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Moradabad News: जिला अस्पताल में कंबल तो हैं... पर मरीजों के लिए नहीं
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मुरादाबाद।
ठंड का अंदाजा अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की संख्या से लगाया जा सकता है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में भर्ती मरीज ही ठंड में सिकुड़ने को मजबूर हैं। बुधवार को अस्पताल के सर्जिकल, टीबी व हड्डी वार्ड में भर्ती मरीजों के पास कंबल नहीं थे। स्टोर में पर्याप्त संख्या में कंबल रखे थे लेकिन स्टाफ ने मरीजों को नहीं दिए।
मजबूर तीमारदारों को ठंड के कारण घर से कंबल मंगाने पड़े। दूसरी ओर इसी अस्पताल के बच्चा वार्ड में सभी मरीजों को स्टाफ ने कंबल उपलब्ध कराए हैं। दूसरे वार्ड के स्टाफ इनसे सीख नहीं ले रहे हैं। हड्डी वार्ड में भर्ती मरीजों का कहना था कि डॉक्टर सुबह शाम देखने आते हैं तो स्टाफ सक्रिय हो जाता है। बाकी समय कोई ध्यान नहीं रखा जाता। बुधवार को टीबी वार्ड में पांच मरीज भर्ती थे, उन्होंने कहा कि अस्पताल के स्टाफ इस वार्ड में आने से बचते हैं, बहुत जरूरी होने पर ही मरीजों के बीच आना चाहते हैं। तीमारदारों को वार्ड के बाहर बुलाकर दवा समझा दी जाती है। रात में परेशानी होने पर तीमारदारों को स्टाफ के कमरे का दरवाजा पीटना पड़ता है। तब जाकर स्टाफ उठते है, फिर भी देखने नहीं आते। परेशानी पूछकर तीमारदार को ही दवा थमा दी जाती है। हड्डी व सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीजों की भी यही परेशानी है।
केस-1
बुधवार शाम छह बजे टीबी वार्ड के बाहर बैठी शशि ने बताया कि उसकी बड़ी बहन दो दिन से जिला अस्पताल में भर्ती है। टीबी वार्ड में स्टाफ आने से कतराते हैं। सुबह व शाम को डॉक्टर देखते हैं तो स्टाफ उनके साथ रहते हैं। इसके बाद मरीज को परेशानी होने पर भी कोई नहीं देखता। शशि का कहना था कि मंगलवार रात एक बजे उसके मरीज को काफी खांसी हो रही थी, 10 मिनट तक दरवाजा खटखटाने के बाद स्टाफ की नींद खुली। तब उन्होंने दवा थमा दी, लेकिन मरीज को नहीं देखा।
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केस-2
जयंतीपुर निवासी पूनम की बेटी जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती है। मरीज की दो दिन पहले सर्जरी हुई है। पूनम ने बताया कि स्टाफ ने अब तक कंबल उपलब्ध नहीं कराया है। मजबूरी में उन्हें घर से कंबल मंगाना पड़ा। सुबह व शाम को डॉक्टर के आने के समय ही वार्ड में दिखाई देते हैं। इसके बाद मरीज दर्द से कराहते रहें, तो भी बहुत मुश्किल से स्टाफ देखने आते हैं। भर्ती कराने के बाद जैसे उनकी कोई जिम्मेदारी ही नहीं रह जाती।
- हम अपनी टीम के साथ रोजाना अस्पताल के वार्डों का निरीक्षण करते हैं। जिन मरीजों पर कंबल नहीं थे, उनसे पूछताछ की गई तो पता चला कि वे अपने घर से कंबल लेकर आए हैं। इसलिए उन्हें जरूरत नहीं थी। अस्पताल में पर्याप्त संख्या में कंबल हैं। स्टाफ को निर्देश हैं कि मरीज को कंबल व चादर हर हाल में उपलब्ध कराए जाएं। - डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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ठंड का अंदाजा अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की संख्या से लगाया जा सकता है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में भर्ती मरीज ही ठंड में सिकुड़ने को मजबूर हैं। बुधवार को अस्पताल के सर्जिकल, टीबी व हड्डी वार्ड में भर्ती मरीजों के पास कंबल नहीं थे। स्टोर में पर्याप्त संख्या में कंबल रखे थे लेकिन स्टाफ ने मरीजों को नहीं दिए।
मजबूर तीमारदारों को ठंड के कारण घर से कंबल मंगाने पड़े। दूसरी ओर इसी अस्पताल के बच्चा वार्ड में सभी मरीजों को स्टाफ ने कंबल उपलब्ध कराए हैं। दूसरे वार्ड के स्टाफ इनसे सीख नहीं ले रहे हैं। हड्डी वार्ड में भर्ती मरीजों का कहना था कि डॉक्टर सुबह शाम देखने आते हैं तो स्टाफ सक्रिय हो जाता है। बाकी समय कोई ध्यान नहीं रखा जाता। बुधवार को टीबी वार्ड में पांच मरीज भर्ती थे, उन्होंने कहा कि अस्पताल के स्टाफ इस वार्ड में आने से बचते हैं, बहुत जरूरी होने पर ही मरीजों के बीच आना चाहते हैं। तीमारदारों को वार्ड के बाहर बुलाकर दवा समझा दी जाती है। रात में परेशानी होने पर तीमारदारों को स्टाफ के कमरे का दरवाजा पीटना पड़ता है। तब जाकर स्टाफ उठते है, फिर भी देखने नहीं आते। परेशानी पूछकर तीमारदार को ही दवा थमा दी जाती है। हड्डी व सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीजों की भी यही परेशानी है।
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केस-1
बुधवार शाम छह बजे टीबी वार्ड के बाहर बैठी शशि ने बताया कि उसकी बड़ी बहन दो दिन से जिला अस्पताल में भर्ती है। टीबी वार्ड में स्टाफ आने से कतराते हैं। सुबह व शाम को डॉक्टर देखते हैं तो स्टाफ उनके साथ रहते हैं। इसके बाद मरीज को परेशानी होने पर भी कोई नहीं देखता। शशि का कहना था कि मंगलवार रात एक बजे उसके मरीज को काफी खांसी हो रही थी, 10 मिनट तक दरवाजा खटखटाने के बाद स्टाफ की नींद खुली। तब उन्होंने दवा थमा दी, लेकिन मरीज को नहीं देखा।
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केस-2
जयंतीपुर निवासी पूनम की बेटी जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती है। मरीज की दो दिन पहले सर्जरी हुई है। पूनम ने बताया कि स्टाफ ने अब तक कंबल उपलब्ध नहीं कराया है। मजबूरी में उन्हें घर से कंबल मंगाना पड़ा। सुबह व शाम को डॉक्टर के आने के समय ही वार्ड में दिखाई देते हैं। इसके बाद मरीज दर्द से कराहते रहें, तो भी बहुत मुश्किल से स्टाफ देखने आते हैं। भर्ती कराने के बाद जैसे उनकी कोई जिम्मेदारी ही नहीं रह जाती।
- हम अपनी टीम के साथ रोजाना अस्पताल के वार्डों का निरीक्षण करते हैं। जिन मरीजों पर कंबल नहीं थे, उनसे पूछताछ की गई तो पता चला कि वे अपने घर से कंबल लेकर आए हैं। इसलिए उन्हें जरूरत नहीं थी। अस्पताल में पर्याप्त संख्या में कंबल हैं। स्टाफ को निर्देश हैं कि मरीज को कंबल व चादर हर हाल में उपलब्ध कराए जाएं। - डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल