UP: छह माह की ट्रेनिंग... लाखों खर्च के बाद तैयार होते हैं पुलिस के बेजुबां सिपाही, यह होती है एक दिन की खुराक
पुलिस अकादमी के घोड़े मेला ड्यूटी, दंगा नियंत्रण, और प्रतियोगिताओं में मेडल जीतने के लिए कड़ी ट्रेनिंग और लाखों के खर्च के बाद तैयार होते हैं। इनकी ट्रेनिंग में तीन से छह महीने लगते हैं। एक घोड़े पर प्रतिदिन करीब 500 रुपये खर्च होते हैं, और उनके खान-पान, सेहत, और नियमित प्रैक्टिस का विशेष ध्यान रखा जाता है।
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मेला ड्यूटी, दंगा नियंत्रण और प्रतियोगिता में मेडल जीतने वाले पुलिस के बेजुबां सिपाही यानी घोड़े कड़ी ट्रेनिंग और लाखों खर्च करने के बाद तैयार होते हैं। इनकी नियमित प्रैक्टिस, खान-पान से लेकर सेहत का भी पूरा ख्याल रखा जाता है।
पुलिस अकादमी में मौजूद 29 घोड़ों में देसी ब्रीड और थोरो ब्रीड के घोड़े हैं, जो प्रदेश स्तर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी कई मेडल पुलिस अकादमी को दिला चुके हैं। डाॅ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी के आरआई एमटी भगवती प्रसाद ने बताया कि पुलिस विभाग का हिस्सा बनाने के लिए तीन से पांच साल की उम्र के घोड़ों को खरीदा जाता है।
इसके बाद उन्हें छह माह तक ट्रेनिंग दी जाती है। फिर मेला ड्यूटी और दंगा नियंत्रण में इस्तेमाल किया जाता है। ड्रेसाज प्रतियोगिता के लिए घोड़े तीन साल में तैयार होते हैं जबकि शो जंपिंग प्रतियोगिता के लिए एक साल में तैयार हो जाता हैं।
इसी तरह टेंट पैगिंग प्रतियोगिता के लिए छह माह की ट्रेनिंग दी जाती है। एक घोड़े पर प्रति दिन करीब 500 रुपये का खर्च आता है। दो घोड़ों की देखरेख के लिए एक कर्मचारी रहता है। सुबह साढ़े पांच बजे अस्तबल की सफाई की जाती है।
छह बजे घोड़ों को मैदान में ले जाया जाता है। इसके बाद दो घंटे तक घोड़ों की प्रैक्टिस कराई जाती है। प्रैक्टिस के बाद घोड़ों को रेत में लेटाया जाता है, जिससे उनकी थकान दूर हो जाती है।
घोड़े की एक दिन की खुराक
एक किलो चना, दो किलो जौ, एक किलो चोकर, 30 ग्राम नमक और 25 किलो हरी घास को एक साथ मिलाकर उसे मिलाकर तीन भाग में बांट लिया जाता है। इसके बाद सुबह नौ बजे, दोपहर एक बजे और शाम को साढ़े पांच बजे घोड़े को खाने को दिया जाता है। खुराक देने के बाद एक- एक घंटे मालिस की जाती है। इसके साथ घोड़ों को सरसों का तेल भी पिलाया जाता है।
मोंटीना और राठौर की जंप से बरस रहा सोना
नाम मोंटीना, उम्र करीब 14 साल, नस्ल थोरोब्रीड जिसकी जंप से खूब सोना बरस रहा है। मोंटीना ने प्रदेश स्तर पर तो नाम कमाया ही, ऑल इंडिया में भी कई मेडल चुकी है। इसी तरह राठौर भी मुरादाबाद पुलिस के लिए अहम घोड़ा है।
मोंटीना को 13 मार्च 2014 को पंजाब से एक लाख 57 हजार 500 में खरीदा गया था। तब मोंटीना की उम्र चार साल थी। मुरादाबाद में ही मोंटीना को ट्रेनिंग दी गई। उसने जंपिंग में महारथ हासिल की। मोंटीना के नाम प्रदेश और राष्ट्र स्तर पर 100 से ज्यादा मेडल हैं।
जिसमें गोल्ड और सिल्वर मेडल हैं। इसी तरह घोड़े राठौर की भी अपनी कहानी है। राठौर को 12 मार्च 2014 को एक लाख 57 हजार में खरीदा गया था। थोरोब्रीड नस्ल के राठौर को मुरादाबाद में ही ट्रेंड किया गया। इसी तरह अन्य घोड़ों में भी कुछ न कुछ खासियत है।
बेड़े में यह घोड़े भी शामिल
सौल, परमवीर, स्वास्तिक, डायमंड, नीलकंठ, भारत, बादल, राजा, कौशल, हिमवीर, गौरव, ध्रुव, अग्निवीर, दामिनी, उर्वी, रिमझिम, सरताज, बूस्टर, कमल, राजू, गुलाब नाम के घोड़े हैं।
घुड़सवारी प्रतियोगिता का आगाज आज से
डाॅ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी के मैदान में बृहस्पतिवार से यूपी पुलिस की घुड़सवारी प्रतियोगिता का आगाज हो गया। प्रतियोगिता में यूपी के अलावा उत्तराखंड के घोड़े और सवार भी भाग लेंगे। पुलिस अकादमी के एएसपी महेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतियोगिता में लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, मेरठ, बरेली और प्रशिक्षण जोन मुरादाबाद समेत आठ टीमों के घुड़सवार प्रतिभाग करेंगे।
जिसमें टेंट पैगिंग, शो जंपिंग, ड्रेसाज प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में पहली बार उत्तराखंड की भी टीम प्रतिभाग कर रही है। चार दिन तक चलने वाली घुड़सवारी प्रतियोगिता का समापन 27 को होगा। विजेता व उपविजेता घुड़सवारों को अकादमी के एडीजी राजीव सभरवाल द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में मुरादाबाद के 29 घोड़े समेत 85 घोड़े अपना जलवा बिखेरते नजर आएंगे। पुलिस अकादमी की टीम पिछले तीन साल से चैंपियन बनती आ रही है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश घुड़सवारी टीम ने 2021 में आईटीबीपी में आयोजित प्रतियोगिता में तृतीय स्थान और 2022 में बीएसएफ में आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगिता में ट्रेनिज जंप में प्रथम और शो जंपिंग में तीसरा स्थान हासिल किया था।