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प्रशासन व नेताओं को याद नहीं आए शहीद
Updated Thu, 27 Jul 2017 12:30 AM IST
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खतौली। भाकियू जिलाध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं के साथ गांव फुलत पहुंच कर कारगिल शहीद सतीश कुमार की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान राजू अहलावत ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी तथा प्रदेश सरकार में बैठे जनप्रतिनिधियों को देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों की कोई याद नहीं आई। विजय दिवस पर कारगिल शहीद सतीश कुमार के स्मारक पर प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा नहीं पहुंचा है। प्रशासनिक अधिकारी सरकार की आवभगत में लगे है। प्रदेश तथा केंद्र सरकार को जवान और किसान से कोई संबंध नहीं है। कारगिल शहीद के पिता धर्मपाल ने बताया कि उन्होंने अपने पुत्र को देश के नाम कर दिया, मगर देश उनकी कोई सहायता नहीं कर रहा है। शहीद स्मारक पर वह स्वयं हवन तथा सफाई कराते हैं। बेटे के शहीद होने के करीब तीन वर्ष तक उन्हें सहायता राशि मिलती रही। इसके बाद उसे भी बंद कर दिया गया। 21 फरवरी 2005 को शहीद स्मारक के निकट शहीद वाटिका के लिए 410 मीटर जमीन आवंटित की गई थी। जिसमें आज तक कोई कार्य नहीं कराया गया है। जिस पर भाकियू जिलाध्यक्ष ने डीएम से वार्ता कर शहीद के पिता को सहायता राशि दिलवाए जाने तथा शहीद वाटिका का निर्माण कराए जाने का आश्वासन दिया।
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इस दौरान राजू अहलावत ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी तथा प्रदेश सरकार में बैठे जनप्रतिनिधियों को देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों की कोई याद नहीं आई। विजय दिवस पर कारगिल शहीद सतीश कुमार के स्मारक पर प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा नहीं पहुंचा है। प्रशासनिक अधिकारी सरकार की आवभगत में लगे है। प्रदेश तथा केंद्र सरकार को जवान और किसान से कोई संबंध नहीं है। कारगिल शहीद के पिता धर्मपाल ने बताया कि उन्होंने अपने पुत्र को देश के नाम कर दिया, मगर देश उनकी कोई सहायता नहीं कर रहा है। शहीद स्मारक पर वह स्वयं हवन तथा सफाई कराते हैं। बेटे के शहीद होने के करीब तीन वर्ष तक उन्हें सहायता राशि मिलती रही। इसके बाद उसे भी बंद कर दिया गया। 21 फरवरी 2005 को शहीद स्मारक के निकट शहीद वाटिका के लिए 410 मीटर जमीन आवंटित की गई थी। जिसमें आज तक कोई कार्य नहीं कराया गया है। जिस पर भाकियू जिलाध्यक्ष ने डीएम से वार्ता कर शहीद के पिता को सहायता राशि दिलवाए जाने तथा शहीद वाटिका का निर्माण कराए जाने का आश्वासन दिया।