बाल श्रमिकों का चिकित्सा परीक्षण कराकर बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया।
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सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के श्रम प्रवर्तन अधिकारी सत्यवीर सिंह एवं केके मिश्रा और एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग यूनिट के उधमसिंह एवं अन्य पुलिस कर्मियों की टीम ने जिले भर के भट्टों पर छापामारी की। छापेमारी में विभिन्न भट्ठों पर 11 बाल श्रमिक मिले। इन सभी बच्चों को मुक्त कराया गया।
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इसी के साथ ही शहर एवं मुख्य मार्गो पर चल रहे ढाबों और जूस की दुकानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में सात बच्चों को मुक्त कराया गया। सहायक श्रमायुक्त अनिल सिंह ने बताया कि जिन प्रतिष्ठानों पर बच्चे कार्य करते पाए गए हैं, उनके मालिकों पर 20 हजार का जुर्माना तत्काल किया गया है।
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मामला सीजेएम की अदालत में जाएगा। अदालत से 50 हजार तक का जुर्माना और छह माह की सजा तक हो सकती है। दिनभर श्रम विभाग के अधिकारियों की कार्रवाई से उन लोगों में हड़कंप मचा रहा जो बच्चों से काम कराते हैं। मुक्त कराए गए बाल श्रमिकों का चिकित्सा परीक्षण कराकर बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया।