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भागवत जन्मभूमि है श्री शुकदेव आश्रम
Updated Sun, 12 Nov 2017 12:38 AM IST
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मोरना। शुक्रताल के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत के उपदेशामृत से मनुष्य मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। पुण्य की प्राप्ति के लिए प्रभु भक्ति में जीवन अर्पित करें।
शुक्रताल स्थित शुकदेव आश्रम के डोगरे भागवत भवन में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत मृत्यु के भय से मुक्त करती है। जीवन में परिवर्तन लाती है। भगवान श्रीकृष्ण के स्मरण से ही मनुष्य पुण्य कर्म के पथ को प्राप्त करता है। जीवन में शुभ और पुण्य कर्म करने से मोक्ष की प्राप्ति संभव है। शुकतीर्थ के कण-कण में महामुनि शुकदेव समाहित है। कथा व्यास श्रेयस बड़वे महाराज ने कहा कि जीवन कल्याण के लिए भागवत महापुराण एक संजीवनी है। मनवचन और कर्म की पवित्रता जीवन को दिव्य बनाती है। महाराष्ट्र से आई कीर्तन मंडली केएम कुलकर्णी, सरिता, मानसी बड़वे ने भक्तिगीत सुनाए। सुमन शास्त्री श्यामाचार्य, हर्षमणि आदि व्यवस्था बनाने में लगे रहे।
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शुक्रताल स्थित शुकदेव आश्रम के डोगरे भागवत भवन में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत मृत्यु के भय से मुक्त करती है। जीवन में परिवर्तन लाती है। भगवान श्रीकृष्ण के स्मरण से ही मनुष्य पुण्य कर्म के पथ को प्राप्त करता है। जीवन में शुभ और पुण्य कर्म करने से मोक्ष की प्राप्ति संभव है। शुकतीर्थ के कण-कण में महामुनि शुकदेव समाहित है। कथा व्यास श्रेयस बड़वे महाराज ने कहा कि जीवन कल्याण के लिए भागवत महापुराण एक संजीवनी है। मनवचन और कर्म की पवित्रता जीवन को दिव्य बनाती है। महाराष्ट्र से आई कीर्तन मंडली केएम कुलकर्णी, सरिता, मानसी बड़वे ने भक्तिगीत सुनाए। सुमन शास्त्री श्यामाचार्य, हर्षमणि आदि व्यवस्था बनाने में लगे रहे।
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