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अस्पताल में नहीं है एंटी फ्लू वैक्सीन
Updated Wed, 02 Aug 2017 01:06 AM IST
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...दुआ कीजिए की आपको स्वाइन फ्लू न हो
मुजफ्फरनगर। आपको बुखार या बीमारी में स्वाइन फ्लू के लक्षण नहीं मिले, यह दुआ करते रहिए। यदि ऐसा है तो स्वास्थ्य विभाग प्राथमिक उपचार करने में भी बेसहारा है। दिलचस्प बात यह है कि एंटी फ्लू की वैक्सीन मरीज को नहीं लगती है, यह चिकित्सकों के लिए आती है। जबकि टैबलेट और कैप्सूल डिब्बों में बंद पड़े हैं। उधर, बुखार के प्रत्येक मरीज के ब्लड के चार जांच का सैंपल रखे जा रहे हैं।
जिले में स्वाइन फ्लू के दो केस मिल चुके हैं, जिसमें एक युवक की इस जानलेवा वायरस के कारण मौत हुई है, जबकि दूसरे मामले में ढाई साल का मासूम इसका शिकर हुआ है। समय से पहले जिले में स्वाइन फ्लू की दस्तक के बाद भी स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। विभाग ने बुखार के मरीजों की जांच के लिए अतिरिक्त काउंटर खोला है। अस्पताल में अभी तक एंटी स्वाइन फ्लू वैक्सीन तक नहीं पहुंच सकी है। खास यह है कि वर्ष 2016 में मिली एंटी फ्लू वैक्सीन को भी मरीजों के बजाए चिकित्सकों को स्वाइन फ्लू वायरस से बचाने के लिए प्रयोग किया गया। वर्ष 2016 में भी अस्पताल के चिकित्सकीय स्टॉफ, सीएचसी-पीएचसी पर सभी चिकित्सकों को स्वाइन फ्लू की वैक्सीन लगाई गई। मरीजों के उपचार की दवाईयां डिब्बों में बंद पड़ी है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ पंकज अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल में अभी तक स्वाइन फ्लू की एंटी फ्लू वैक्सीन नहीं आई है। वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। उधर, स्वास्थ्य विभाग के चीफ फार्मेसिस्ट केसी राय ने बताया कि एंटी फ्लू वैक्सीन 2017-18 की नहीं आई है।
हर साल बदलता है फ्लू का वायरस
मुजफ्फरनगर। चिकित्सकों के अनुसार हर साल स्वाइन फ्लू का वायरस बदलता है, जिसके चलते इसकी वैक्सीन बदल जाती है। वहीं, स्वाइन फ्लू की टेबलेट और कैप्सूल की एक्सपायरी डेट तीन से चार साल है, जबकि वैक्सीन एक साल के लिए अधिकृत होती है। यदि वर्ष 2016 की वैक्सीन है तो उसे 2017 में प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
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रोजाना आ रहे 30 मरीज
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल में दो स्थानों पर मरीजों की ब्लड सैंपल लिए जा रहे हैं। मलेरिया विभाग और इमरजेंसी वार्ड पर चिकित्सक जांच कर रहे हैं। हालांकि अभी तक रोजाना आने वाले 30 मरीजों में 4 से 5 में मलेरिया के लक्ष्ण मिल रहे हैं। अन्य बीमारी चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू या डेंगू के कोई मरीज नहीं आए हैं।
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मुजफ्फरनगर। आपको बुखार या बीमारी में स्वाइन फ्लू के लक्षण नहीं मिले, यह दुआ करते रहिए। यदि ऐसा है तो स्वास्थ्य विभाग प्राथमिक उपचार करने में भी बेसहारा है। दिलचस्प बात यह है कि एंटी फ्लू की वैक्सीन मरीज को नहीं लगती है, यह चिकित्सकों के लिए आती है। जबकि टैबलेट और कैप्सूल डिब्बों में बंद पड़े हैं। उधर, बुखार के प्रत्येक मरीज के ब्लड के चार जांच का सैंपल रखे जा रहे हैं।
जिले में स्वाइन फ्लू के दो केस मिल चुके हैं, जिसमें एक युवक की इस जानलेवा वायरस के कारण मौत हुई है, जबकि दूसरे मामले में ढाई साल का मासूम इसका शिकर हुआ है। समय से पहले जिले में स्वाइन फ्लू की दस्तक के बाद भी स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। विभाग ने बुखार के मरीजों की जांच के लिए अतिरिक्त काउंटर खोला है। अस्पताल में अभी तक एंटी स्वाइन फ्लू वैक्सीन तक नहीं पहुंच सकी है। खास यह है कि वर्ष 2016 में मिली एंटी फ्लू वैक्सीन को भी मरीजों के बजाए चिकित्सकों को स्वाइन फ्लू वायरस से बचाने के लिए प्रयोग किया गया। वर्ष 2016 में भी अस्पताल के चिकित्सकीय स्टॉफ, सीएचसी-पीएचसी पर सभी चिकित्सकों को स्वाइन फ्लू की वैक्सीन लगाई गई। मरीजों के उपचार की दवाईयां डिब्बों में बंद पड़ी है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ पंकज अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल में अभी तक स्वाइन फ्लू की एंटी फ्लू वैक्सीन नहीं आई है। वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। उधर, स्वास्थ्य विभाग के चीफ फार्मेसिस्ट केसी राय ने बताया कि एंटी फ्लू वैक्सीन 2017-18 की नहीं आई है।
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हर साल बदलता है फ्लू का वायरस
मुजफ्फरनगर। चिकित्सकों के अनुसार हर साल स्वाइन फ्लू का वायरस बदलता है, जिसके चलते इसकी वैक्सीन बदल जाती है। वहीं, स्वाइन फ्लू की टेबलेट और कैप्सूल की एक्सपायरी डेट तीन से चार साल है, जबकि वैक्सीन एक साल के लिए अधिकृत होती है। यदि वर्ष 2016 की वैक्सीन है तो उसे 2017 में प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
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रोजाना आ रहे 30 मरीज
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल में दो स्थानों पर मरीजों की ब्लड सैंपल लिए जा रहे हैं। मलेरिया विभाग और इमरजेंसी वार्ड पर चिकित्सक जांच कर रहे हैं। हालांकि अभी तक रोजाना आने वाले 30 मरीजों में 4 से 5 में मलेरिया के लक्ष्ण मिल रहे हैं। अन्य बीमारी चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू या डेंगू के कोई मरीज नहीं आए हैं।