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जीवन जीने की कला सिखाती है श्रीमद् भागवत
Updated Fri, 31 Aug 2018 12:26 AM IST
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जीवन जीने की कला सिखाती है श्रीमद्भागवत
शाहपुर। कथा व्यास पंडित त्रिलोकी नाथ शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने शिव विवाह का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कस्बे की सिद्धपीठ मां श्रीगोकुला देवी मंदिर समिति के तत्वावधान में ब्रह्मलीन स्वामी लक्ष्मेश्वर आश्रम महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथाव्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत ऐसा ग्रंथ है, जिसके श्रवण मात्र से ही दुखों का नाश हो जाता है। दुख की बात है कि अधिकांश घरों में शिवपुराण, रामायण, गीता, भागवत ग्रंथ रखे मिलेंगे, लेकिन उनका अध्ययन नहीं किया जाता। मनुष्य को मानव योनि मिली है, इसलिए उसे परमात्मा की आराधना कर जीवन को सफल बनाना चाहिए, लेकिन मोह माया में लिप्त मनुष्य इस पुण्य कर्म को भूल जाता है। कथा के यज्ञमान विनय गोयल सपत्नीक रहे। महाआरती संजीव बंसल द्वारा की गई। उमेश गोयल, दिव्यांश अग्रवाल, सुरेंद्र जिंदल, विजय गोयल, विजेंदर सिंह, हरिमोहन सिंघल व नंदलाल सिंघल का सहयोग रहा। संचालन समिति महामंत्री अनुज अग्रवाल द्वारा किया गया।
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शाहपुर। कथा व्यास पंडित त्रिलोकी नाथ शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने शिव विवाह का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कस्बे की सिद्धपीठ मां श्रीगोकुला देवी मंदिर समिति के तत्वावधान में ब्रह्मलीन स्वामी लक्ष्मेश्वर आश्रम महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथाव्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत ऐसा ग्रंथ है, जिसके श्रवण मात्र से ही दुखों का नाश हो जाता है। दुख की बात है कि अधिकांश घरों में शिवपुराण, रामायण, गीता, भागवत ग्रंथ रखे मिलेंगे, लेकिन उनका अध्ययन नहीं किया जाता। मनुष्य को मानव योनि मिली है, इसलिए उसे परमात्मा की आराधना कर जीवन को सफल बनाना चाहिए, लेकिन मोह माया में लिप्त मनुष्य इस पुण्य कर्म को भूल जाता है। कथा के यज्ञमान विनय गोयल सपत्नीक रहे। महाआरती संजीव बंसल द्वारा की गई। उमेश गोयल, दिव्यांश अग्रवाल, सुरेंद्र जिंदल, विजय गोयल, विजेंदर सिंह, हरिमोहन सिंघल व नंदलाल सिंघल का सहयोग रहा। संचालन समिति महामंत्री अनुज अग्रवाल द्वारा किया गया।
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