मुरादाबाद के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में इन दिनों 889 महिला दरोगा प्रशिक्षण ले रहीं हैं। एक हफ्ते बाद पासिंग आउट परेड होने पर सभी प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में पुलिसिंग का हिस्सा बन जाएंगी। प्रशिक्षण के दौरान सभी को अपराध से जुड़ी पढ़ाई के साथ हथियारों की भी ट्रेनिंग दी जा रही है।
UP: वर्दी पहन पिता का सपना किया पूरा, भाई-बहन साथ बने दरोगा, जानें यूपी की इन बेटियों की सक्सेस स्टोरी
शिवानी ने दरोगा बनकर पूरा किया पिता का सपना
गाजियाबाद की शिवानी तंवर एनसीसी कैडेट हैं। वह राजनीतिशास्त्र में एमए हैं। उनके पिता अनिल तंवर दिल्ली जल बोर्ड में कार्यरत हैं। भाई अभिषेक तंवर सीए हैं। जबकि एक बहन कामिनी तंवर टीचर हैं। मां कमलेश हैं। पिता और परिवार के सभी सदस्यों का सपना था कि शिवानी दरोगा बने। इसके लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की। परिणामस्वरूप शिवानी दरोगा बन गईं।
पिता से मिली प्रेरणा
मेरे पिता विजय कुमार सिंह चौहान गाजियाबाद में मुख्य आरक्षी पद पर तैनात हैं। मैंने हमेशा उन्हें लोगों की मदद करते हुए देखा तो मुझे भी पुलिस में आने की प्रेरणा मिली। मैंने स्वाध्याय से यह परीक्षा उत्तीर्ण की। मेरा मानना है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। जरूरत सिर्फ दृढ़ इच्छाशक्ति की है। मुझे वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों को देखकर बुरा लगता है। इसलिए मैं उनके लिए काम करना चाहती हूं। माता-पिता को छोड़ने वाले बच्चों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। -आकांक्षा चौहान, गाजियाबाद
सिविल सर्विसेज में जाना है सपना
सिविल सर्विसेज में जाना मेरा सपना है। मैं अपने परिवार में सबसे बड़ी हूं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। इसलिए मैं चाहती थी कि पहले पुलिस में ही कांस्टेबल या सब इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हो जाऊं, ताकि मेरी तैयारी में होने वाले खर्चे का बोझ परिवार पर न पड़े। मेरा मानना है कि अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की साक्षरता की दर कम है। बेटियाें को पढ़ाई का माहौल मिल सके, इसके लिए मैं गांव में पुस्तकालय खोलना चाहती हूं। -अनीता यादव, गाजीपुर
सरकारी स्कूल में की पढ़ाई
मैंने सरकारी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की है। इसके बाद आसपड़ोस के लोग सिर्फ मेरी शादी करवाने की ही बात करते थे, लेकिन मुझे सिविल सर्विसेज में जाना है। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और मेरे सपने बड़े हैं। इसलिए पहले मैंने रेलवे की नौकरी की और अब यूपी एसआई का प्रशिक्षण ले रही हूं। दो बार सिविल सर्विस का साक्षात्कार दे चुकी हैं, लेकिन अंतिम मेरिट में रह जाती हूं। मैं भीख मांगने वाले बच्चों के उत्थान के लिए काम करना चाहती हूं। उनको पढ़ाना बहुत जरूरी है। -अलका कुमारी, पटना बिहार
युवाओं को कराती हूं कोचिंग
मैंने डीएलएड किया है। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग करवाती थी। मेरा एक साथ दो जगह रेलवे एनटीपीसी और यूपी एसआई पद पर चयन हुआ था। मुझे समाज के लिए कार्य करना था, इसलिए मैंने एसआई की नौकरी ज्वाइन की। मुझे भीख मांगने वाले बच्चे और खासकर मानसिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए कार्य करना है। इस तबके के बच्चे व बेटियों को शिक्षा दिलवाना जरूरी है, इसलिए समय निकालकर दो घंटे पढ़ाया करूंगी। - दीपाली रुहेला, मुजफ्फरनगर
अफसर बनना चाहती हैं प्रीति चौहान
प्रीति चौहान के पिता राजेंद्र सिंह दवा व्यापारी हैं। प्रीति का एक भाई अंकित चौहान कांस्टेबल है। प्रीति एमए व बीएड हैं। उनकी तैयारी अभी जारी है। वह चाहती हैं कि पीसीएस अफसर बन जाएं। तैनाती के दौरान भी वह अपनी तैयारी जारी रखेंगी।
हो गया था कोरोना, नहीं छोड़ा मदद करना
कुशीनगर निवासी रीना बताती हैं कि मैं एनसीसी कैडेट थी। पुलिस में आना मेरी पहली पसंद थी। मेरी पहली नियुक्ति कांस्टेबल के रूप में हुई थी। संक्रमण काल में मैं कोरोना संक्रमित हो गई थी। लेकिन मैंने बिना अपनी चिंता किए लोगों को राशन तक पहुंचाने में मदद की थी।
सुबह 4 बजे उठकर दौड़ती थीं मनीषा
प्रयागराज निवासी मनीषा पटेल का कहना है कि उनके पिता भाग्य सिंह किसान हैं। उनकी मां चंदा श्री का सपना था कि बेटी पुलिस विभाग में अधिकारी बने। मां का सपना पूरा करने के लिए मनीषा रोजाना सुबह 4 बजे उठती थीं और छोटे भाई को साथ लेकर गांव की कच्ची सड़क पर दौड़ लगाती थीं। 2018 में बीएससी के बाद मनीषा ने मेहनत दोगुनी कर दी और वह यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में पास हो गईं।