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Moradabad News: भारी विरोध के बीच तीन दुकानें सील, पांच घंटे चला हंगामा
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मुरादाबाद रोडवेज बस स्टेशन के सामने दुकान हटाने आऐ रेलवे पुलिस और अधिकारी के साथ हुई बहस।अमर उ
मुरादाबाद। रेलवे की जमीन पर बनी दुकानों को हटाने के लिए सोमवार को टीम पहुंची तो भारी विरोध का सामना करना पड़ा। रेलवे द्वारा लाल निशान लगी दुकानों को कब्जे में लेकर बुलडोजर चलाने की तैयारी थी। व्यापारी अपनी दुकानों के मामले में न्यायालय में विचाराधीन होने के दस्तावेज लेकर अड़े रहे। बमुश्किल तीन दुकानें सील की गईं।
सुबह 11 से लेकर शाम चार बजे तक मुरादाबाद डिपो के सामने सड़क पर जमकर हंगामा हुआ। एक ओर रेलवे के इंजीनियर, आरपीएफ और सिविल पुलिस दुकानों को खाली करने के लिए व्यापारियों पर दबाव बनाते रहे। दूसरी ओर व्यापारी कोर्ट का निर्णय आने तक इंतजार करने की दुहाई देते रहे। एसपी सिटी रणविजय सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार पांडेय भी मौके पर पहुंच गए। रेलवे की टीम से बात करने की कहकर वह चले गए।
व्यापारी एकजुट होकर अपनी दुकानों के शटर गिराकर कोर्ट में चल रहे मुकदमों के दस्तावेज लेकर दुकानों के सामने खड़े हो गए। आरपीएफ और रेलवे की इंजीनियरिंग टीम के बार-बार समझाने पर भी वह कोर्ट में मामले के विचाराधीन होने का हवाला देकर अपनी बात पर अड़े रहे। व्यापारियों का कहना था की दुकानों पर सील लगाने के लिए या बुलडोजर चलाने के लिए कोर्ट का आदेश रेलवे की टीम के पास नहीं है।
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वहीं रेलवे के पास ऐसे दुकानदारों की सूची थी, जिनके वाद कोर्ट में नहीं हैं। उन दुकानों पर भी कार्रवाई नहीं करने दी गई तो रेलवे की टीम ने पुलिस बल बुला लिया। पुलिस की मौजूदगी में एक दुकान पर सील लगी तो व्यापारी कार्रवाई का लिखित ब्योरा मांगने लगे। पुलिस की मदद से दो और दुकानें सील की गईं।
जब तक दूसरी जगह न हो व्यवस्था, कार्रवाई न की जाए
तीन दुकानों पर रेलवे की सील लगने के बाद नगर विधायक रितेश गुप्ता मौके पर पहुंच गए। उन्होंने रेलवे की इंजीनियरिंग टीम से बात की। उन्होंने कहा कि व्यापारी टकराव नहीं चाहते। कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। कोर्ट में विचाराधीन मामलों का निर्णय आने तक रेलवे को इंतजार करना चाहिए। जब तक जिला प्रशासन या नगर निगम व्यापारियों को दूसरे स्थान पर दुकानें लगाने की व्यवस्था नहीं कर देता, तब तक कार्रवाई न की जाए। विधायक के हस्तक्षेप के बाद रेलवे की टीम अपना बुलडोजर लेकर लौट गई।
कार्रवाई टली लेकिन फिर लौट सकती है टीम
विधायक के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई बेशक टल गई हो लेकिन रेलवे के इंजीनियरों ने वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी है। टीम का कहना था कि रेल प्रशासन का आदेश मिलते ही कार्रवाई की जाएगी। वहीं व्यापारी संजय अरोड़ा, भरत अरोड़ा, अनीस, गौरव गुप्ता, कमल कुमार आदि ने कहा कि हमें दूसरा स्थान दुकानों के लिए दे दिया जाए। कार्रवाई करने के लिए कोर्ट के निर्णय का इंतजार किया जाए। यदि रेलवे मनमानी करेगा तो वह बुलडोजर के सामने खड़े हो जाएंगे लेकिन 5000 लोगों को बेरोजगार नहीं होने देंगे।
वर्जन
जमीन रेलवे की है यह बात दुकानदार भी मान रहे हैं। मसला समय और स्थान देने का है। इसके लिए जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों से सांमजस्य स्थापित कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम
