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मौत बनकर घरों के चिराग बुझा रहा है खूनी नावला कट
Updated Fri, 13 Apr 2018 12:24 AM IST
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खतौली।
एनएच-58 पर नावला कट खूनी बनकर घरों के चिराग बुझा रहा है। माता-पिता का भी बच्चों के सिर से हाथ उठ रहा है। नावला कट पर हौलनाक दुर्घटनाओं का सिलसिला बदस्तूर जारी है। हाइवे बनने के बाद से इस कट पर दो दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, कई गंभीर रुप से घायल हो चुके हैं।
नगर में ट्रैफिक के भारी दबाव को देखते हुए 2010 में भंगेला से नावला कोठी के बीच नया बाईपास बनाया गया था। भारी वाहनों का दबाव दो स्थानों पर बंटने के बावजूद भी खतौली की खूनी सड़कें खून से अपनी प्यास बुझा रही हैं। एनएच 58 के साथ ही नावला कट पर भी सड़क हादसों का सिलसिला जारी है। जब से यह हाइवे बना है तब लेकर आज तक नावला कट पर दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। तीन वर्ष पूर्व की बात करें तो राजकुमार, नबी, मीनू की इस कट पर हादसे में मौत हुई। इनके अलावा नावला निवासी तपेश्वर, बहादुर की भी पिछले वर्ष हादसे में मारे गए थे। हाल ही में चार अप्रैल को किसान इकराम की मौत हुई। बृहस्पतिवार को भी इस कट के पास सड़क हादसे में बाइक सवार वृद्धा छोटी की मौत हो गई। इस कट के पास हादसों में कई दर्जन लोग घायल भी हो चुके हैं।
रेड लाइट भी नहीं लगवाई गई
एनएच-58 पर प्रशासन ने नावला कट पर अंडरपास बनवाने, सर्विस लेन का निर्माण करवाने, रेड लाइट लगवाने का ग्रामीणों और किसानों से वायदा किया था, लेकिन अभी तक किसी भी कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई है। इसे लेकर किसानों और ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। चेतावनी दी कि यदि इस पर जल्द कार्य शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन को मजबूर होंगे। आंदोलन जनकल्याण के संयोजक प्रमोद कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ एडीएम वित्त से भी मिलकर इस समस्या को उठाया। उन्होंने हाईवे अथॉरिटी से भी बात की। लेकिन सभी अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है यदि वायदे के मुताबिक इस पर कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन को मजबूर होंगे।
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क्या है वास्तविक समस्या
नेशनल हाईवे से गांव नावला, खेड़ी, अंबरपुर आदि गांव को सड़क जाती है। मंसूरपुर से गन्ना डालने वाले किसान और अन्य लोग जब वापस आते हैं तो वह 600 मीटर के लगभग गलत साइड में चलते हैं, तब नावला कि सड़क पर आते हैं या फिर सड़क के सामने हाईवे पर कुछ लोगों ने डिवाइडर तोड़कर गलत तरीके से कट बना रखा है। इससे सड़क पार करते हैं। कट का कोई संकेत ना होने के कारण आगे पीछे तेज गति से चलने वाले वाहनों को कट का कोई आभास नहीं होता। वे अपनी पूरी गति से वाहन चलाते रहते हैं। गलत तरीके से सडक़ पार करने के प्रयास में दुर्घटनाएं हो जाती हैं। अब तक इस कट पर एक दर्जन से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीण पिछले कई वर्षों से यहां पर कट बनवाने की मांग कर रहे हैं।
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एनएच-58 पर नावला कट खूनी बनकर घरों के चिराग बुझा रहा है। माता-पिता का भी बच्चों के सिर से हाथ उठ रहा है। नावला कट पर हौलनाक दुर्घटनाओं का सिलसिला बदस्तूर जारी है। हाइवे बनने के बाद से इस कट पर दो दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, कई गंभीर रुप से घायल हो चुके हैं।
नगर में ट्रैफिक के भारी दबाव को देखते हुए 2010 में भंगेला से नावला कोठी के बीच नया बाईपास बनाया गया था। भारी वाहनों का दबाव दो स्थानों पर बंटने के बावजूद भी खतौली की खूनी सड़कें खून से अपनी प्यास बुझा रही हैं। एनएच 58 के साथ ही नावला कट पर भी सड़क हादसों का सिलसिला जारी है। जब से यह हाइवे बना है तब लेकर आज तक नावला कट पर दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। तीन वर्ष पूर्व की बात करें तो राजकुमार, नबी, मीनू की इस कट पर हादसे में मौत हुई। इनके अलावा नावला निवासी तपेश्वर, बहादुर की भी पिछले वर्ष हादसे में मारे गए थे। हाल ही में चार अप्रैल को किसान इकराम की मौत हुई। बृहस्पतिवार को भी इस कट के पास सड़क हादसे में बाइक सवार वृद्धा छोटी की मौत हो गई। इस कट के पास हादसों में कई दर्जन लोग घायल भी हो चुके हैं।
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रेड लाइट भी नहीं लगवाई गई
एनएच-58 पर प्रशासन ने नावला कट पर अंडरपास बनवाने, सर्विस लेन का निर्माण करवाने, रेड लाइट लगवाने का ग्रामीणों और किसानों से वायदा किया था, लेकिन अभी तक किसी भी कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई है। इसे लेकर किसानों और ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। चेतावनी दी कि यदि इस पर जल्द कार्य शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन को मजबूर होंगे। आंदोलन जनकल्याण के संयोजक प्रमोद कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ एडीएम वित्त से भी मिलकर इस समस्या को उठाया। उन्होंने हाईवे अथॉरिटी से भी बात की। लेकिन सभी अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है यदि वायदे के मुताबिक इस पर कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन को मजबूर होंगे।
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क्या है वास्तविक समस्या
नेशनल हाईवे से गांव नावला, खेड़ी, अंबरपुर आदि गांव को सड़क जाती है। मंसूरपुर से गन्ना डालने वाले किसान और अन्य लोग जब वापस आते हैं तो वह 600 मीटर के लगभग गलत साइड में चलते हैं, तब नावला कि सड़क पर आते हैं या फिर सड़क के सामने हाईवे पर कुछ लोगों ने डिवाइडर तोड़कर गलत तरीके से कट बना रखा है। इससे सड़क पार करते हैं। कट का कोई संकेत ना होने के कारण आगे पीछे तेज गति से चलने वाले वाहनों को कट का कोई आभास नहीं होता। वे अपनी पूरी गति से वाहन चलाते रहते हैं। गलत तरीके से सडक़ पार करने के प्रयास में दुर्घटनाएं हो जाती हैं। अब तक इस कट पर एक दर्जन से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीण पिछले कई वर्षों से यहां पर कट बनवाने की मांग कर रहे हैं।