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क्षेत्रीय निर्माण तकनीक और सामग्री की विशेषता बताई
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वास्तुकला की भूमिका को विस्तार से बताया
मुजफ्फरनगर। श्रीराम स्कूल ऑफ ऑर्किटेक्चर में चल रहे नेशनल एसोसिएशन स्टूडेंट ऑफ आर्किटेक्चर (नासा) की कार्यशाला के अंतिम दिन आर्किटेक्ट की बेसिक थ्योरी को समझने पर जोर दिया गया। विभिन्न क्षेत्रों की निर्माण तकनीक और उपलब्ध सामग्री की जानकारी दी गई।
रविवार को दो दिवसीय कार्यशाला के आखिरी दिन सिग्नीफिकेंस ऑफ थ्योरीटिकल स्टेंड इन आर्किटेक्चर विषय पर समूह चर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता आईईटी रोपड़ (पंजाब) के सह प्राध्यापक ऑर्किटेक्ट एवं नासा के पूर्व उपाध्यक्ष गुरप्रीत सिंह रहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान के प्रतिस्पर्धा वाले युग में अधिकतर ऑर्किटेक्ट्स आर्किटेक्चर की बेसिक थ्योरी पर ध्यान न देते हुए कामर्शियल प्रैक्टिस की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति एवं जलवायु की वास्तुकला में भूमिका को विस्तार से बताया। क्षेत्रीय निर्माण तकनीक एवं उपलब्ध सामग्री की उपयोगिता एवं गुणों की जानकारी दी। श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के चेयरमैन डा. एससी कुलश्रेष्ठ ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम ऑर्किटेक्चर एजुकेशन को नए एवं ऊंचे आयाम देने के लिए बेहतर माध्यम हैं। श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक डा. डीकेपी सिंह, आर्किटेक्ट विनय सिंह, अश्वनी कल्याणी, विभोर, अली आलम और रोहित कुमार आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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मुजफ्फरनगर। श्रीराम स्कूल ऑफ ऑर्किटेक्चर में चल रहे नेशनल एसोसिएशन स्टूडेंट ऑफ आर्किटेक्चर (नासा) की कार्यशाला के अंतिम दिन आर्किटेक्ट की बेसिक थ्योरी को समझने पर जोर दिया गया। विभिन्न क्षेत्रों की निर्माण तकनीक और उपलब्ध सामग्री की जानकारी दी गई।
रविवार को दो दिवसीय कार्यशाला के आखिरी दिन सिग्नीफिकेंस ऑफ थ्योरीटिकल स्टेंड इन आर्किटेक्चर विषय पर समूह चर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता आईईटी रोपड़ (पंजाब) के सह प्राध्यापक ऑर्किटेक्ट एवं नासा के पूर्व उपाध्यक्ष गुरप्रीत सिंह रहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान के प्रतिस्पर्धा वाले युग में अधिकतर ऑर्किटेक्ट्स आर्किटेक्चर की बेसिक थ्योरी पर ध्यान न देते हुए कामर्शियल प्रैक्टिस की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति एवं जलवायु की वास्तुकला में भूमिका को विस्तार से बताया। क्षेत्रीय निर्माण तकनीक एवं उपलब्ध सामग्री की उपयोगिता एवं गुणों की जानकारी दी। श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के चेयरमैन डा. एससी कुलश्रेष्ठ ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम ऑर्किटेक्चर एजुकेशन को नए एवं ऊंचे आयाम देने के लिए बेहतर माध्यम हैं। श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक डा. डीकेपी सिंह, आर्किटेक्ट विनय सिंह, अश्वनी कल्याणी, विभोर, अली आलम और रोहित कुमार आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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