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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: चुनौतियों का किया सामना..फिर छुआ आसमां, इन बेटियों ने जो ठाना कर दिखाया; आप भी जानें

Fri, 08 Mar 2024 04:48 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 08 Mar 2024 04:48 PM IST
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International Women Day: Faced challenges... then touched sky, know interesting story
रामपुर की बेटियों ने अपने दम पर पाया मुकाम - फोटो : संवाद

बदलते दौर में बेटियां आज हर क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा रही हैं। पढ़ाई के साथ खेलों में भी बेटियां अपनी मेहनत से परिवार और जिले का नाम रोशन कर रही हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी बेटियां घबराने के बजाय मेहनत कर मुकाम हासिल कर आगे बढ़ रही हैं। रामपुर की बेटियों ने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया तो वहीं कुछ बेटियों ने पढ़ाई में खुद को साबित कर जिले का नाम रोशन किया है। जीवन के संघर्ष में खुद का कभी मनोबल कम नहीं होने दिया। हम आज कुछ ऐसी ही बेटियों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने मेहनत से सफलता के शिखर को छुआ है।

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उजाला बोरा - फोटो : संवाद

उजाला बनी एथलेटिक का सितारा

मूलरूप से रामपुर के ग्राम किशनपुर की रहने वाली खिलाड़ी उजाला ने अपनी बड़ी बहन पूजा का खेल के प्रति समर्पण देख खेलों में जाने की ठान ली थी। 17 साल की उम्र में एथलेटिक के प्रति लगाव हो गया। स्कूली शिक्षा खुर्शीद कन्या इंटर कॉलेज में गेम्स में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिला। डिस्ट्रिक्ट लेवल पर खेलने के साथ ही स्टेडियम में भी अभ्यास करने जाती रहीं। कोच के मार्गदर्शन में खेल की बारीकियां सीखीं। 12वीं पास होने पर ओपन जूनियर सीनियर वर्ग के साथ कई प्रतियोगिताओं में छाप छोड़ी। 2018 में जूनियर नेशनल गेम्स हुए। जिसमें विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश में मेडल झटके थे। इसके बाद 2019 में यूनिवर्सिटी की ओर से खेला। 2022 में हुई चेन्नई इंटरनेशनल स्तर पर खेला गया, जहां दौड़ में उन्होंने रामपुर को गोल्ड दिलाया।

 

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योगिता - फोटो : संवाद

योगिता बोरा ने हॉकी में बनाई पहचान

पुरानी आवास विकास कॉलोनी सिविल लाइंस निवासी योगिता बोरा ने प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर तक हॉकी खेलकर रामपुर का नाम रोशन किया है। 2017-18 में आंध्र प्रदेश के कोलम में हुई प्रतियोगिता में मेडल हासिल करने के बाद हौसला बढ़ा तो 2017 में सीनियर नेशनल तक गई। यहां रोहतक की नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। जिस वजह से उनकी रेलवे में नौकरी भी लग गई। योगिता बताती हैं कि चक दे इंडिया फिल्म से काफी प्रभावित हैं और आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और रामपुर का नाम रोशन करना चाहती हैं। वो सीनियर हॉकी के लिए तैयारी कर रहीं हैं।

 

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International Women Day: Faced challenges... then touched sky, know interesting story
सुबुक - फोटो : संवाद

जज बनकर सुबुक ने किया परिवार का नाम रोशन 

केमरी निवासी सुबुक ने पीसीएस-जे की परीक्षा में 29वीं रैंक हासिल की थी। पिता का 2014 में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने हौसला नहीं खोया। पिता ने कहा था कि बेटा तुमको जज बनाऊंगा। सुबुक ने जज बनकर पिता का सपना पूरा किया। केमरी निवासी मिराज अहमद ईंट भट्ठा संचालक थे। उनके निधन के बाद सुबुक के चाचा इजहार अहमद ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाई। सुबुक ने प्रारंभिक पढ़ाई होली चाइल्ड स्कूल रुद्रपुर से की। इसके बाद 2017 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से 12वीं की परीक्षा पास की। वर्ष 2022 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ही बीए-एलएलबी की परीक्षा उत्तीर्ण की। जज बनने के बाद सुबुक को हाल में ही फर्रुखाबाद में तैनाती मिली है।

 

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International Women Day: Faced challenges... then touched sky, know interesting story
मोनिका सिंह - फोटो : संवाद

कड़ी मेहनत के जरिये पाई एसडीएम की कुर्सी

एसडीएम सदर के पद पर तैनात मोनिका सिंह ने कड़े संघर्ष और मेहनत के जरिए लक्ष्य को हासिल किया। मूलरूप से उन्नाव निवासी मोनिका सिंह ने वर्ष 2019 में पीसीएस की परीक्षा पास की। पीसीएस में मोनिका सिंह ने 37वीं रैंक हासिल की थी। उन्नाव जिले के बिछिया ब्लॉक के गांव ईश्वरीखेड़ा की मूल निवासी मुनेश्वर सिंह की बेटी मोनिका सिंह ने बताया कि पिता की नौकरी के चलते वह बचपन में कुछ ही दिन अपने गांव में रह सकीं। उनकी पूरी पढ़ाई गुजरात में हुई है। मां विमला गृहिणी हैं। मंजिल पाने के लिए उन्होंने काफी कड़ी मेहनत की। उनका कहना है कि महिलाएं किसी से कम नहीं हैं। महिलाओं को खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। खुद को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए। इसके लिए बड़ी मेहनत भी करनी पड़ती है। फिलहाल उनका परिवार गाजियाबाद में रह रहा है।

 

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