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त्याग से ही इंसान महान बनता है: ज्ञान सागर
Updated Mon, 04 Sep 2017 12:32 AM IST
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त्याग से ही इंसान महान बनता है: ज्ञान सागर
मुजफ्फरनगर। आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि पर्यूषण पर्व का उत्तम त्याग धर्म है। त्याग से ही इंसान महान बनता है। प्रकृति भी त्याग का संदेश देती है। प्रकृति निस्वार्थ मनुष्य को अनेक चीजें उपलब्ध कराती है। सम्यक दृष्टि के लिए हमेशा सतयुग है, जबकि लोभी कपटी के लिए तो कलियुग है।
आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि पहले की माता कहती थी, मंदिर में कोई दिखे तो उसे भोजन के लिए लेकर आना। त्याग तो अपने विकारों का परिणाम है। एक होता है जो दूसरों को खिलाकर खाता है और एक स्वयं का ही देखता है। दान वह है जो समय से दे, प्रिय वचन देकर दे और निस्वार्थ दें। दान देकर अभिमान करना, पश्चाताप करना यह दान का दूषण है। दान देने से संपत्ति घटती नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान बाहुबली ने त्याग का मार्ग अपनाया और सर्वस्व पा लिया। हम दुनिया को प्रेमी, मैत्री और त्याग से जीत सकते हैं, मात्र शस्त्र से कभी नहीं जीता जा सकता है। उन्होंने कहा कि पेड़ों पर जब मीठे फल लग जाते हैं, तो वह निर्लोभ होकर उनका त्याग कर देते हैं। इस दौरान उत्तम त्याग पावन पर्व पर लघु नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसमें वीणा जैन, सोनिया जैन, नीलम जैन, शीला जैन, रविंद्र जैन, दीपाली जैन, आशीष जैन ने बेहतर नाटिका प्रस्तुत की।
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मुजफ्फरनगर। आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि पर्यूषण पर्व का उत्तम त्याग धर्म है। त्याग से ही इंसान महान बनता है। प्रकृति भी त्याग का संदेश देती है। प्रकृति निस्वार्थ मनुष्य को अनेक चीजें उपलब्ध कराती है। सम्यक दृष्टि के लिए हमेशा सतयुग है, जबकि लोभी कपटी के लिए तो कलियुग है।
आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि पहले की माता कहती थी, मंदिर में कोई दिखे तो उसे भोजन के लिए लेकर आना। त्याग तो अपने विकारों का परिणाम है। एक होता है जो दूसरों को खिलाकर खाता है और एक स्वयं का ही देखता है। दान वह है जो समय से दे, प्रिय वचन देकर दे और निस्वार्थ दें। दान देकर अभिमान करना, पश्चाताप करना यह दान का दूषण है। दान देने से संपत्ति घटती नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान बाहुबली ने त्याग का मार्ग अपनाया और सर्वस्व पा लिया। हम दुनिया को प्रेमी, मैत्री और त्याग से जीत सकते हैं, मात्र शस्त्र से कभी नहीं जीता जा सकता है। उन्होंने कहा कि पेड़ों पर जब मीठे फल लग जाते हैं, तो वह निर्लोभ होकर उनका त्याग कर देते हैं। इस दौरान उत्तम त्याग पावन पर्व पर लघु नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसमें वीणा जैन, सोनिया जैन, नीलम जैन, शीला जैन, रविंद्र जैन, दीपाली जैन, आशीष जैन ने बेहतर नाटिका प्रस्तुत की।
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