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जीत के लिए सियासी दलों ने चला हर दांव
Updated Fri, 24 Nov 2017 11:54 PM IST
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मुजफ्फरनगर।
नगर निकाय चुनाव में प्रचार का शोर शुक्रवार शाम थम गया। नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए मैदान में खड़े प्रत्याशियों ने अपनी जीत के लिए समीकरण बैठाने का हर दांव खेल दिया है। भाजपा के अनुकूल माहौल में पार्टी जीत चाहती है, जबकि कांग्रेस, सपा और बसपा ने भी अपनी जीत के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।
नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए प्रमुख दलों के चार प्रत्याशी मैदान में हैं। पहली बार मुजफ्फरनगर पालिका को महिला के लिए आरक्षित किया गया है। भाजपा प्रत्याशी सुधा राज शर्मा की जीत के लिए भाजपा के महारथियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। संसदीय और विधानसभा चुनाव में जैसी जीत पार्टी को मिली, उसी तर्ज पर पालिका चुनाव में कमल की फतह के लिए रणनीति बनाई गई है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान और शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल दिनभर संगठन को दुरुस्त करने में जुटे रहे। उद्यमियों, व्यापारियों और पार्टी के परंपरागत वोटबैंक को एकजुट करने की कवायद की गई।
प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक मिथलेश पाल की जीत के लिए पार्टी ने मुस्लिम नेताओं को शहर में उतार दिया है। कैराना विधायक नाहिद हसन, नजीबाबाद विधायक हाजी तस्लीम और मेरठ के पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद ने पार्टी की जीत के लिए मुस्लिमों को साधने का व्यूह तैयार किया। पार्टी नेताओं ने अहसास कराया कि मुस्लिमों का हित और सम्मान सपा में ही सुरक्षित है। मुस्लिम नेताओं ने शहर की कई बस्तियों में सभाएं की।
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कांग्रेस पालिका चुनाव में अपनी जीत को दोबारा बरकरार रखने के लिए जुटी है। कांग्रेस उम्मीदवार अंजू अग्रवाल को विजयी बनाने के लिए पार्टी ने वैश्य और मुस्लिमों में अपने हक में वोट के लिए माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पूर्व पालिकाध्यक्ष पंकज अग्रवाल की अगुवाई में कांग्रेस के नेताओं और पदाधिकारियों ने सांप्रदायिकता के खिलाफ कांग्रेस को ही विकल्प बताया है।
बसपा प्रत्याशी मुदस्सिर को रालोद प्रत्याशी शबनम परवीन का समर्थन मिलने से पार्टी को नई ऊर्जा मिली है। दलितों के वोटों के साथ मुस्लिमों का समीकरण साधने के लिए बसपा के नेताओं ने अपनी जीत की बिसात बिछाई है। हालांकि दलितों की शहरी क्षेत्र में बहुत ज्यादा संख्या नहीं है, फिर भी दलित और मुस्लिमों की एकजुटता को लेकर रणनीति तय होती रही।
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नगर निकाय चुनाव में प्रचार का शोर शुक्रवार शाम थम गया। नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए मैदान में खड़े प्रत्याशियों ने अपनी जीत के लिए समीकरण बैठाने का हर दांव खेल दिया है। भाजपा के अनुकूल माहौल में पार्टी जीत चाहती है, जबकि कांग्रेस, सपा और बसपा ने भी अपनी जीत के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।
नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए प्रमुख दलों के चार प्रत्याशी मैदान में हैं। पहली बार मुजफ्फरनगर पालिका को महिला के लिए आरक्षित किया गया है। भाजपा प्रत्याशी सुधा राज शर्मा की जीत के लिए भाजपा के महारथियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। संसदीय और विधानसभा चुनाव में जैसी जीत पार्टी को मिली, उसी तर्ज पर पालिका चुनाव में कमल की फतह के लिए रणनीति बनाई गई है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान और शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल दिनभर संगठन को दुरुस्त करने में जुटे रहे। उद्यमियों, व्यापारियों और पार्टी के परंपरागत वोटबैंक को एकजुट करने की कवायद की गई।
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प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक मिथलेश पाल की जीत के लिए पार्टी ने मुस्लिम नेताओं को शहर में उतार दिया है। कैराना विधायक नाहिद हसन, नजीबाबाद विधायक हाजी तस्लीम और मेरठ के पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद ने पार्टी की जीत के लिए मुस्लिमों को साधने का व्यूह तैयार किया। पार्टी नेताओं ने अहसास कराया कि मुस्लिमों का हित और सम्मान सपा में ही सुरक्षित है। मुस्लिम नेताओं ने शहर की कई बस्तियों में सभाएं की।
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कांग्रेस पालिका चुनाव में अपनी जीत को दोबारा बरकरार रखने के लिए जुटी है। कांग्रेस उम्मीदवार अंजू अग्रवाल को विजयी बनाने के लिए पार्टी ने वैश्य और मुस्लिमों में अपने हक में वोट के लिए माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पूर्व पालिकाध्यक्ष पंकज अग्रवाल की अगुवाई में कांग्रेस के नेताओं और पदाधिकारियों ने सांप्रदायिकता के खिलाफ कांग्रेस को ही विकल्प बताया है।
बसपा प्रत्याशी मुदस्सिर को रालोद प्रत्याशी शबनम परवीन का समर्थन मिलने से पार्टी को नई ऊर्जा मिली है। दलितों के वोटों के साथ मुस्लिमों का समीकरण साधने के लिए बसपा के नेताओं ने अपनी जीत की बिसात बिछाई है। हालांकि दलितों की शहरी क्षेत्र में बहुत ज्यादा संख्या नहीं है, फिर भी दलित और मुस्लिमों की एकजुटता को लेकर रणनीति तय होती रही।