रेलवे जबरन दुकानदारों को हटा रहा है, जोकि गलत है। जिला प्रशासन से बातचीत कर दूसरे स्थान पर दुकानों के लिए व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं। जब तक आजीविका का इंतजाम न हो जाए, तब तक कार्रवाई न की जाए।
- रितेश गुप्ता, नगर विधायक
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सुबह 11 से लेकर शाम चार बजे तक मुरादाबाद डिपो के सामने सड़क पर जमकर हंगामा हुआ। एक ओर रेलवे के इंजीनियर, आरपीएफ और सिविल पुलिस दुकानों को खाली करने के लिए व्यापारियों पर दबाव बनाते रहे। दूसरी ओर व्यापारी कोर्ट का निर्णय आने तक इंतजार करने की दुहाई देते रहे। एसपी सिटी रणविजय सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार पांडेय भी मौके पर पहुंच गए। रेलवे की टीम से बात करने की कहकर वह चले गए।
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व्यापारी एकजुट होकर अपनी दुकानों के शटर गिराकर कोर्ट में चल रहे मुकदमों के दस्तावेज लेकर दुकानों के सामने खड़े हो गए। आरपीएफ और रेलवे की इंजीनियरिंग टीम के बार-बार समझाने पर भी वह कोर्ट में मामले के विचाराधीन होने का हवाला देकर अपनी बात पर अड़े रहे। व्यापारियों का कहना था की दुकानों पर सील लगाने के लिए या बुलडोजर चलाने के लिए कोर्ट का आदेश रेलवे की टीम के पास नहीं है।
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वहीं रेलवे के पास ऐसे दुकानदारों की सूची थी, जिनके वाद कोर्ट में नहीं हैं। उन दुकानों पर भी कार्रवाई नहीं करने दी गई तो रेलवे की टीम ने पुलिस बल बुला लिया। पुलिस की मौजूदगी में एक दुकान पर सील लगी तो व्यापारी कार्रवाई का लिखित ब्योरा मांगने लगे। पुलिस की मदद से दो और दुकानें सील की गईं।
जब तक दूसरी जगह न हो व्यवस्था, कार्रवाई न की जाए
तीन दुकानों पर रेलवे की सील लगने के बाद नगर विधायक रितेश गुप्ता मौके पर पहुंच गए। उन्होंने रेलवे की इंजीनियरिंग टीम से बात की। उन्होंने कहा कि व्यापारी टकराव नहीं चाहते। कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। कोर्ट में विचाराधीन मामलों का निर्णय आने तक रेलवे को इंतजार करना चाहिए। जब तक जिला प्रशासन या नगर निगम व्यापारियों को दूसरे स्थान पर दुकानें लगाने की व्यवस्था नहीं कर देता, तब तक कार्रवाई न की जाए। विधायक के हस्तक्षेप के बाद रेलवे की टीम अपना बुलडोजर लेकर लौट गई।
कार्रवाई टली लेकिन फिर लौट सकती है टीम
विधायक के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई बेशक टल गई हो लेकिन रेलवे के इंजीनियरों ने वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी है। टीम का कहना था कि रेल प्रशासन का आदेश मिलते ही कार्रवाई की जाएगी। वहीं व्यापारी संजय अरोड़ा, भरत अरोड़ा, अनीस, गौरव गुप्ता, कमल कुमार आदि ने कहा कि हमें दूसरा स्थान दुकानों के लिए दे दिया जाए। कार्रवाई करने के लिए कोर्ट के निर्णय का इंतजार किया जाए। यदि रेलवे मनमानी करेगा तो वह बुलडोजर के सामने खड़े हो जाएंगे लेकिन 5000 लोगों को बेरोजगार नहीं होने देंगे।
वर्जन
जमीन रेलवे की है यह बात दुकानदार भी मान रहे हैं। मसला समय और स्थान देने का है। इसके लिए जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों से सांमजस्य स्थापित कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम
रेलवे जबरन दुकानदारों को हटा रहा है, जोकि गलत है। जिला प्रशासन से बातचीत कर दूसरे स्थान पर दुकानों के लिए व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं। जब तक आजीविका का इंतजाम न हो जाए, तब तक कार्रवाई न की जाए।
- रितेश गुप्ता, नगर विधायक