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राज्यपाल की सुरक्षा में चूक, काफिले की गाड़ियां आपस में भिड़ीं
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मुरादाबाद। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की सुरक्षा में मंगलवार को चूक जैसी स्थिति बन गई। रामपुर से मुरादाबाद आते वक्त राज्यपाल की फ्लीट में अफसरों की गाड़ियां घुस आईं। इसी आपाधापी में जब ब्रेकर पर फ्लीट की एंबुलेंस ने ब्रेक लिए तो पीछे से आ रही डीएम रामपुर की गाड़ी अपने आगे चल रही एएलएस (एंडवास लाइफ सपोर्ट) में घुस गई। पीछे से एक के बाद एक तीन गाड़ियां आपस में टकराती चली गईं। डीएम की कार काफी क्षतिग्रस्त हो गई। कार मौके पर ही छोड़ डीएम को एसपी की कार में बैठना पड़ा।
नियमानुसार वीवीआईपी फ्लीट में एएलएस के पीछे पुलिस की टेल कार होनी चाहिए। हरे झंडे वाली इस कार में पुलिस कर्मी और पुलिस का पूरा संचार सिस्टम होता है। टेल कार फ्लीट की अंतिम कार होती है और इससे पहले कोई भी कार नहीं घुसनी चाहिए। लेकिन रामपुर में डीएम - एसपी समेत कई अफसरों की गाड़ियां फ्लीट के बीच में घुस गईं। राज्यपाल आनंदी बेन को मुरादाबाद लाने के लिए पूरी फ्लीट मुरादाबाद से ही रामपुर गई थी। मंगलवार सुबह जब राज्यपाल का काफिला रामपुर से मुरादाबाद के लिए निकला तो फलीट हाईवे पर पहुंचने से पहले ही स्पीड ब्रेकर पर एंबुलेंस ने ब्रेक लिया। इसकी वजह से उसके पीछे चल रही एएलएस ने भी ब्रेक लगाया। टेल को पीछे छोड़ते हुए एएलएस के पीछे डीएम रामपुर और एसपी की कार आ रही थी। डीएम की कार एएलएस में घुस गई। जोरदार टक्कर से काफिले में हड़कंप मच गया। डीएम की कार में पीछे से एसपी की कार घुसी और पीछे से टेल कार एसपी की कार में जा घुसी। इन गाड़ियोें से महज तीन कार के फासले पर आगे राज्यपाल की कार थी। काफिले की कारों के आपस में भिड़ने से अफसरों के हाथ पांव फूल गए। डीएम ने अपनी क्षतिग्रस्त कार मौके पर ही छोड़ी और एसपी की कार में बैठकर आगे रवाना हुए। एएलएस भी पीछे से क्षतिग्रस्त हुई है।
मंगलवार की सुबह राज्यपाल का गांधी समाधि पर कार्यक्रम था। उसके बाद उन्हें मुरादाबाद जाना था। मुरादाबाद से फ्लीट भी आ गई थी। गांधी समाधि से जब राज्यपाल का काफिला चला तो फ्लीट की टेल कार ने मेरी कार को तेजी से ओवरटेक किया। सामने स्पीड ब्रेकर था। टेल कार ने ब्रेक लिया तो मेरी कार उसमें टकरा गई। मेरे कार के पीछे चल रही कई कारें आपस में टकरा गईं। हादसे में किसी को चोट नहीं आई। राज्यपाल के काफिले का कोई वाहन नहीं टकराया था और न ही कोई बाहरी कार पलीट के बीच में आई थी।
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आंजनेय कुमार सिंह, डीएम रामपुर
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नियमानुसार वीवीआईपी फ्लीट में एएलएस के पीछे पुलिस की टेल कार होनी चाहिए। हरे झंडे वाली इस कार में पुलिस कर्मी और पुलिस का पूरा संचार सिस्टम होता है। टेल कार फ्लीट की अंतिम कार होती है और इससे पहले कोई भी कार नहीं घुसनी चाहिए। लेकिन रामपुर में डीएम - एसपी समेत कई अफसरों की गाड़ियां फ्लीट के बीच में घुस गईं। राज्यपाल आनंदी बेन को मुरादाबाद लाने के लिए पूरी फ्लीट मुरादाबाद से ही रामपुर गई थी। मंगलवार सुबह जब राज्यपाल का काफिला रामपुर से मुरादाबाद के लिए निकला तो फलीट हाईवे पर पहुंचने से पहले ही स्पीड ब्रेकर पर एंबुलेंस ने ब्रेक लिया। इसकी वजह से उसके पीछे चल रही एएलएस ने भी ब्रेक लगाया। टेल को पीछे छोड़ते हुए एएलएस के पीछे डीएम रामपुर और एसपी की कार आ रही थी। डीएम की कार एएलएस में घुस गई। जोरदार टक्कर से काफिले में हड़कंप मच गया। डीएम की कार में पीछे से एसपी की कार घुसी और पीछे से टेल कार एसपी की कार में जा घुसी। इन गाड़ियोें से महज तीन कार के फासले पर आगे राज्यपाल की कार थी। काफिले की कारों के आपस में भिड़ने से अफसरों के हाथ पांव फूल गए। डीएम ने अपनी क्षतिग्रस्त कार मौके पर ही छोड़ी और एसपी की कार में बैठकर आगे रवाना हुए। एएलएस भी पीछे से क्षतिग्रस्त हुई है।
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मंगलवार की सुबह राज्यपाल का गांधी समाधि पर कार्यक्रम था। उसके बाद उन्हें मुरादाबाद जाना था। मुरादाबाद से फ्लीट भी आ गई थी। गांधी समाधि से जब राज्यपाल का काफिला चला तो फ्लीट की टेल कार ने मेरी कार को तेजी से ओवरटेक किया। सामने स्पीड ब्रेकर था। टेल कार ने ब्रेक लिया तो मेरी कार उसमें टकरा गई। मेरे कार के पीछे चल रही कई कारें आपस में टकरा गईं। हादसे में किसी को चोट नहीं आई। राज्यपाल के काफिले का कोई वाहन नहीं टकराया था और न ही कोई बाहरी कार पलीट के बीच में आई थी।
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आंजनेय कुमार सिंह, डीएम रामपुर